PODCAST · society
ठेठ भारतीय
by Abhishek Gupta
मुझे जो समझ मे आता है वैसा बोलता हूँ , कोई फ़ालतू का ड्रामा ढकोसला दिखावा नहीं। आपको समझ आये तोह ठीक नहीं तोह टाटा बाय-बाय अलविदा। बाक़ी शरीफ़ और समझदार आदमी हूँ , काफ़ी पढ़ा-लिखा भी हूँ। घाट-घाट का पानी पिया है मैंने , अच्छा-बुरा सब समझता हूँ। और हाँ..... थोक के भाव में दिल तुड़वाया हुआ आशिक़ भी हूँ और आर्थिक अकाल भी पड़ा हुआ है मेरे जीवन में। किस्मत फूटी है वो अलग।
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1023 रुपये का सिलिंडर जनता की छाती पे मूँग दलने का काम किया है सरकार ने
डकैत है डकैत साले जनता की जेब पे डाका डालने वाले 👹👹👹
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बोला था ना अमावस्या या पूर्णिमा वाले दिन के आसपास आता है भूकम्प , कल अमावस्या थी
बोला था ना अमावस्या या पूर्णिमा वाले दिन के आसपास आता है भूकम्प , कल अमावस्या थी
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भूकम्प आगमन
कोरोनाकाल में
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उत्तराखंड आपदा भूगर्भीय गतिविधियों और मानवीय हस्तक्षेप की देन
उत्तराखंड आपदा भूगर्भीय गतिविधियों और मानवीय हस्तक्षेप की देन
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ट्रेन की सीटी सुनकर मन अतीत में खो गया
सही बोलूं तोह बड़ा भावुक हो गया इसलिए 36 मिनट की रिकॉर्डिंग हो गयी।
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जनता की दिनचर्या Daily Life Routine of Common People
हर रोज़ नया ही सीन है साहेब कभी कभी पुराना भी रिपीट जो जाता है 🤣🙄😎
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बजट का बैंड बजेगा
अपने अपने हिसाब से और मूड के अनुसार
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ABOUT THIS SHOW
मुझे जो समझ मे आता है वैसा बोलता हूँ , कोई फ़ालतू का ड्रामा ढकोसला दिखावा नहीं। आपको समझ आये तोह ठीक नहीं तोह टाटा बाय-बाय अलविदा। बाक़ी शरीफ़ और समझदार आदमी हूँ , काफ़ी पढ़ा-लिखा भी हूँ। घाट-घाट का पानी पिया है मैंने , अच्छा-बुरा सब समझता हूँ। और हाँ..... थोक के भाव में दिल तुड़वाया हुआ आशिक़ भी हूँ और आर्थिक अकाल भी पड़ा हुआ है मेरे जीवन में। किस्मत फूटी है वो अलग।
HOSTED BY
Abhishek Gupta
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