PODCAST · society
Majhdhaar / मझधार : Literature to be cherished
by Rahul Gaur
Here at Majhdhaar, you get to listen to some exquisite pieces of writings - stories, poems, articles, reminiscences, satires, essays, what have you. If you like what you hear, rate the podcast, follow it on your platform and spread the word around :) Connect atEmail - [email protected]. Instagram - @majhdhaar Facebook - https://www.facebook.com/rahul.gaur.332#hindistories #books #poems #literature #podcast #hindi #rajasthani #punjabi #languages #Indian
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Ep 69 जेन ज़ी क्या पढ़ रही है ( भाग 3) - त्रिभुवन / Gen Z Kya PaDh Rahi Hai (Part 3) - Tribhuvan
देश दुनिया में आ रहे बहुत से महत्वपूर्ण बदलावों में जेन ज़ी सबसे आगे खड़े दिखते हैं। भारत में जेन ज़ी जनसंख्या के तौर पर सबसे बड़ा समूह है।इसी संदर्भ में मझधार के एपिसोड 67, 68 और 69 में मैं जाने माने पत्रकार त्रिभुवन का लेख “जेन ज़ी क्या पढ़ रही है” लाया हूँ। इस सुदीर्घ और सुगठित लेख में उन्होंने जेन ज़ी के पसंदीदा साहित्य और इस के बहाने इनकी विशिष्ट राजनैतिक और सांस्कृतिक चेतना को भी खँगाला है। Many of the significant changes unfolding across the world today find Gen Z standing at the forefront. In India, Gen Z constitutes the largest demographic group.In this context, in Episodes 67, 68, and 69 of Majhdhaar, I bring to you the article “What Gen Z is Reading” by the noted journalist Tribhuvan.In this long and well-crafted piece, he explores the literary preferences of Gen Z, and through them, delves into their distinctive political and cultural consciousness.Instagram- @majhdhaar Email - [email protected]#podcast #gaurrahul #majhdhaar #literature
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Ep 68 जेन ज़ी क्या पढ़ रही है ( भाग 2) - त्रिभुवन / Gen Z Kya PaDh Rahi Hai (Part 2) - Tribhuvan
देश दुनिया में आ रहे बहुत से महत्वपूर्ण बदलावों में जेन ज़ी सबसे आगे खड़े दिखते हैं। भारत में जेन ज़ी जनसंख्या के तौर पर सबसे बड़ा समूह है।इसी संदर्भ में मझधार के एपिसोड 67, 68 और 69 में मैं जाने माने पत्रकार त्रिभुवन का लेख “जेन ज़ी क्या पढ़ रही है” लाया हूँ। इस सुदीर्घ और सुगठित लेख में उन्होंने जेन ज़ी के पसंदीदा साहित्य और इस के बहाने इनकी विशिष्ट राजनैतिक और सांस्कृतिक चेतना को भी खँगाला है। Many of the significant changes unfolding across the world today find Gen Z standing at the forefront. In India, Gen Z constitutes the largest demographic group.In this context, in Episodes 67, 68, and 69 of Majhdhaar, I bring to you the article “What Gen Z is Reading” by the noted journalist Tribhuvan.In this long and well-crafted piece, he explores the literary preferences of Gen Z, and through them, delves into their distinctive political and cultural consciousness.Instagram- @majhdhaar Email - [email protected]#podcast #gaurrahul #majhdhaar #literature
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Ep 67 जेन ज़ी क्या पढ़ रही है ( भाग 1) - त्रिभुवन / Gen Z Kya PaDh Rahi Hai (Part 1) - Tribhuvan
देश-दुनिया में आ रहे बहुत से महत्वपूर्ण बदलावों में जेन ज़ी सबसे आगे खड़े दिखते हैं। भारत में जेन ज़ी जनसंख्या के तौर पर सबसे बड़ा समूह है।इसी संदर्भ में मझधार के एपिसोड 67, 68 और 69 में मैं जाने माने पत्रकार त्रिभुवन का लेख “जेन ज़ी क्या पढ़ रही है” लाया हूँ। इस सुदीर्घ और सुगठित लेख में उन्होंने जेन ज़ी के पसंदीदा साहित्य और इस के बहाने इनकी विशिष्ट राजनैतिक और सांस्कृतिक चेतना को भी खँगाला है। Many of the significant changes unfolding across the world today find Gen Z standing at the forefront. In India, Gen Z constitutes the largest demographic group.In this context, in Episodes 67, 68, and 69 of Majhdhaar, I bring to you the article “What Gen Z is Reading” by the noted journalist Tribhuvan.In this long and well-crafted piece, he explores the literary preferences of Gen Z, and through them, delves into their distinctive political and cultural consciousness.Instagram- @majhdhaar Email - [email protected]#podcast #gaurrahul #majhdhaar #literature
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Ep 66 ख़ूनी की गिरफ़्तारी - गोपाल राम गहमरी - अंतिम भाग 3/ Khooni Ki Giraftari- Gopal Ram Gahmari - Concluding Part 3
“Khooni Ki Giraftari” (Arrest of the Murderer) is a crackling murder mystery by the formidable detective-fiction writer Gopal Ram Gahmari, who wrote nearly a century ago. Among aficionados of the genre, Gahmari is regarded as one of the most prolific and brilliant Indian storytellers to ever work in the field of detective fiction. Listen to the concluding Part 3 of this story. “खूनी की गिरफ़्तारी” गोपाल राम गहमरी द्वारा रचित एक झकझोर देने वाली जासूसी कहानी है। लगभग एक शताब्दी पूर्व सक्रिय रहे गहमरी को जासूसी साहित्य के शौक़ीन आज भी इस विधा के सबसे प्रतिभाशाली और रचनाशील भारतीय कथाकारों में शुमार करते हैं। लीजिये, इस कहानी का अंतिम भाग 3 सुनिये। Instagram - @majhdhaar X- @rahuljigaur Email: [email protected]
