गौरी का रूठना और शिव जी का ध्यान में जाना, देवों ने की लीला और बसी काशी धाम.... episode artwork

EPISODE · Nov 7, 2020 · 20 MIN

गौरी का रूठना और शिव जी का ध्यान में जाना, देवों ने की लीला और बसी काशी धाम....

from कल थी काशी, आज है बनारस · host Banarasi/singh

नमस्कार सभी को. आपके लिए काशी के निर्माण की कथा ले आई हूं. देवी पार्वती के हजार साल तपस्या के बाद जब भोले नाथ ने उनके प्रेम और समर्पण को स्वीकार उनसे विवाह कर लिया. दोनों दंपति दांपत्य का आनंद ले रहे थे. तब एक दिन देवी पार्वती अपने माता पिता से मिलने हिमालय गयीं. वहाँ बड़ा आदर सत्कार किया माता पिता ने गौरी जी का. फिर गौरी जी से मिलने उनकी सखियाँ भी आयी. बातचीत हंसी मजाक में किसी सखी ने गौरी जी से यह कह दिया कि अरे पार्वती विवाह बाद भी तुम मायके में रहती हो. तुम्हारा ससुराल कहाँ है. अरे भोले बाबा तो भोले हैं. उनका कैलाश तुम्हारे पिता के राज्य का हिस्सा ही तो है. तो तुम अपने मायके में ही रहती हो न. हंसी मजाक में बात आयी गयी हो गयी. पर देवी गौरी को बुरा लगा. जब वो कैलाश लौटीं तो अपने स्वामी से सब बात कही. फिर आग्रह किया कि क्यों न हमारे लिए भी एक नयी नगरी का निर्माण हो. मुझे अच्छा नहीं लगता कैलाश पर रहना सखियाँ ताना मारती हैं. प्रभु ने देवी को सुना और समझाया भी पर पार्वती जी एक राज्य कन्या अपना हठ छोड़ ने वाली नहीं थीं. उनको समझा भोले बाबा ध्यान में लीन हो गये. देवी को चैन कहां. वो झलाहट में इधर उधर टहलती रही. उसी समय देवों के संचार प्रमुख नारद जी वहां से जा रहे थे तो सोचा क्यों न बाबा भोले नाथ और पार्वती के दर्शन कर लूं. जब वो कैलाश पहुंचे तो देखा कि भोले नाथ ध्यान में लीन है और देवी पार्वती उदास बैठी है. नारद जी ने देवी को नमन किया और दुःख का कारण पूछा. गौरी जी ने अपनी मन की व्यथा बतायी. नारद जी ने सांत्वना दी देवी को और फिर महादेव को प्रणाम कर उनके ध्यान से उठने का इंतजार करने लगे. भोले बाबा को आभास हुआ कि कोई उनकी प्रतीक्षा कर रहा. बाबा ने आंखें खोली और नारद का कैलाश पर आने का कारण पूछा. नारदजी ने पुनः नमन कर दर्शन की अभिलाषा को आने का प्रयोजन बताया. बातचीत जब आगे बड़ी तो नारद जी से भोले बाबा ने भी पार्वती जी की इच्छा से अवगत कराया. नारद जी ने कहा प्रभु भक्त पर तनिक विश्वास करिये और एक अवसर दिजिए. बाबा ने अनुमति दी. नारद मुनि देव लोक गये देवों से विचार विमर्श किया.... आगे की कहानी आप सुन कर आनंद लीजिए. हर दिन काशी से जुड़ी एक नयी कहानी आपको सुनाना है. इस कहानी को सुनिए. कोरोना से बच कर रहिये, दो गज दुरी अभी है जरुरी. मास्क पहने और अपनो का ध्यान रखें. फिर मिलेंगे तब तक के लिए हर हर महादेव. हंसते और मुस्कुराते रहिए.

Episode metadata supplied by the publisher feed · Published Nov 7, 2020

Embed this episode

NOW PLAYING

गौरी का रूठना और शिव जी का ध्यान में जाना, देवों ने की लीला और बसी काशी धाम....

0:00 20:17

No transcript for this episode yet

We transcribe on demand. Request one and we'll notify you when it's ready — usually under 10 minutes.

No similar episodes found.

No similar podcasts found.

Frequently Asked Questions

How long is this episode of कल थी काशी, आज है बनारस?

This episode is 20 minutes long.

When was this कल थी काशी, आज है बनारस episode published?

This episode was published on November 7, 2020.

Can I download this कल थी काशी, आज है बनारस episode?

Yes. Use the download control on the episode player to save the publisher-provided media file.
URL copied to clipboard!