New boy rapper Mastana

PODCAST · arts

New boy rapper Mastana

सबसे पहले तो यह एक ऑडियो से बना हुआ पूरा एल्बम जो जिंदगी की हकीकतको बताता है कि सच में जिंदगी कैसी यह लग्ज़री लाइव और और उसके सामने वालों के बारे में बताता है दरअसल में एक रैपर हूं और मैं यह चाहता हूं मैं जो भी लिखूं उसके पीछे कुछ ना कुछ बड़ी वजह हो जो लोगों केकाम आए उनको एक नजरियादे लोग क्या है कैसेहैं और भी बहुतकुछ

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    हज़रत ख्वाजा सैय्यद मोईनुद्दीन हसन चिश्ती संजरी सुम्मा अजमेरी (रहमतुल्लाह अलैह) की शान में

    हज़रत ख्वाजा सैय्यद मोईनुद्दीन हसन चिश्ती संजरी सुम्मा अजमेरी (रहमतुल्लाह अलैह) की शान में आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान फ़ाज़िल-ए-बरेल्वी (रहमतुल्लाह अलैह) फ़रमाते हैं:बाँटते हैं यहाँ ने’मतें कोनैन कीलाख कर दे भला कोई बदख्वाह क्याख़्वाजा-ए-ख़्वाजगान, मुई़नुद्दीन हैंवालि-ए-हिन्द हैं, ग़ौसुल-वरा क्याहज़रत-ए-ख्वाजा की सरकार हैफ़र्श से अर्श तक नाम हैआपका दर है अमन और अमांहाए! अब ख़ौफ़ से डरना भला क्यातेरे अजमेर की ख़ाक पाक हैजिसको सुर्मा बनाए आँख परवो ग़ुलाम-ए-ख़ुसूसियत पाएगाऔर शाही का द'वा भला क्याऐ करम के मुक़ाबले में क़ुसूरमेरे ख्वाजा मुझे सवाली करेंऐ निगाह-ए-करम! मेरी क़िस्मत जगालाख हसरत रही, अब निराशा भला क्यायाद आ जाता है जब दर आपकासर झुका लेता है फ़लक-सा क्याशाहों का भी शाह है ख्वाजा मेराता-क़यामत रहे सिक्का भला क्यानूर-ए-इ'रफ़ाँ का तालिब हूँ मैंज़िक्र-ए-हक़ का गुज़ारिश दर में हैया मुई़नुद्दीन! अजमेर की ख़ाक कोसुर्मा कर आँख पर, अब दवा क्याहम असीर-ए-मुहब्बत-ए-ख्वाजा हैंहम फ़क़ीर-ए-करम-ए-ख्वाजा हैंहमको दर से कोई हटा न सकेबा ख़ुदा! दुश्मनों का डर क्याआज हिन्दुस्तान में ईमान कातेरा सिक्का है जारी सुबह-ओ-शामतेरे परचम तले है हर ग़ुलामऔर बग़ावत का ख़तरा भला क्याआपकी शान में लफ़्ज़ कहाँ से लाऊँऐ खुदा के वली! तू ही जानेमेरा दिल है फ़क़त कश्ती-ए-ग़मतेरा इशारा ही किनारा भला क्याकौनों-मक़ाँ में नूर तुम्हाराहर जा है रोशन दर तुम्हाराया मुई़नुद्दीन! करम से ख़ादिम कोदे निशानी पसंदीदा, अब अता क्या

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    सलाम उन पर जिन्होंने दोनों -जहाँ को संवारा है मदीना-ए-मुनव्वरा की हर गलीयो में नूर का नज़ारा है

    सलाम उन पर जिन्होंने दोनों -जहाँ को संवारा हैमदीना-ए-मुनव्वरा की हर गलीयो में नूर का नज़ारा हैहजारों दिल हैं उनके सदक़े मे लाखों हैं उन पर फ़िदाअज़मतों का ये शहर जन्नत का एक इशारा हैया रसूल अल्लाह आपकी मुहब्बत में ये दिल बेकरार हैआपकी आमद से ही तो रोशन है यह दोनों जहां के नजारे है दुआ है अश्क़-ए-शौक से हो रौशन ये रातें मेरीआपके दर पर पहुँचना बस यही एक ख़्वाब हमारा हैइश्क़-ए-मुस्तफ़ा में हर साँस को लुटाने को दिल चाहता है