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Ep 65 विनोद कुमार शुक्ल पर कुछ..: विष्णु नागर, मंगलेश डबराल / Vinod Kumar Shukla..: Vishnu Nagar, Manglesh Dabral
जनवरी 2026 का पहला एपिसोड विनोद कुमार शुक्ल को याद करते हुए..विष्णु नागर और मंगलेश डबराल के लेखों के मार्फ़त विकुशु की रचनाओं के अनूठे सौंदर्य को एक बार फिर सराहिये।The first episode of January 2026 remembering Vinod Kumar Shukla…Through the writings of Vishnu Nagar and Manglesh Dabral, we revisit and appreciate anew the unique beauty of Vikushu’s work.Instagram - @majhdhaar X- @rahuljigaur Email: [email protected]
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Ep 64 ख़ूनी की गिरफ़्तारी- गोपाल राम गहमरी - भाग 2 / Khooni Ki Giraftari - Gopal Ram Gahmari - Part 2
“Khooni Ki Giraftari” (Arrest of the Murderer) is a crackling murder mystery by the formidable detective-fiction writer Gopal Ram Gahmari, who wrote nearly a century ago. Among aficionados of the genre, Gahmari is regarded as one of the most prolific and brilliant Indian storytellers to ever work in the field of detective fiction. Listen to Part 2 of this story. “खूनी की गिरफ़्तारी” गोपाल राम गहमरी द्वारा रचित एक झकझोर देने वाली जासूसी कहानी है। लगभग एक शताब्दी पूर्व सक्रिय रहे गहमरी को जासूसी साहित्य के शौक़ीन आज भी इस विधा के सबसे प्रतिभाशाली और रचनाशील भारतीय कथाकारों में शुमार करते हैं। लीजिये, इस कहानी का भाग 2 सुनिये।Instagram - @majhdhaar X- @rahuljigaur Email: [email protected]
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Ep 63 ख़ूनी की गिरफ़्तारी- गोपाल राम गहमरी - भाग १ / Khooni Ki Giraftari- Gopal Ram Gahmari - Part 1
“Khooni Ki Giraftari” (Arrest of the Murderer) is a crackling murder mystery by the formidable detective-fiction writer Gopal Ram Gahmari, who wrote nearly a century ago. Among aficionados of the genre, Gahmari is regarded as one of the most prolific and brilliant Indian storytellers to ever work in the field of detective fiction.“खूनी की गिरफ़्तारी” गोपाल राम गहमरी द्वारा रचित एक झकझोर देने वाली जासूसी कहानी है। लगभग एक शताब्दी पूर्व सक्रिय रहे गहमरी को जासूसी साहित्य के शौक़ीन आज भी इस विधा के सबसे प्रतिभाशाली और रचनाशील भारतीय कथाकारों में शुमार करते हैं।Instagram - @majhdhaar X- @rahuljigaur
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Ep 62 हरिहर विचित्तर- वरूण ग्रोवर / Harihar Vichittar - Varun Grover
Harihar Vichittar is an incredible tale set in those not-so-easily-forgotten times of India Pakistan partition in 1947. In this heart touching story,which is at once personal and political, Varun Grover deftly creates an unlikely superhero who gives hope in the times of despair. Listen to it in Episode 62 of the podcast Majhdhaar. (Illustration on thumbnail is by Rajkumari, sourced from www.thesinglescreen.wordpress.com)हरिहर विचित्र 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन के उन भूले न जा सकने वाले दिनों में रची गई एक अद्भुत कहानी है।यह हृदय को छू लेने वाली कथा, जो एक साथ व्यक्तिगत भी है और राजनीतिक भी, में वरुण ग्रोवर ने बड़े कौशल से एक असंभव-सा लगने वाला नायक रचा है, जो निराशा के समय में आशा जगाता है।इसे सुनिए पॉडकास्ट मझधार के एपिसोड 62 में।(थंबनेल पर प्रयुक्त चित्रण - राजकुमारी, स्रोत: www.thesinglescreen.wordpress.com)Majhdhaar podcast / Instagram @majhdhaar / X @rahuljigaur / email [email protected]
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Ep 61 इश्क़ में शहर होना - रवीश कुमार / Ishq Mein Shahar Hona - Ravish Kumar
दिल्ली की भीड़ और भगदड़ के बीच इश्क़ की मुलायम कहानियाँ पलती हैं, परवान चढ़ती हैं।आज के एपिसोड में सुनिये सुविख्यात पत्रकार रवीश कुमार की लिखी “लप्रेक” पुस्तक “इश्क़ में शहर होना” के कुछ अंश। Amidst the crowds and chaos of Delhi, tender love stories quietly take root and blossom.In today’s episode, listen to selected excerpts from Ishq Mein Shahar Hona, the celebrated “Laprek” (short love prose) collection by renowned journalist Ravish Kumar.Instagram - @majhdhaar X- @rahuljigaur Email: [email protected]
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Ep 60: रेत का बीहड़ - किशोर चौधरी ॰ पृथ्वी परिहार / Ret Ka Beehad - Kishore Chaudhary ॰ Prithvi Parihar
राजस्थान समय की वादियों में बहती एक रेत की नदी है। सदियों से यहाँ के बाशिंदों ने आशा और जीवट से पोस कर उल्लास के फूल खिलाये हैं।आज के एपिसोड में राजस्थान पर किशोर चौधरी और पृथ्वी परिहार का लिखा सुनिये। Instagram - @majhdhaar X- @rahuljigaur Email: [email protected]
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Ep 59 सिनेमा, सिनेमा और सिनेमा : शंभू राणा / Cinema, Cinema Aur Cinema : Shambhoo Rana
ये एपिसोड सिनेमा की दीवानगी के क़िस्सों का, शंभू राणा की पुस्तक “माफ़ करना हे पिता” से!
