कविता: हायकू  episode artwork

EPISODE · Jan 14, 2022 · 3 MIN

कविता: हायकू

from रेडियो सनविवि Radio Sanavivi · host Maharashtra Mandal Bengaluru

सादरकर्ते: मानसी तांबेकर आणि दीपक कुलकर्णी  कवयित्री: १) देवश्री अंभईकर धरणगावकर:  श्रावण सरी / मोरपिस आत खुले /  सावळा हरी -------------- मनात मन / अलगद गुंतले / बंधन तुटले ---------------थोडे रुसावे / कुणीतरी असावे / अश्रू पुसावे  ----------------- झुरते राधा / रासक्रीडेत दंग / तिचा श्रीरंग__________________________________ २) आरुषी दाते: पिकले पान /  वार्धक्याने आज / कष्टाचा साज ---------------------------------------------------------------- ३) स्मिता दाते: मोहरे मन / गंधाळले क्षण / विसरले भान  ------------------------------------------------------------------- ४) अजिता पणशीकर: ओल्या मातीचा गंध / अलगद पावसाची नांदी / वादळ आनंदी ---------------------वारा संथ वाहे / उमटती तरंग / एक पतंग ------------------------------- ५) मानसी तांबेकर: पालापाचोळा / आठवणी झाल्या गोळा / मन मोकळं---------------------------- इंद्रधनुष्य / नभ रंगांनी सजले / भाग्य खुलले  ------------------------------ फुलाचा गंध / भ्रमराला लागला / मैत्रीचा छंद --------------- ६) प्राची देवधर: देहाची कुपी / चैतन्याचे अत्तर / आत्म स्वरूपी

सादरकर्ते: मानसी तांबेकर आणि दीपक कुलकर्णी  कवयित्री: १) देवश्री अंभईकर धरणगावकर:  श्रावण सरी / मोरपिस आत खुले /  सावळा हरी -------------- मनात मन / अलगद गुंतले / बंधन तुटले ---------------थोडे रुसावे / कुणीतरी असावे / अश्रू पुसावे  ----------------- झुरते राधा / रासक्रीडेत दंग / तिचा श्रीरंग__________________________________ २) आरुषी दाते: पिकले पान /  वार्धक्याने आज / कष्टाचा साज ---------------------------------------------------------------- ३) स्मिता दाते: मोहरे मन / गंधाळले क्षण / विसरले भान  ------------------------------------------------------------------- ४) अजिता पणशीकर: ओल्या मातीचा गंध / अलगद पावसाची नांदी / वादळ आनंदी ---------------------वारा संथ वाहे / उमटती तरंग / एक पतंग ------------------------------- ५) मानसी तांबेकर: पालापाचोळा / आठवणी झाल्या गोळा / मन मोकळं---------------------------- इंद्रधनुष्य / नभ रंगांनी सजले / भाग्य खुलले  ------------------------------ फुलाचा गंध / भ्रमराला लागला / मैत्रीचा छंद --------------- ६) प्राची देवधर: देहाची कुपी / चैतन्याचे अत्तर / आत्म स्वरूपी

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कविता: हायकू

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This episode is 3 minutes long.

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This episode was published on January 14, 2022.

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सादरकर्ते: मानसी तांबेकर आणि दीपक कुलकर्णी  कवयित्री: १) देवश्री अंभईकर धरणगावकर:  श्रावण सरी / मोरपिस आत खुले /  सावळा हरी -------------- मनात मन / अलगद गुंतले / बंधन तुटले ---------------थोडे रुसावे / कुणीतरी असावे / अश्रू पुसावे ...

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