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रुक जाओ

Episode 1 of the रुक जाओ podcast, hosted by Rakesh Patel, titled "रुक जाओ" was published on March 29, 2020 and runs 4 minutes.

March 29, 2020 ·4m · रुक जाओ

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अपनी रफ़्तार को थोड़ा रोक कर तो देखो अपने जीवन को थोड़ा टोक कर तो देखो। अरे हम क्यों भागे जा रहे है ? ज़रा अपने बारे में सोच कर तो देखो। एक जगह से दूसरी जगह; सिर्फ़ चीजों को पाने के लिऐ; अरे ओ चीज़ों के पीछे भागने वालों, ज़रा चीजों से परे हट कर तो देखो। शुतुरमुर्ग की तरह क्यों चल रहे हम...? ज़रा अपने और अपनो के बारे में सोच कर तो देखो। अपनी रफ़्तार को थोड़ा रोक कर तो देखो अपने जीवन को थोड़ा टोक कर तो देखो। कहाँ जा रहे हो, क्यों जा रहे हो, ज़रा सोच कर तो देखो। क्यों कर रहे हो इतना इंतज़ार किसी का? कोई आये और हमें समझाए बार बार , या कोई हमें पीछे से मारके भगाऐ, या कोई हाथ जोड़कर सामने खड़े हो जाऐ। कहीं पर तो अपनी समझदारी दिखा कर तो देखो। अपनी रफ़्तार को थोड़ा रोक कर तो देखो अपने जीवन को थोड़ा टोक कर तो देखो। अरे ओ, आरोप और प्रत्यारोप करने वालो, किसी के लिए अपना हाथ बढ़ाकर तो देखो, सबको ये समझाने वालो, कि इस ने ये नहीं किया, इस ने वो नहीं किया, अरे ! ओ समझाने वालों ख़ुद कुछ करके तो देखो। बहुत हुआ ये खेल समझने समझाने का, अपने विवेक को ज़रा टटोल कर तो देखो। अपने देश के लिए कुछ सोच कर तो देखो। आज लगी हे आग धरती माँ के आँगन में। ज़रा अपनो के बारेमें सोच कर तो देखो, इस मुश्किल घड़ी में ख़ुद अपने आपको रोक कर तो देखो। हाँ यकीन करना है मुश्किल, पर नहीं नामुमकिन, कुछ परिवर्तन होने को हे अबकि बार। एक नया जीवन आने को हे तैयार, आएगा नया सबेरा ; लेकर नया उजाला, जहाँ है वहीं पर रुक जाएँ आज होकर हम तैयार अपनो को आज हम थोड़ा सा ले सम्भाल, इस बार ज़रा सा यकीन उपरवाले पे कर के तो देखो। ज़रा अपने आपको रोक कर तो देखो। इस बार ज़रा सोच कर तो देखो। अपनी रफ़्तार को थोड़ा रोक कर तो देखो अपने जीवन को थोड़ा टोक कर तो देखो।

अपनी रफ़्तार को थोड़ा रोक कर तो देखो अपने जीवन को थोड़ा टोक कर तो देखो। अरे हम क्यों भागे जा रहे है ? ज़रा अपने बारे में सोच कर तो देखो। एक जगह से दूसरी जगह; सिर्फ़ चीजों को पाने के लिऐ; अरे ओ चीज़ों के पीछे भागने वालों, ज़रा चीजों से परे हट कर तो देखो। शुतुरमुर्ग की तरह क्यों चल रहे हम...? ज़रा अपने और अपनो के बारे में सोच कर तो देखो। अपनी रफ़्तार को थोड़ा रोक कर तो देखो अपने जीवन को थोड़ा टोक कर तो देखो। कहाँ जा रहे हो, क्यों जा रहे हो, ज़रा सोच कर तो देखो। क्यों कर रहे हो इतना इंतज़ार किसी का? कोई आये और हमें समझाए बार बार , या कोई हमें पीछे से मारके भगाऐ, या कोई हाथ जोड़कर सामने खड़े हो जाऐ। कहीं पर तो अपनी समझदारी दिखा कर तो देखो। अपनी रफ़्तार को थोड़ा रोक कर तो देखो अपने जीवन को थोड़ा टोक कर तो देखो। अरे ओ, आरोप और प्रत्यारोप करने वालो, किसी के लिए अपना हाथ बढ़ाकर तो देखो, सबको ये समझाने वालो, कि इस ने ये नहीं किया, इस ने वो नहीं किया, अरे ! ओ समझाने वालों ख़ुद कुछ करके तो देखो। बहुत हुआ ये खेल समझने समझाने का, अपने विवेक को ज़रा टटोल कर तो देखो। अपने देश के लिए कुछ सोच कर तो देखो। आज लगी हे आग धरती माँ के आँगन में। ज़रा अपनो के बारेमें सोच कर तो देखो, इस मुश्किल घड़ी में ख़ुद अपने आपको रोक कर तो देखो। हाँ यकीन करना है मुश्किल, पर नहीं नामुमकिन, कुछ परिवर्तन होने को हे अबकि बार। एक नया जीवन आने को हे तैयार, आएगा नया सबेरा ; लेकर नया उजाला, जहाँ है वहीं पर रुक जाएँ आज होकर हम तैयार अपनो को आज हम थोड़ा सा ले सम्भाल, इस बार ज़रा सा यकीन उपरवाले पे कर के तो देखो। ज़रा अपने आपको रोक कर तो देखो। इस बार ज़रा सोच कर तो देखो। अपनी रफ़्तार को थोड़ा रोक कर तो देखो अपने जीवन को थोड़ा टोक कर तो देखो।

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