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Ep 58 Lal Bangla (Final Part 3) - Irfan Ahmed Urfi / लाल बँगला- इरफ़ान अहमद उर्फ़ी
पाकिस्तान के साथ हमारे देश का जो पचहत्तर-अस्सी सालों पुराना खट्टा-मीठा-कड़वा रिश्ता है, उस में अधिकांश समय हम ये भूले ही रहते हैं कि वहाँ भी आम लोगों की आम ज़िंदगियाँ हैं और उनकी कहानियाँ हैं जिनमें हमारे जैसे पात्र ही साँस लेते हैं। इस एपिसोड में सुनिये पाकिस्तान के लेखक इरफ़ान अहमद उर्फ़ी की लिखी लंबी कहानी “लाल बँगला” का आख़िरी भाग- भाग 3. ये कहानी सूर्य प्रकाशन मंदिर, बीकानेर से प्रकाशित कहानी संकलन “आज की पाकिस्तानी कहानियाँ” से ली गई है। आप को यह एपिसोड कैसा लगा, बताइएगा।Our country’s relationship with Pakistan, spanning 75-80 years, has been a mix of sweet, sour, and bitter moments. Most of the time, we tend to forget that there are ordinary people living ordinary lives there, with stories that feature characters just like ours.In this episode, listen to last and final part (Part 3) of “Lal Bangla”, a long story written by Pakistani author Irfan Ahmed Urfi. This story is taken from the collection “Aaj Ki Pakistani Kahaniyan”, published by Surya Prakashan Mandir, Bikaner.Do let us know how you liked this episode!Facebook - Rahul Gaur https://www.facebook.com/rahul.gaur.332?mibextid=LQQJ4d&mibextid=LQQJ4dInstagram - @majhdhaar X- @rahuljigaur Email: [email protected]
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Ep 57 साल भर - पंकज श्रीवास्तव, अतुल तिवारी / Saal Bhar - Pankaj Srivastava, Atul Tiwari
हैप्पी न्यू ईयर 2025! आज के एपिसोड में गये साल को याद करते और नये साल की बात करते हुए पंकज श्रीवास्तव की कविता “नये साल बचे झूठ की कहानी से” और अतुल तिवारी का लेख सुनिये! आप को यह एपिसोड कैसा लगा, बताइएगा।Instagram - @majhdhaar X- @rahuljigaur Email: [email protected]
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Ep 56 Lal Bangla (Part 2) - Irfan Ahmed Urfi / लाल बँगला (भाग 2) - इरफ़ान अहमद उर्फ़ी
पाकिस्तान के साथ हमारे देश का जो पचहत्तर-अस्सी सालों पुराना खट्टा-मीठा-कड़वा रिश्ता है, उस में अधिकांश समय हम ये भूले ही रहते हैं कि वहाँ भी आम लोगों की आम ज़िंदगियाँ हैं और उनकी कहानियाँ हैं जिनमें हमारे जैसे पात्र ही साँस लेते हैं। इस एपिसोड में सुनिये पाकिस्तान के लेखक इरफ़ान अहमद उर्फ़ी की लिखी लंबी कहानी “लाल बँगला” जो सूर्य प्रकाशन मंदिर, बीकानेर से प्रकाशित कहानी संकलन “आज की पाकिस्तानी कहानियाँ” से ली गई है। आप को यह एपिसोड कैसा लगा, बताइएगा।Our country’s relationship with Pakistan, spanning 75-80 years, has been a mix of sweet, sour, and bitter moments. Most of the time, we tend to forget that there are ordinary people living ordinary lives there, with stories that feature characters just like ours.In this episode, listen to “Lal Bangla”, a long story written by Pakistani author Irfan Ahmed Urfi. This story is taken from the collection “Aaj Ki Pakistani Kahaniyan”, published by Surya Prakashan Mandir, Bikaner.Do let us know how you liked this episode!Facebook - Rahul Gaur https://www.facebook.com/rahul.gaur.332?mibextid=LQQJ4d&mibextid=LQQJ4dInstagram - @majhdhaar X- @rahuljigaur Email: [email protected]
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Ep 55 Lal Bangla (Part 1) - Irfan Ahmed Urfi / लाल बँगला (भाग 1) - इरफ़ान अहमद उर्फ़ी
पाकिस्तान के साथ हमारे देश का जो पचहत्तर-अस्सी सालों पुराना खट्टा-मीठा-कड़वा रिश्ता है, उस में अधिकांश समय हम ये भूले ही रहते हैं कि वहाँ भी आम लोगों की आम ज़िंदगियाँ हैं और उनकी कहानियाँ हैं जिनमें हमारे जैसे पात्र ही साँस लेते हैं। इस एपिसोड में सुनिये पाकिस्तान के लेखक इरफ़ान अहमद उर्फ़ी की लिखी लंबी कहानी “लाल बँगला” जो सूर्य प्रकाशन मंदिर, बीकानेर से प्रकाशित कहानी संकलन “आज की पाकिस्तानी कहानियाँ” से ली गई है। आप को यह एपिसोड कैसा लगा, बताइएगा।Our country’s relationship with Pakistan, spanning 75-80 years, has been a mix of sweet, sour, and bitter moments. Most of the time, we tend to forget that there are ordinary people living ordinary lives there, with stories that feature characters just like ours.In this episode, listen to “Lal Bangla”, a long story written by Pakistani author Irfan Ahmed Urfi. This story is taken from the collection “Aaj Ki Pakistani Kahaniyan”, published by Surya Prakashan Mandir, Bikaner.Do let us know how you liked this episode!Facebook - Rahul Gaur https://www.facebook.com/rahul.gaur.332?mibextid=LQQJ4d&mibextid=LQQJ4dInstagram - @majhdhaar X- @rahuljigaur Email: [email protected]
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Ep 54 मित्रों की कविताएँ - Poets of A&S
साहित्य और कला प्रेमियों के एक समूह “एइस्थीट्स एण्ड सावान्टस्” (Aesthetes & Savants) के मेरे मित्र कवियों - संचिता, प्रतिभा, सेन्टी अमरजीत सिंह, कृष्ण चंद्र तीरवाल और इंद्र नारायण दास - की हिंदी रचनाएँ सुनिये इस एपिसोड में! Listen to the Hindi works of my poet friends Sanchita, Pratibha, Senti Amarjit Singh, Krishna Chandra Tirwal and Indra Narayan Das from “Aesthetes & Savants”, a group of literature and art lovers, in this episode!