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    मदीना की फ़िज़ां में बस ख़ुशबू-ए-मुस्तफ़ा है हर साँस में हर दिल में बस जिक्र-ए-मुस्तफ़ा है

    मदीना की फ़िज़ां में बस ख़ुशबू-ए-मुस्तफ़ा हैहर साँस में हर दिल में बस जिक्र-ए-मुस्तफ़ा हैये वो शहर है जहाँ रूह को सुकून मिलता हैऔर जहाँ हर मुश्किल का हल करम-ए-मुस्तफ़ा हैअल्लाह ने अता की है इतनी अज़मत इस मक़ाम कोकि यहाँ की मिट्टी में भी शिफा-ए-मुस्तफ़ा हैगुंबद-ए-ख़ज़रा के साए में सुकून-ए-कल्ब हैयहाँ दिल को हर तकलीफ से निजात-ए-मुस्तफ़ा हैया नबी आपकी शफाअत की तलब में हैं सबसच्चे आशिकों के लिए हर राह में बस अता-ए-मुस्तफ़ा है

  4. 6

    हमारा ब्रह्मांड और सौर मंडल

    हमारा ब्रह्मांड और सौर मंडल इस यात्रा की शुरुआत हम उस जगह से करेंगे, जहाँ से सब कुछ शुरू हुआ यह थीम हमें यह समझने में मदद करेगी कि हम जिस पृथ्वी पर रहते हैं, वह इस विशाल ब्रह्मांड का एक बहुत छोटा सा हिस्सा है1ब्रह्मांड की शुरुआत बिग बैंग थ्योरीक्या आपने कभी सोचा है कि यह सब कहाँ से आया आज से लगभग 138 अरब साल पहले, हमारा ब्रह्मांड एक बहुत ही छोटे, गर्म और घने बिंदु के रूप में था फिर अचानक इसमें एक बहुत बड़ा विस्फोट हुआ, जिसे बिग बैंग कहा जाता है इस विस्फोट के बाद, ब्रह्मांड फैलना शुरू हुआ और आज भी फैल रहा है जैसेजैसे यह फैला, यह ठंडा होता गया, जिससे धीरेधीरे कण बने इन कणों के आपस में जुड़ने से गैलेक्सी तारे और ग्रह बने2 गैलेक्सी क्या हैहमारी गैलेक्सी का नाम आकाशगंगा है गैलेक्सी अरबों तारों, गैस और धूल के बादलों का एक विशाल समूह होती है, जो गुरुत्वाकर्षण के कारण एक साथ बँधे होते हैं हमारी आकाशगंगा एक सर्पिल आकार की है, जिसमें अरबों तारे हैं हमारा सूर्य भी इसी आकाशगंगा का एक तारा है, जो इसके केंद्र से लगभग 26,000 प्रकाश वर्ष दूर है3 हमारा सौर मंडलसौर मंडल हमारे सूर्य और उन सभी खगोलीय पिंडों से मिलकर बना है जो इसके चारों ओर चक्कर लगाते हैं इसमें 8 ग्रह, उनके उपग्रह चाँद, उल्कापिंड, धूमकेतु और क्षुद्रग्रह शामिल हैसौर मंडल के ग्रह सौर मंडल को दो भागों में बाँटा जा सकता हैआंतरिक ग्रह ये सूर्य के पास हैं और चट्टानों से बने हैं बुध सूर्य के सबसे नज़दीक शुक्र सबसे गर्म ग्रह पृथ्वी हमारा घर, जहाँ जीवन संभव है मंगल इसे लाल ग्रह भी कहते हैंबाहरी ग्रह ये सूर्य से दूर हैं और ज़्यादातर गैसों से बने हैं बृहस्पति सौर मंडल का सबसे बड़ा ग्रह शनि इसके चारों ओर सुंदर वलय हैं अरुण यह अपने अक्ष पर बहुत ज़्यादा झुका हुआ है वरुण