EPISODE · Oct 21, 2022 · 2 MIN
मैं अश्कों से दामन भिगोता रहा हूं Episode 113
from GAZAL HUB
Here’s an episode that will keep you waiting for the next one. Tune in now!This gazal is written by Rizwan khan sultan alig मैं अश्कों से दामन भिगोता रहा हूं फकत उस की यादों मे रोता रहा हूं है आंखों मे अब तक वो गुज़रा ज़माना मैं दिल मे वो यादें समोता रहा हूं कभी तो मिलेगी वो खाबों की हस्ती ख्यालात जिस के संजोता रहा हूं मुहब्बत के मौजु से धागा बना कर बस अशार उस में पिरोता रहा हूं बनाना है एक रोज़ उल्फत का गुलशन ये ही सोच कर बीज बोता रहा हूं
What this episode covers
Here’s an episode that will keep you waiting for the next one. Tune in now!This gazal is written by Rizwan khan sultan alig मैं अश्कों से दामन भिगोता रहा हूं फकत उस की यादों मे रोता रहा हूं है आंखों मे अब तक वो गुज़रा ज़माना मैं दिल मे वो यादें समोता रहा हूं कभी तो मिलेगी वो खाबों की हस्ती ख्यालात जिस के संजोता रहा हूं मुहब्बत के मौजु से धागा बना कर बस अशार उस में पिरोता रहा हूं बनाना है एक रोज़ उल्फत का गुलशन ये ही सोच कर बीज बोता रहा हूं
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मैं अश्कों से दामन भिगोता रहा हूं Episode 113
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