EPISODE · Apr 12, 2023 · 1 MIN
Subha Subha Ek Khwaab Dekha
from Shayari · host Manoj Agarwal
Subha Subha Ek Khwaab Dekha सुब्ह सुब्ह इक ख़्वाब की दस्तक पर दरवाज़ा खोला' देखा सरहद के उस पार से कुछ मेहमान आए हैं आँखों से मानूस थे सारे चेहरे सारे सुने सुनाए पाँव धोए, हाथ धुलाए आँगन में आसन लगवाए और तन्नूर पे मक्की के कुछ मोटे मोटे रोट पकाए पोटली में मेहमान मिरे पिछले सालों की फ़सलों का गुड़ लाए थे आँख खुली तो देखा घर में कोई नहीं था हाथ लगा कर देखा तो तन्नूर अभी तक बुझा नहीं था और होंटों पर मीठे गुड़ का ज़ाइक़ा अब तक चिपक रहा था ख़्वाब था शायद! ख़्वाब ही होगा!! सरहद पर कल रात, सुना है चली, थी गोली सरहद पर कल रात, सुना है कुछ ख़्वाबों का ख़ून हुआ था,
What this episode covers
Subha Subha Ek Khwaab Dekha सुब्ह सुब्ह इक ख़्वाब की दस्तक पर दरवाज़ा खोला' देखा सरहद के उस पार से कुछ मेहमान आए हैं आँखों से मानूस थे सारे चेहरे सारे सुने सुनाए पाँव धोए, हाथ धुलाए आँगन में आसन लगवाए और तन्नूर पे मक्की के कुछ मोटे मोटे रोट पकाए पोटली में मेहमान मिरे पिछले सालों की फ़सलों का गुड़ लाए थे आँख खुली तो देखा घर में कोई नहीं था हाथ लगा कर देखा तो तन्नूर अभी तक बुझा नहीं था और होंटों पर मीठे गुड़ का ज़ाइक़ा अब तक चिपक रहा था ख़्वाब था शायद! ख़्वाब ही होगा!! सरहद पर कल रात, सुना है चली, थी गोली सरहद पर कल रात, सुना है कुछ ख़्वाबों का ख़ून हुआ था,
NOW PLAYING
Subha Subha Ek Khwaab Dekha
No transcript for this episode yet
Similar Episodes
No similar episodes found.
Similar Podcasts
No similar podcasts found.