EPISODE · Oct 18, 2020 · 54 MIN
देवी कवच 🙏 Devi Kavach : Durga Puja Special : Durga Saptshati Paath with interpretation in Hindi
from BHARATVANI... Kavita Sings INDIA · host Kavita Sings India भारतवाणी
देवी कवच : #DeviKavach : #दुर्गापूजा विशेष 🙏 #DurgaSaptashati #दुर्गासप्तशती - Episode 3 - नवरात्रि में जो लोग मां की विशेष पूजा-उपासना करते हैं उनपर मां की बड़ी कृपा होती है. नवरात्रि में नौ दिन का व्रत रखना और श्रीदुर्गासप्तशती के संपूर्ण 13 अध्यायों के पाठ का बड़ा माहात्म्य बताया गया है. शास्त्रों में कवच, अर्गला और कीलक के पाठ के उपरांत श्रीदुर्गासप्तशती के सस्वर पाठ से समस्त अमंगलों का नाश होता है. माता की कृपा से सुख-शातिं, यश-कीर्ति, धन-धान्य, आरोग्य, बल-बुद्धि की प्राप्ति होती है. भक्तों द्वारा श्रीदुर्गा सप्तशती का पाठ माता को प्रिय है. परंतु सप्तशती में सात सौ श्लोक हैं जो तेरह अध्यायों में आते हैं. माताभक्तों के मन में इच्छा रहती है कि वे कम से कम नवरात्र में तो श्रीदुर्गासप्तशती का नियमित पाठ कर ही लें परंतु सात सौ श्लोकों का पाठ करने में समय लगता है. बहुत से लोग इस डर से पाठ आरंभ ही नहीं करते कि कहीं वे प्रतिदिन न कर पाएं तो दोष लगेगा. नौकरी आदि की व्यस्तता या सफर में होने के कारण समय की दिक्कत हो जाती है. ऐसे भक्तों को बताना चाहेंगे कि उन्हें परेशान होने की आवश्यकता ही नहीं. पाठ कैसे करें आरंभः -सप्तश्लोकी का का आरंभ करने से पूर्व श्रीदुर्गासप्तशती ग्रंथ का पंचोपचार विधि से पूजन करना चाहिए. -पंचोपचार अर्थात जल, धूप, दीप, पुष्प, अक्षत, कुमकुम, सुगंध, नैवैद्य आदि उपलब्ध वस्तुएं अर्पित करनी चाहिए. उनके लिए लिए मंत्र हैं जो आपको प्रभु शरणम् एप्पस में मिल जाएंगे. – सप्तश्लोकी दुर्गा भी वहां उपलब्ध है. – यदि आप सभी मंत्रों के उच्चारण आदि में समर्थ नहीं हैं तो कम से कम नीचे दिए गए मंत्र का उच्चारण करते हुए ग्रंथ को धूप-दीप दिखाएं. – फिर जल छिड़कें, पुष्प अर्पित करें, अक्षत आदि जो भी उपलब्ध सामग्रियां हैं समर्पित करें. मंत्रः नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नम:। नम: प्रकृत्यै भद्रायै नियता: प्रणता: स्मताम्॥ इसके बाद ग्रंथ को पूरे श्रद्धा और आदरभाव के साथ प्रणाम करें और उनसे हाथ जोड़कर पाठ की अनुमति लें. SUBSCRIBE Now...LIKE, SHARE, COMMENT Let's Revive the Spirit of INDIA🇮🇳 #Bharatvani #KavitaSingsIndia #भारतवाणी का लक्ष्य है आपको भारत के साहित्य और दर्शन की गाथाएँ सुनाना, हर भारतीय का साथ होगा तो फिर एक बार बनना विश्वगुरु बनना मेरा भारत। Listen to many more mantras and stotras, bhajans, aartis and chalisas on my YouTube channel Bharatvani KavitaSingsIndia भारतवाणी at : Food for Soul : मंत्रोच्चार...Morning Mantras: https://www.youtube.com/playlist?list=PLfcm6SDPohWObIVmLYyiu19ZCCsiOcFx1 Bhajans - Aarti - Chalisa: https://www.youtube.com/playlist?list=PLfcm6SDPohWMnFJQzpHVqrbgZoZDRyb3z Subscribe - Like - Comment - Share - Follow me on Spotify, Apple iTunes, Radiopublic, Google Podcast, Breaker, and Overcast
