EPISODE · Oct 27, 2024 · 0 MIN
Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 15
from Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 · host Yatrigan kripya dhyan de!
"श्री भगवद गीता, अध्याय 18, श्लोक 15" में भगवान श्रीकृष्ण बताते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति जो कर्म करता है, वह शरीर, वाणी और मन के माध्यम से कार्य करता है। यह कर्म चाहे न्यायपूर्ण हो या विपरीत, इसके पाँच कारण होते हैं। इस श्लोक में कर्म के सिद्धांतों को समझाते हुए श्रीकृष्ण बताते हैं कि हमारे सभी कार्य इन पाँच तत्वों (अधिष्ठान, कर्ता, करण, चेष्टा, और दैव) के आधार पर होते हैं। यह श्लोक हमें कर्म के आधारभूत तत्वों को समझने में मदद करता है और अहंकार का त्याग कर, सभी कार्यों में दिव्य शक्ति की भूमिका को स्वीकार करने की प्रेरणा देता है। Hashtags: #ShriBhagavadGita #BhagavadGita #Chapter18 #Shlok15 #Karma #SpiritualWisdom #KrishnaTeachings #KarmaTheory #GitaKnowledge #LifeGuidance #DivinePurpose #HinduPhilosophy #SpiritualJourney #SelfAwareness #DivineWisdom #GitaTeachings
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"श्री भगवद गीता, अध्याय 18, श्लोक 15" में भगवान श्रीकृष्ण बताते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति जो कर्म करता है, वह शरीर, वाणी और मन के माध्यम से कार्य करता है। यह कर्म चाहे न्यायपूर्ण हो या विपरीत, इसके पाँच कारण होते हैं। इस श्लोक में कर्म के सिद्धांतों को समझाते हुए श्रीकृष्ण बताते हैं कि हमारे सभी कार्य इन पाँच तत्वों (अधिष्ठान, कर्ता, करण, चेष्टा, और दैव) के आधार पर होते हैं। यह श्लोक हमें कर्म के आधारभूत तत्वों को समझने में मदद करता है और अहंकार का त्याग कर, सभी कार्यों में दिव्य शक्ति की भूमिका को स्वीकार करने की प्रेरणा देता है। Hashtags: #ShriBhagavadGita #BhagavadGita #Chapter18 #Shlok15 #Karma #SpiritualWisdom #KrishnaTeachings #KarmaTheory #GitaKnowledge #LifeGuidance #DivinePurpose #HinduPhilosophy #SpiritualJourney #SelfAwareness #DivineWisdom #GitaTeachings
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