सूर्य से सबसे दूर का ग्रह4 ग्रह और तारे में अंतरयह समझना बहुत ज़रूरी है तारे तारे वे खगोलीय पिंड हैं जो खुद की रोशनी पैदा करते हैं हमारा सूर्य एक तारा है ग्रह ग्रह वे खगोलीय पिंड हैं जो अपनी रोशनी पैदा नहीं करते वे सूर्य की रोशनी से चमकते हैं5 प्रकाश वर्ष क्या हैब्रह्मांड में दूरियों को नापने के लिए हम प्रकाश वर्ष का इस्तेमाल करते हैं प्रकाश वर्ष दूरी का मात्रक है, समय का नहीं एक प्रकाश वर्ष वह दूरी है जो प्रकाश एक साल में तय करता है चूंकि प्रकाश बहुत तेज़ चलता है लगभग 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड, इसलिए एक प्रकाश वर्ष की दूरी बहुत ज़्यादा होती हैतो यह हमारी पहली थीम का एक संक्षिप्त परिचय था हमने ब्रह्मांड की शुरुआत, गैलेक्सी और हमारे सौर मंडल के बारे में जाना थीम 1 ब्रह्मांड और सौर मंडल एक अद्भुत यात्रापहले हमने एक सामान्य परिचय लिया था, अब हम हर बिंदु पर विस्तार से बात करेंगे1 ब्रह्मांड शुरुआत और वर्तमानबिग बैंग थ्योरी यह सिर्फ एक धमाका नहीं था, बल्कि अंतरिक्ष और समय का जन्म था इस थ्योरी के अनुसार, एक अतिघना और गर्म बिंदु अचानक फैलना शुरू हुआ इस फैलाव के साथ, ऊर्जा से पदार्थ बना शुरुआती पदार्थ में मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम गैस थीं यही गैसें गुरुत्वाकर्षण के कारण आपस में मिलकर गैलेक्सी और तारों के समूह बनाने लगीं ब्रह्मांड का फैलाव वैज्ञानिक एडविन हबल ने 1929 में यह खोजा कि सभी गैलेक्सी हमसे दूर जा रही हैं और जितनी दूर हैं, उतनी ही तेज़ी से यह इस बात का सबूत है कि ब्रह्मांड लगातार फैल रहा है2 गैलेक्सी और हमारे पड़ोसीहमारी गैलेक्सी, आकाशगंगा , लगभग 1 लाख प्रकाश वर्ष चौड़ी है इसमें 100 अरब से ज़्यादा तारे हैं यह अपने केंद्र के चारों ओर घूमती है, और हमारा सूर्य भी इसी गति का हिस्सा है गैलेक्सी के प्रकार सर्पिल गैलेक्सी हमारी आकाशगंगा की तरह, जिसमें बीच में एक उभरा हुआ हिस्सा और चारों ओर घूमी हुई भुजाएँ होती हैं अंडाकार गैलेक्सी ये गोल या अंडाकार होती हैं और इनमें ज़्यादातर पुराने तारे होते हैं असममित गैलेक्सी जिनका कोई निश्चित आकार नहीं होता एंड्रोमेडा गैलेक्सी Andromeda Galaxy यह हमारी सबसे करीबी बड़ी गैलेक्सी है, जो लगभग 25 लाख प्रकाश वर्ष दूर है और यह हमारी तरफ़ बढ़ रही है माना जाता है कि अरबों साल बाद ये दोनों गैलेक्सी आपस में टकरा जाएँगी

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    भारतीय संविधान की यात्रा: थीम 1- संविधान का ऐतिहासिक आधार और निर्माण