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Ep 52 कलि-कथा वाया बाइपास - अलका सरावगी/ Kalikatha Via Bypass - Alka Saraogi
“कलि-कथा वाया बाइपास” अलका सरावगी द्वारा लिखित एक साहित्य अकादमी पुरस्कृत उपन्यास है। इस उपन्यास में कलकत्ता में मारवाड़ियों का पहुँचना, व्यापार जमाना और उनकी सामाजिक स्थिति, विशेषकर आज़ादी के बाद - पर, किशोर बाबू के परिवार के बहाने जो समग्र दृष्टि डाली गयी है और जो कथानक बुना गया है, वह बेहतरीन है, ज्ञानवर्धक है और बहुत रोचक भी है। आज के एपिसोड में कुछ अंश इसी पुस्तक से। आप के फ़ीडबैक आप मुझे मेरे ईमेल [email protected]पर भेज सकते हैं।
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Ep 51 निकीता का बचपन - अलेक्सई तोलस्तोय / Nikita’s Childhood- Alexei Tolstoy
इस एपिसोड में सुनिये, किसी बेहद ख़ूबसूरत कविता की तरह लिखी हुई किताब “निकीता का बचपन” के अंश। अलेक्सई तोलस्तोय द्वारा 1922 में लिखी इस किताब के पन्नों में बचपन का एक ऐसा संसार है जो बच्चों से भी ज़्यादा वयस्कों के भीतर छिपे बच्चों को भाता है। आपके फ़ीडबैक मुझे [email protected] पर या instagram पर @majhdhaar पर दे सकते हैं।
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Ep 50: पाँच कविताएँ/ Paanch Kavitayein
इस एपिसोड में आप को सुनने को मिलेंगी प्रसिद्ध हिंदी कवियों की पाँच बेहतरीन रचनायें - - “कैक्टस” - हरिवंश राय बच्चन - “घिन तो नहीं आती है?” - बाबा नागार्जुन - “थोड़ा सा” - अशोक वाजपेयी - “हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था” - विनोद कुमार शुक्ल - “धार” - अरुण कमल आपका फ़ीडबैक आप मेरे ईमेल [email protected] पर दे सकते हैं
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Ep 49 जब मैं छोटा था - सत्यजित राय / Jab Main Chhota Thha - Satyajit Ray
सत्यजित राय को कौन नहीं जानता! वे एक असाधारण फ़िल्मकार, लेखक, चित्रकार, और संगीत निर्माता थे जिन्होंने केवल भारत के ही नहीं, विश्व के प्रतिभाशाली फ़िल्मकारों जैसे कुरोसावा, वेस एंडरसन, मार्टिन स्कोरसीज़ आदि को भी प्रभावित किया। इस एपिसोड में सुनिये ख़्यातिप्राप्त सत्यजित राय के संस्मरण “जब मैं छोटा था” के दो अंश। आप को ये एपिसोड कैसा लगा, मुझे बताइये। मेरा ईमेल है [email protected]. Satyajit Ray was an extraordinary filmmaker, writer, painter, and music producer. His great body of work influenced ranged talented filmmakers of India and around the world like Kurosawa, Wes Anderson, Martin Scorsese, etc. In this episode, listen to two excerpts from Satyajit Ray's childhood memoirs “Jab Main Chhota Tha”. Let me know how you liked this episode. My email is [email protected].
