एपिसोड 42: 'एवरीडे रीडिंग' − आकृति मंधवानी  episode artwork

EPISODE · Dec 5, 2025 · 1H 8M

एपिसोड 42: 'एवरीडे रीडिंग' − आकृति मंधवानी

from Sambandh Ka Ke Ki · host Himanshu Bhagat

आज़ादी के ठीक बाद, १९५० व १९६० के दशक में छपने वाली लोकप्रिय हिंदी पत्रिकाओं में से दो थीं -- 'सरिता' और 'धर्मयुग'। क्या था रिश्ता और क्या असर रहा इन पत्रिकाओं का -- और साथ-साथ, हिन्द पॉकेट बुक्स की बहुत किफायती दरों वाली किताबों का -- अपने उत्तर-भारतिय हिंदी-भाषी मध्यम-वर्गिय पाठकों पर, इसका आकलन और विश्लेषण आपको मिलेगा डॉ आकृति मंधवानी की किताब 'एवरीडे रीडिंग' में। और साथ ही साथ मिलेगा, परेश नाथ, दिना नाथ मल्होत्रा, और धर्मवीर भारती जैसे दिग्गज प्रकाशक और संपादक के हिंदी भाषा के प्रसार और विकास में योगदान की कहानी। सुनिए डॉ मंधवानी के साथ एक चर्चा उनकी रोचक किताब 'एवरीडे रीडिंग' पर।(आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।)इंस्टाग्राम पर आकृति मंधवानी एक्स (ट्विटर) पर आकृति मंधवानी 'एवरीडे रीडिंग' अमेज़न पर ('सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)

आज़ादी के ठीक बाद, १९५० व १९६० के दशक में छपने वाली लोकप्रिय हिंदी पत्रिकाओं में से दो थीं -- 'सरिता' और 'धर्मयुग'। क्या था रिश्ता और क्या असर रहा इन पत्रिकाओं का -- और साथ-साथ, हिन्द पॉकेट बुक्स की बहुत किफायती दरों वाली किताबों का -- अपने उत्तर-भारतिय हिंदी-भाषी मध्यम-वर्गिय पाठकों पर, इसका आकलन और विश्लेषण आपको मिलेगा डॉ आकृति मंधवानी की किताब 'एवरीडे रीडिंग' में। और साथ ही साथ मिलेगा, परेश नाथ, दिना नाथ मल्होत्रा, और धर्मवीर भारती जैसे दिग्गज प्रकाशक और संपादक के हिंदी भाषा के प्रसार और विकास में योगदान की कहानी। सुनिए डॉ मंधवानी के साथ एक चर्चा उनकी रोचक किताब 'एवरीडे रीडिंग' पर।(आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।)इंस्टाग्राम पर आकृति मंधवानी एक्स (ट्विटर) पर आकृति मंधवानी 'एवरीडे रीडिंग' अमेज़न पर ('सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)

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Frequently Asked Questions

How long is this episode of Sambandh Ka Ke Ki?

This episode is 1 hour and 8 minutes long.

When was this Sambandh Ka Ke Ki episode published?

This episode was published on December 5, 2025.

What is this episode about?

आज़ादी के ठीक बाद, १९५० व १९६० के दशक में छपने वाली लोकप्रिय हिंदी पत्रिकाओं में से दो थीं -- 'सरिता' और 'धर्मयुग'। क्या था रिश्ता और क्या असर रहा इन पत्रिकाओं का -- और साथ-साथ, हिन्द पॉकेट बुक्स की बहुत किफायती दरों वाली किताबों का -- अपने...

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