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देवी कवच : #DeviKavach : #दुर्गापूजा विशेष 🙏 #DurgaSaptashati #दुर्गासप्तशती - Episode 3 - नवरात्रि में जो लोग मां की विशेष पूजा-उपासना करते हैं उनपर मां की बड़ी कृपा होती है. नवरात्रि में नौ दिन का व्रत रखना और श्रीदुर्गासप्तशती के संपूर्ण 13 अध्यायों के पाठ का बड़ा माहात्म्य बताया गया है. शास्त्रों में कवच, अर्गला और कीलक के पाठ के उपरांत श्रीदुर्गासप्तशती के सस्वर पाठ से समस्त अमंगलों का नाश होता है. माता की कृपा से सुख-शातिं, यश-कीर्ति, धन-धान्य, आरोग्य, बल-बुद्धि की प्राप्ति होती है. भक्तों द्वारा श्रीदुर्गा सप्तशती का पाठ माता को प्रिय है. परंतु सप्तशती में सात सौ श्लोक हैं जो तेरह अध्यायों में आते हैं. माताभक्तों के मन में इच्छा रहती है कि वे कम से कम नवरात्र में तो श्रीदुर्गासप्तशती का नियमित पाठ कर ही लें परंतु सात सौ श्लोकों का पाठ करने में समय लगता है. बहुत से लोग इस डर से पाठ आरंभ ही नहीं करते कि कहीं वे प्रतिदिन न कर पाएं तो दोष लगेगा. नौकरी आदि की व्यस्तता या सफर में होने के कारण समय की दिक्कत हो जाती है. ऐसे भक्तों को बताना चाहेंगे कि उन्हें परेशान होने की आवश्यकता ही नहीं. पाठ कैसे करें आरंभः -सप्तश्लोकी का का आरंभ करने से पूर्व श्रीदुर्गासप्तशती ग्रंथ का पंचोपचार विधि से पूजन करना चाहिए. -पंचोपचार अर्थात जल, धूप, दीप, पुष्प, अक्षत, कुमकुम, सुगंध, नैवैद्य आदि उपलब्ध वस्तुएं अर्पित करनी चाहिए. उनके लिए लिए मंत्र हैं जो आपको प्रभु शरणम् एप्पस में मिल जाएंगे. – सप्तश्लोकी दुर्गा भी वहां उपलब्ध है. – यदि आप सभी मंत्रों के उच्चारण आदि में समर्थ नहीं हैं तो कम से कम नीचे दिए गए मंत्र का उच्चारण करते हुए ग्रंथ को धूप-दीप दिखाएं. – फिर जल छिड़कें, पुष्प अर्पित करें, अक्षत आदि जो भी उपलब्ध सामग्रियां हैं समर्पित करें. मंत्रः नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नम:। नम: प्रकृत्यै भद्रायै नियता: प्रणता: स्मताम्॥ इसके बाद ग्रंथ को पूरे श्रद्धा और आदरभाव के साथ प्रणाम करें और उनसे हाथ जोड़कर पाठ की अनुमति लें. SUBSCRIBE Now...LIKE, SHARE, COMMENT Let's Revive the Spirit of INDIA🇮🇳 #Bharatvani #KavitaSingsIndia #भारतवाणी का लक्ष्य है आपको भारत के साहित्य और दर्शन की गाथाएँ सुनाना, हर भारतीय का साथ होगा तो फिर एक बार बनना विश्वगुरु बनना मेरा भारत। Listen to many more mantras and stotras, bhajans, aartis and chalisas on my YouTube channel Bharatvani KavitaSingsIndia भारतवाणी at : Food for Soul : मंत्रोच्चार...Morning Mantras: https://www.youtube.com/playlist?list=PLfcm6SDPohWObIVmLYyiu19ZCCsiOcFx1 Bhajans - Aarti - Chalisa: https://www.youtube.com/playlist?list=PLfcm6SDPohWMnFJQzpHVqrbgZoZDRyb3z Subscribe - Like - Comment - Share - Follow me on Spotify, Apple iTunes, Radiopublic, Google Podcast, Breaker, and Overcast
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