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Ep 48 रेत समाधि - गीतांजलि श्री / Ret Samadhi - Geetanjali Shree
“रेत समाधि” उपन्यास 2018 में प्रकाशन के तुरंत बाद से ही अपने अनूठे कथानक और बिल्कुल नयी भाषा शैली के कारण हिंदी साहित्य की दुनिया में चर्चा में रहा है। इस के अंग्रेज़ी अनुवाद Tomb of Sand को सन् 2022 का अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार मिलने के बाद विश्व भर में सुधी पाठकों ने इसे सराहा है। आज के एपिसोड में इस उपन्यास के दो अंश आप के लिये प्रस्तुत हैं - सुनिये। The novel “Ret Samadhi” has been in the news in the world of Hindi literature since its publication in 2018 due to its unique plot and completely new language style. Its English translation Tomb of Sand has been appreciated by attentive readers all over the world after it received the International Booker Prize for 2022. In today's episode, I read out two excerpts from this novel. Go ahead and have a listen. Instagram- @majhdhaar Email - [email protected] #bookerprize #hindi #hindiliterature
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Ep 47 दारोगा जी - प्रेमचंद / Daaroga Ji - Premchand
ताँगे पर सवार दारोगा जी चले जा रहे हैं कि अचानक गालियों की बौछार और पत्थरों के वार!! क्यूँ? सुनिये प्रेमचंद की मज़ाहिया कहानी “दारोगा जी”। कहानी पसंद आये तो शेयर कीजिये। और मुझे बताइये कि आप को ये पॉडकास्ट कैसा लग रहा है। Instagram- @majhdhaar Email - [email protected] Daroga Ji is enjoying the Tonga ride when suddenly there is a shower of abuses and throwing of stones. Why? Listen to Premchand's funny story "Daroga Ji". If you like the story, share it. And let me know how you feel about this podcast. Instagram- @majhdhaar Email - [email protected]
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Ep 46 Reflections on Gandhi (Excerpts) - George Orwell / गाँधी पर कुछ विचार - जॉर्ज ऑरवेल
अंग्रेज़ी के प्रख्यात उपन्यासकार जॉर्ज ऑरवेल का महात्मा गाँधी पर निबंध “Reflections on Gandhi” उन के व्यक्तित्व और राजनीति पर एक पठनीय विवेचन है। इसके कुछ अंश आप के लिये इस पॉडकास्ट में पेश हैं। किसी फ़ीडबैक के लिये आप मुझे [email protected] पर लिख सकते हैं। ये निबंध आप Orwell Foundation की वेबसाइट पर पढ़ सकते हैं। ऑनलाइन चाहें, तो यह लिंक है - Reflections on Gandhi | The Orwell Foundation (https://www.orwellfoundation.com/the-orwell-foundation/orwell/essays-and-other-works/reflections-on-gandhi/) Famous English novelist George Orwell's essay on Mahatma Gandhi “Reflections on Gandhi” is an eminently readable discussion on his personality and politics. Here are some excerpts from it. For any feedback, you can write to me at [email protected].
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Ep 45 आ चल के तुझे मैं ले के चलूँ : किशोर कुमार - सुशोभित/ Aa chal ke tujhe main: Kishore Kumar - Sushobhit
किशोर कुमार हिंदी फ़िल्मों की एक नायाब आवाज़ हैं जो विविध रूपों में अपने चाहने वालों के दिलों में समाये हैं। हिंदी फ़िल्मों के सन् ५०-६० के स्वर्णिम युग से आज तक शायद सिर्फ़ किशोर कुमार ऐसे गायक हुए हैं जिनके अलग-अलग “मूड्स” के संकलन निकले, जैसे “रोमांस विद् किशोर”, “फनी किशोर”, “किशोर के दर्द भरे गीत”, “क्रेज़ी विद् किशोर”, “एनेर्जेटिक किशोर” आदि। (याद रहे, ये स्पॉटिफ़ाई से पहले का ज़माना था) उनकी गायकी को हदों में बाँधना तो मुश्किल है ही, शब्दों में बाँधना और भी मुश्किल है। पर ये कारनामा प्रसिद्ध लेखक-अनुवादक सुशोभित ने बख़ूबी अंजाम दिया है। मेरे जैसे फ़ैन्स, जिनके लिये किशोर की आवाज़ का मज़ा गूँगे का गुड़ जैसा है, ये लेख अपने दिल की बात कहते हैं। 4 अगस्त को किशोर कुमार का जन्मदिन है। मेरे पॉडकास्ट के आज के एपिसोड में मैंने सुशोभित के ये शानदार लेख आप के लिये पढ़े हैं, सुनिये 😊🙏🏼 हैप्पी बर्थडे किशोर दा! #kishorekumar #happybirthdaykishoreda #kishoresongs #किशोरकुमार #podcast #gaurrahul
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Ep 44 आवारा भीड़ के ख़तरे (निबंध) - हरिशंकर परसाई / Awaara Bheed Ke Khatre (Essay) - Harishankar Parsai
हिंदी के अनन्य व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई का दशकों पुराना ये निबंध आज भी प्रासंगिक है। क्यूँकि जब तक हम आवारा भीड़ के बनने की स्थितियाँ पैदा करते रहेंगे, आवारा भीड़ के ख़तरे यूँही बने रहेंगे। फ़ीडबैक के लिये लिेखें [email protected]
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Ep 43 सिग्नल (कहानी) - व्सेवोलोद गार्शिन/ Signal - Vsevolod Garshin
रूसी लेखक व्सेवोलोद गार्शिन द्वारा लिखित कहानी “सिग्नल” बहुत सरलता और प्रभावी ढंग से इस बात को रेखांकित करती है कि संसार में तमाम मुश्किलों के बावजूद आम व्यक्ति में एक भला मानस रहता है। The story "Signal" written by the Russian writer Vsevolod Garshin very simply and effectively underlines that despite all the difficulties in the world, there is a good soul in the common man.
