PODCAST · arts
BEBAS HAI RAAT - SEASON 2
by Harshkumar Badheka
दो शब्द में कोई कवि,शायर या ग़ज़लकार नहीं हूँ । वास्तविकता यह है कि मुझे स्वयं को कवि अथवा शायर कहने में भी हिचकिचाहट होती है , क्योंकि मैं कविता , शायरी या ग़ज़ल की परिधियों में बांधने से डरता हूँ । मैं खुले मन से जो जी में आये ईमानदारी से कहना चाहता हूँ । खुलकर शब्दो में व्यक्त करना चाहता हूँ । मेरा मानना है कि हर व्यक्ति के भीतर किसी न किसी क्षणं कविता अवश्य जन्म लेती है चाहे वह ख़ुशी के पलों में हो या अवसाद क्षणो में या फिर हम भाव विह्लल हो । कोई भी रचना,रचनाकार के हृदयस्थ भाव रस का उच्छलन है । जब भाव बहार आने की छटपटाहट से ह्रदय को उदवेलित कर देता है तब कविता का जन्म होता है । तात्पर्य यह है कि कविता किसी पूर्व निर्धारित रूहरेखा के आधार पर नहीं लिखी जाती है । वह कवि को बाध्य करके अपने आपको लिखवा लेती है । कविता लेखन में सम्पूर्ण एकाग्रता अथवा समाधि की आवश्यकता पड़ती है । यह काव्य संग्रह मेरा एक छोटा सा प्रयास है अपने आस पास , अपने अंतर्मंन एवं स्वप्नलोक में चलने वाली घटनवाओ , द्र्श्यो को शब्द में व्यक्त करने का । इस काव्य संग्रह में सन २०१५ के बाद लिखी गई मेरी काव्य रचनाएं
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8
SAFAR
POEM 8 - SAFAR
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7
ADHURA SA CHAND
POEM 7 - ADHURA SA CHAND
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6
PECHAAN MAANGTA HAI
POEM 6 - PEHCHAAN MAANGTA HAI
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5
SHAYAD HAI MAUT
POEM 5 - SHAYAD HAI MAUT
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4
AAWAAZ
POEM 4 - AAWAAZ
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3
NISHAAN
POEM 3 - NISHAAN
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2
MILNE AAYA THA
POEM 2 - MILNE AAYA THA
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1
KHUSHBOO
POEM 1 - KHUSHBOO
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ABOUT THIS SHOW
दो शब्द में कोई कवि,शायर या ग़ज़लकार नहीं हूँ । वास्तविकता यह है कि मुझे स्वयं को कवि अथवा शायर कहने में भी हिचकिचाहट होती है , क्योंकि मैं कविता , शायरी या ग़ज़ल की परिधियों में बांधने से डरता हूँ । मैं खुले मन से जो जी में आये ईमानदारी से कहना चाहता हूँ । खुलकर शब्दो में व्यक्त करना चाहता हूँ । मेरा मानना है कि हर व्यक्ति के भीतर किसी न किसी क्षणं कविता अवश्य जन्म लेती है चाहे वह ख़ुशी के पलों में हो या अवसाद क्षणो में या फिर हम भाव विह्लल हो । कोई भी रचना,रचनाकार के हृदयस्थ भाव रस का उच्छलन है । जब भाव बहार आने की छटपटाहट से ह्रदय को उदवेलित कर देता है तब कविता का जन्म होता है । तात्पर्य यह है कि कविता किसी पूर्व निर्धारित रूहरेखा के आधार पर नहीं लिखी जाती है । वह कवि को बाध्य करके अपने आपको लिखवा लेती है । कविता लेखन में सम्पूर्ण एकाग्रता अथवा समाधि की आवश्यकता पड़ती है । यह काव्य संग्रह मेरा एक छोटा सा प्रयास है अपने आस पास , अपने अंतर्मंन एवं स्वप्नलोक में चलने वाली घटनवाओ , द्र्श्यो को शब्द में व्यक्त करने का । इस काव्य संग्रह में सन २०१५ के बाद लिखी गई मेरी काव्य रचनाएं
HOSTED BY
Harshkumar Badheka
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