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EPISODE · Feb 24, 2026 · 2 MIN

राख का महाकाव्य

from Brangassivo's Feed · host Mathias Schneider

Some lyrics of mine Song राख का महाकाव्य जब तारे नूतन, सृष्टि थी जवान, स्वर्ण आभा में बसता था उसका प्राण। सृजन का शिल्पी, देवों का था साथ, पर शून्यता ने थाम लिया उसका हाथ। विनाश की चाह में उसने नियम तोड़े, सृष्टि के मूल से उसने मुख मोड़े। गिरा गगन से, जैसे कोई तारा टूटा, दिव्य पंख जले, स्वर्ग का साथ छूटा। कोर्थोस की खाई बनी उसका नया धाम, पीड़ा और क्रोध से मिला उसे नया नाम। पत्थर सा तन, नस-नस में दहकती आग, अंधकार ने गाया उसके उदय का राग। गूँजी चीखें जब वह पाताल में आया, राक्षसी सेना पर अपना अनुशासन छाया। हजारों तलवारों की वह खूनी रात, जब विरोधियों को मिली मौत की मात। गेहेना की भट्टी में लोहा उसने ढाला, अस्तित्व मिटाने का रचा एक नया जाला। राख और धुएं में डूबा नगर का द्वार, खड़ा था शूरवीर, थामे टूटी तलवार। ब्रकमोन बोला, "रे मानव, तू क्यों लड़ता है? इस मरती दुनिया के लिए क्यों मरता है? आशा एक भूल है, मैं इसे सुधारूँगा, मैं इस ब्रह्मांड को शून्य में उतारूँगा।" वार न किया, बस छोड़ा उसे अकेला, देखने को विनाश का यह काला मेला। जहाँ ब्रकमोन के पदचिह्न पड़ते हैं, वहाँ जीवन के शब्द चुपचाप मरते हैं। आसमान से अब केवल राख गिरती है, सृष्टि अब अंत की ओर फिरती है।

Episode metadata supplied by the publisher feed · Published Feb 24, 2026

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राख का महाकाव्य

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This episode was published on February 24, 2026.

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