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Ep 42 आज़ादी मेरा ब्रांड- अनुराधा बेनीवाल / Azadi Mera Brand - Anuradha Beniwal
“आज़ादी मेरा ब्रांड” अनुराधा बेनीवाल की यूरोप के शहरों की घुमक्कड़ी का दस्तावेज है। अनुराधा ने इस बैकपैकिंग भ्रमण के ज़रिये अपने यायावरी के शौक़ को पूरा किया और स्वयं और अपने परिवेश को भी नये सिरे से पहचाना। छोटी सी किताब और सरल भाषा में अनुराधा ने बहुत कुछ कह दिया है। इस एपिसोड में इस यात्रा वृतांत के कुछ टुकड़े मैं पढ़ कर सुना रहा हूँ। आपके बहुमूल्य फ़ीडबैक मुझे [email protected] पर भेजें। आपसे सुन कर मुझे अच्छा लगेगा और हौसला मिलेगा।
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Ep 41 शिव कुमार बटालवी की कविताएँ / Poems by Shiv Kumar Batalvi
शिव कुमार बटालवी पंजाबी भाषा के सबसे चर्चित और मशहूर कवियों में से हैं। इनके प्रेम और विछोह के दर्द से भरी कविताओं और गीतों के लिये इनके प्रशंसकों ने इन्हें “बिरहा दा सुल्तान” नाम से नवाज़ा और आज पचास साल बाद भी इनके गहन भावों से भरे गीतों के चाहने वाले कम नहीं हैं। आज के एपिसोड में मैं शिव कुमार बटालवी की दो पंजाबी कविताएँ अर्थ सहित पढ़ रहा हूँ। फ़ीडबैक के लिये लिखें - [email protected]
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Ep 40 मेरे मुँह में ख़ाक - मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी / Mere Munh Mein Khaak - Mushtaq Ahmed Yusufi
ये एपिसोड उर्दू के बेहतरीन व्यंग्यकार मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी के उपन्यास “मेरे मुँह में ख़ाक” के एक अंश का पाठन है। इस अंश में वे अपने प्यारे कुत्ते सीज़र का क़िस्सा, या कहें कि जीवनी, बयान कर रहे हैं। यूसुफ़ी साहब पाकिस्तान के चोटी के साहित्यकारों में से है पर उनके क़द्रदान सरहद के दोनों ओर हैं। एपिसोड सुनिये। फ़ीडबैक - [email protected]
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Ep 39 राग दरबारी- श्रीलाल शुक्ल / Raag Darbari - Shrilal Shukl
“राग-दरबारी" न केवल भारत की गाय-पट्टी में बिखरे असंख्य कस्बों और गावों का एक अनिवार्य प्राईमर है बल्कि व्यंग्य की शक्ल में हमारे तंत्र की विफलताओं का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है| शिवपाल-गंज नामक एक काल्पनिक क़स्बे में स्थित यह गाथा छोटे कस्बों और गावों की सामाजिक और राजनैतिक हालत पर तीखा किन्तु सोद्देश्य व्यंगय करती है, और सत्तर के दशक में लिखी जाने के बावजूद यह कमोबेश आज भी प्रासंगिक है |स्वयं लेखक के शब्दों में - "जैसे जैसे उच्चस्तरीय वर्ग में ग़बन, धोखा-धड़ी, भ्रष्टाचार और वंशवाद अपनी जड़ें मज़बूत करता जाता है, वैसे वैसे आज से चालीस वर्ष पहले का यह उपन्यास और भी प्रासंगिक होता जा रहा है"। इस उपन्यास के अंश सुनिये।
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Ep 38 तीन राजस्थानी कविताएँ / Three Rajasthani Poems
मेरे पॉडकास्ट के आज के एपिसोड में राजस्थानी (मायड़) भाषा के विपुल साहित्य से तीन तीखे तेवर की कविताएँ सुनिये। ये कविताएँ हैं “रोटी नाम सत है” (कवि - हरीश भादानी); “कोड़ा जमाल साई” (कवि - शिवराम); और “थै मजा करो महाराज” (कवि - मोहम्मद सद्दीक)
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Ep 37 अवसर - नरेंद्र कोहली/ Awsar - Narendra Kohli
अयोध्या के राजकुमार राम के, जननायक - मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम में बदलने की कीमिया कहाँ से शुरू होती है? मेरे देखे यह प्रस्थान बिंदु तब है जब रानी कैकेयी अपने वचनों से बंधे सम्राट दशरथ से दो वर माँगती हैं और राम को वनवास का आदेश होता है। साथ ही, पारंपरिक रूप से खलनायिका समझी गयी कैकेयी में मुझे एक स्वाभिमानी नारी दिखाई देती है। मेरे पॉडकास्ट के आज के एपिसोड में नरेंद्र कोहली जी के रामकथा पर आधारित उपन्यास “अवसर” का यही अंश पढ़ रहा हूँ जिसमें कैकेयी राम को वनवास माँग रहीं हैं । (कवर चित्र 1916 में छपी कन्नड़ सचित्र रामायण से लिया है। चित्रकार औंध महाराष्ट्र के महाराजा भवनराव श्रीनिवास राव हैं)
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Ep 36 उसने कहा था - कहानी - चंद्रधर शर्मा गुलेरी / Us Ne Kaha Thha - Story by Chandradhar Sharma Guleri
यह मार्मिक प्रेम कथा हिंदी साहित्य की श्रेष्ठतम कहानियों में से एक है। क़रीब सौ साल पहले रची गई ये कहानी अपनी संरचना और सोच के कारण कहानी की विधा में उस समय तो एक बड़ी छलांग थी ही, बल्कि आज भी ताज़ा रची लगती है।
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Ep 35 बूढ़ी काकी - प्रेमचंद / BooDhi Kaki - Premchand
कथा सम्राट प्रेमचंद की भाव विभोर कर देने वाली प्रसिद्ध कहानी - बूढ़ी काकी
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Ep 34 ठगों की हुश्यारियां - भाग २ / (उपन्यास अंश - कई चांद थे सरे-आसमां : शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी) / Kai Chaand Thhe Sare Aasmaan - 2
पाँच छह सौ साल पहले के हिंदुस्तान के क़िस्से जब सुने सुनाये जाते हैं तो कहीं ना कहीं ठगों का ज़िक्र ज़रूर आता है। “ठग” यानि सुनसान रास्तों पर समूह बना कर यात्रियों को लूटने वाले गिरोह, जिनसे यात्री ख़ौफ़ खाते थे। इनसे माल असबाब लुटने का ख़तरा तो था ही, जान जाना भी क़रीब क़रीब तय ही था। सुप्रसिद्ध उर्दू साहित्यकार और आलोचक शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी के उपन्यास “कई चांद थे सरे-आसमां” के इस अंश में कहानी के एक पात्र मिर्ज़ा आग़ा तुराब अली एक कामयाब व्यापारिक दौरा कर के सड़क के रास्ते घर लौट रहे हैं और रास्ते में कई बार उनका और उनके साथियों का सामना ठगों के गिरोह से होता है। एक सोच यह भी कहती है कि ठगी की संगठित गिरोहबाज़ी जैसा असल में कुछ था नहीं पर अंग्रेजों ने समाज के हाशिये पर पड़े हिंदुस्तानियों को, ख़ासकर वे जो उनके ख़िलाफ़ खड़े हुए, इस ख़तरनाक तरीक़े से बहुत बढ़ा चढ़ा के पेश किया। इसके बावजूद, एक कहानी के तौर पर ही, ये अंश और ये किताब बहुत पठनीय बन पड़े हैं और आशा है आपको पसंद आयेंगे। लीजिये, ठगों के कारनामों का दिलचस्प और कहीं कहीं रोंगटे खड़े कर देने वाला वर्णन का दूसरा और आख़िरी भाग सुनिये। आपकी प्रतिक्रिया आप मेरे ईमेल [email protected] पर भेजें।
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Ep 33 ठगों की हुश्यारियां- भाग १ / (उपन्यास अंश- कई चांद थे सरे-आसमां : शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी) / Excerpts from The Mirror of Beauty Part 1
पाँच छह सौ साल पहले के हिंदुस्तान के क़िस्से जब सुने सुनाये जाते हैं तो कहीं ना कहीं ठगों का ज़िक्र ज़रूर आता है। “ठग” यानि सुनसान रास्तों पर समूह बना कर यात्रियों को लूटने वाले गिरोह, जिनसे यात्री ख़ौफ़ खाते थे। इनसे माल असबाब लुटने का ख़तरा तो था ही, जान जाना भी क़रीब क़रीब तय ही था। सुप्रसिद्ध उर्दू साहित्यकार और आलोचक शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी के उपन्यास “कई चांद थे सरे-आसमां” के इस अंश में कहानी के एक पात्र मिर्ज़ा आग़ा तुराब अली एक कामयाब व्यापारिक दौरा कर के सड़क के रास्ते घर लौट रहे हैं और रास्ते में कई बार उनका और उनके साथियों का सामना ठगों के गिरोह से होता है। ठगों के कारनामों का दिलचस्प और कहीं कहीं रोंगटे खड़े कर देने वाला वर्णन सुनिये। आशा है आपको पसंद आयेगा। आपकी प्रतिक्रिया आप मेरे ईमेल [email protected] पर भेजें।
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Ep 32 मोहता पैलेस, कराचीः रिश्ता बीकानेर से - ओम थानवी / Mohata Palace, Karachi: Om Thanvi
सरहद पार, अरब सागर के किनारे बसा है पाकिस्तान का महानगर - कराची। और कराची के सबसे रईस इलाक़े में है एक बेहतरीन, शानदार इमारत - मोहता पैलेस, जो कि आज एक प्रसिद्ध अजायबघर और पर्यटन आकर्षण है और माज़ी में कभी राजनैतिक हलचल का भी बड़ा केंद्र रहा। कम लोग जानते हैं कि इस इमारत के इतिहास का राजस्थान के बीकानेर शहर से गहरा संबंध रहा है। कैसे? यह रोचक जानकारी सुनिये मेरे पॉडकास्ट के आज के एपिसोड में जिसमें मैं वरिष्ठ रचनाकार-पत्रकार ओम थानवी जी के यात्रा वृतांत “फ़ैज़ के कराची में” का अंश आप को पढ़ कर सुना रहा हूँ।
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Ep 31 सरदार जी - कहानी - ख़्वाजा अहमद अब्बास / Sardar Ji - Story by Khwaja Ahmed Abbas
धार्मिक और नस्ली पूर्वाग्रहों को आईना दिखाती और उन्हें ध्वस्त करती ये कहानी भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय में स्थित है पर देश की सीमाओं के भीतर भी आज यह उतनी ही प्रासंगिक है।
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Ep 30 वर्जीनिया वुल्फ़ से सब डरते हैं: शरद जोशी / Virgnia Woolf Se Sab Darte Hain, Satire by Sharad Joshi
पुराने सरकारी ऑफिसों में चापलूसी, दिखावे और छोटी मोटी राजनीति का मज़ेदार चित्रण करती, मशहूर व्यंग्यकार शरद जोशी की ये रचना “वर्जीनिया वुल्फ़ से सब डरते हैं”। आज चाहे समय बदल गये हैं पर इंसानी फ़ितरतें कहाँ बदलती हैं। सुनिये और आनन्द लीजिये।
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Ep 29 “पटकथा” - धूमिल की लम्बी कविता के अंश / Excerpts from Dhoomil's long poem "Patkatha"
…“जनता क्या है? एक शब्द… सिर्फ़ एक शब्द है : कुहरा, कीचड़ और काँच से बना हुआ… एक भेड़ है जो दूसरों की ठंड के लिए अपनी पीठ पर ऊन की फ़सल ढो रही है।”… धूमिल की पुण्यतिथि पर उनकी कविता का अंश सुनिये…
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Ep 28 कौन हो तुम, मेरे भारत? - एक कविता
गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ! भारत की विविधता को समेटे एकता, भारत की एक अतुलनीय विशेषता है। इसी को कहने का प्रयास है ये मेरी कविता; आशा है पसंद आयेगी
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Ep 27 हिरनौटाः दमीत्री मामिन-सिबिर्याक (श्रेष्ठ रूसी बाल कथाएँ) / Hirnauta: Dmitri Mamin-Sibiriyak (Best Russian Children’s Tales)
श्रेष्ठ रूसी बाल-कथाएँ” रूस के महान लेखकों की प्रसिद्ध कहानियों का संकलन है, जिसमें से एक प्यारी कहानी है हिरनौटा। इस संकलन की अन्य कहानियों की तरह इस कहानी में भी प्रेम, करूणा, दुख और ख़ुशी का मिश्रण है, बालकों की सरलता है और बड़ों की नैतिकता। कहानी सुनें और पसंद आये तो शेयर करें। आपके विचार आप [email protected] पर भेज सकते हैं।
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Ep 26 हरिवंश राय बच्चन - आत्मकथा अंश / Excerpts from the autobiography of Harivansh Rai Bachchan
हरिवंश राय बच्चन जी की बेहद पठनीय आत्मकथा, जो कि चार खंडों में फैली है, में से दो रोचक क़िस्से सुनिये 😊 अभी २७ नवंबर को उनकी जयंती थी - उन्हें सादर नमन
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Ep 25 दीपावली- दो कविताएँ / Diwali - Two poems
दीपावली की शुभकामनाएँ दो कविताओं के साथ - हरिवंश राय बच्चन जी की “है अँधेरी रात, पर दीवा जलाना कब मना है” और गोपाल दास नीरज जी की “धरा को उठाओ, गगन को झुकाओ”
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Ep 24 ब्रेस ब्रेस ब्रेसूटी याने जो दल गया वो मल गया: लपूझन्ना- भाग ८ (अशोक पाण्डे) / Lapoojhanna- Part 8 (Ashok Pandey)
ढाई तीन दशक पहले, जब ज़िंदगी उपभोक्तावाद के प्लास्टिक पंजों में इतनी बुरी तरह जकड़ी नहीं गयी थी, बचपन का समय एक अलमस्त बेफ़िक्री से भरा समय था। ख़ासकर छोटे शहरों और क़स्बों में, बच्चे ऐंचक बेंचक गली मोहल्लों में खेलते कूदते, ज़िंदगी और इसके किरदारों से एक्सपेरिमेंट्स करते कराते, टीन एज की ओर ख़िरामाँ ख़िरामाँ बढ़ते रहते थे। लपूझन्ना एक छोटे शहर के ऐसे ही एक बचपन की संस्मरणात्मक शैली की कथा है जो लेखक-अनुवादक अशोक पाण्डे जी ने लिखी है। अशोक जी के लिखे इस हास्य से भरपूर और बेहद मज़ेदार कथानक को मैंने आवाज़ दी है अपने नये पॉडकास्ट सीरीज़ में, और मेरा आग्रह है कि इसे एक बार समय ज़रूर दें। यह मेरा दावा है कि अशोक जी की लेखनी, जिसका नमूना वह पहले अपने प्रसिद्ध ब्लॉग “कबाड़ख़ाना” पर और अब फ़ेसबुक पर भी देते रहते हैं, आपको फिर फिर वापिस बुलायेगी 😊
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Ep 23 कविता “मोचीराम” - सुदामा पाण्डेय धूमिल / Poem “Mochiram” - Sudama Pandey Dhoomil
धूमिल विद्रोह के कवि हैं जिन्होंने सत्ता के शोषण और समाज की विसंगतियों को अपनी कविताओं में ढाला। “मोचीराम” जूते बनाने वाले एक कारीगर से वार्तालाप के ज़रिये यही कुछ कहती एक कविता है।
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Ep 22 सर्वेश्वरदयाल सक्सेना: “प्रार्थना” एवं अन्य कविताएँ / "Prarthana" and other poems of Sarvershwar Dayal Saxena
सर्वेश्वरदयाल सक्सेना जी की जयंती के अवसर पर उनको याद करते हुए उनकी कुछ कविताओं का पाठ आप के लिये। (इस पॉडकास्ट में तीन अलग अलग खंड हैं जो कि अलग अलग समय पर रिकॉर्ड हुए हैं)
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Ep 21 बच्चों की चड्डी और होशियार सुतरा: लपूझन्ना- भाग ७ (अशोक पाण्डे) / Lapoojhanna- Part 7 (Ashok Pandey)
ढाई तीन दशक पहले, जब ज़िंदगी उपभोक्तावाद के प्लास्टिक पंजों में इतनी बुरी तरह जकड़ी नहीं गयी थी, बचपन का समय एक अलमस्त बेफ़िक्री से भरा समय था। ख़ासकर छोटे शहरों और क़स्बों में, बच्चे ऐंचक बेंचक गली मोहल्लों में खेलते कूदते, ज़िंदगी और इसके किरदारों से एक्सपेरिमेंट्स करते कराते, टीन एज की ओर ख़िरामाँ ख़िरामाँ बढ़ते रहते थे। लपूझन्ना एक छोटे शहर के ऐसे ही एक बचपन की संस्मरणात्मक शैली की कथा है जो लेखक-अनुवादक अशोक पाण्डे जी ने लिखी है। अशोक जी के लिखे इस हास्य से भरपूर और बेहद मज़ेदार कथानक को मैंने आवाज़ दी है अपने नये पॉडकास्ट सीरीज़ में, और मेरा आग्रह है कि इसे एक बार समय ज़रूर दें। यह मेरा दावा है कि अशोक जी की लेखनी, जिसका नमूना वह पहले अपने प्रसिद्ध ब्लॉग “कबाड़ख़ाना” पर और अब यहाँ फ़ेसबुक पर देते रहते हैं, आपको फिर फिर वापिस बुलायेगी 😊
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Ep 20 दुष्यंत कुमार को नमन / Dushyant Kumar - A small remembrance
हिंदी ग़ज़लों के प्रणेता दुष्यंत कुमार जी की आज १ सितंबर को जयंती है। उनको याद करते हुए आज का ये एपिसोड.. “मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए” ~दुष्यंत कुमार
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Rahul Gaur
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