    SK सोढा इकबाल SK, INDIANIभारतीय संविधान की यात्रा: थीम 1- संविधान का ऐतिहासिक आधार और निर्माणभारत के संविधान को समझना, उसके ऐतिहासिक जड़ों को समझे बिना अधूरा है। यह केवल एक कानूनी दस्तावेज़ नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम, सामाजिक-राजनीतिक आंदोलनों और विविध विषयों का परिचायक है।1.1 ऐतिहासिक पृष्ठभूमिभारतीय संविधान का जन्म एक दिन में नहीं हुआ था। इसकी नींव कई शताब्दियों के औपनिवेशिक शासन, संघर्ष और सुधारों में निहित है। ब्रिटिश शासन के दौरान पारित विभिन्न अधिनियमों ने धीरे-धीरे भारत में संवैधानिक और प्रशासनिक ढांचे को आकार दिया।1.1.1 कंपनी शासन (1773-1858) के दौरान संवैधानिक विकासयह वह अवधि थी जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी भारत पर शासन कर रही थी, और ब्रिटिश संसद ने कंपनी के मामलों को विनियमित करने के लिए कानून बनाना शुरू कर दिया था।* रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 (Regulating Act, 1773):* धारा का काम: यह ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के कार्यों को नियंत्रित और विनियमित करने का पहला कदम था। इसका उद्देश्य कंपनी के कुप्रशासन को समाप्त करना था।* विस्तार से:* इसमें बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' बना दिया और उसकी सहायता के लिए एक चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद का गठन किया। लॉर्ड वॉरेन हेस्टिंग्स बंगाल के पहले गवर्नर-जनरल बने।* इसमें बंबई (बॉम्बे) और मद्रास के गवर्नरों को बंगाल के गवर्नर-जनरल के अधीन कर दिया। इस प्रकार, इसमें भारत में केंद्रीकरण की नींव रखी।* इस अधिनियम ने 1774 में कलकत्ता में एक सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की स्थापना का प्रावधान किया, जिसमें एक मुख्य न्यायाधीश और तीन अन्य न्यायाधीश शामिल थे।* इसमें कंपनी के सेवकों को निजी व्यापार करने या भारतीयों से उपहार और रिश्वत लेने पर प्रतिबंध लगा दिया।* इसमें ब्रिटिश सरकार को कंपनी के राजस्व, नागरिक और सैन्य मामलों पर नियंत्रण मजबूत करने में मदद की।* पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 (Pitt's India Act, 1784):* धारा का काम: यह रेगुलेटिंग एक्ट की कमियों को दूर करने और कंपनी के प्रशासन पर ब्रिटिश सरकार के नियंत्रण को और मजबूत करने के लिए लाया गया था।* विस्तार से:* इसमें कंपनी के वाणिज्यिक और राजनीतिक कार्यों को अलग-अलग कर दिया।* वाणिज्यिक मामलों के लिए निदेशक मंडल (Court of Directors) की अनुमति दी गई।* राजनीतिक मामलों के प्रबंधन के लिए एक नए निकाय, नियंत्रण बोर्ड (Board of Control) की स्थापना की गई। इस प्रकार, इसने दोहरी सरकार (Dual Government) की प्रणाली शुरू की।* नियंत्रण बोर्ड को भारत में ब्रिटिश संपत्ति के सभी नागरिक, सैन्य और राजस्व संचालन की निगरानी और निर्देशन की शक्ति दी गई। यह भारत में ब्रिटिश सरकार के सर्वोच्च नियंत्रण का प्रतीक था।* चार्टर अधिनियम, 1813 (Charter Act, 1813):* धारा का काम: कंपनी के शासन में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाया, खासकर व्यापारिक नीतियों और सांस्कृतिक पहलुओं में।* विस्तार से:* इस अधिनियम ने भारत के साथ कंपनी के व्यापार एकाधिकार को समाप्त कर दिया, सिवाय चाय के व्यापार और चीन के साथ व्यापार के।इसमें ब्रिटिश व्यापारियों को भारत के साथ व्यापार करने की अनुमति दी।* इसमें ईसाई मिशनरियों को भारत में प्रचार करने और धार्मिक गतिविधियों को प्रचार करने की अनुमति दी।* इसमें भारतीयों की शिक्षा के लिए प्रति वर्ष ₹1 लाख की राशि रखने का प्रावधान किया। यह ब्रिटिश सरकार की भारत में शिक्षा पर ध्यान देने की पहली आधिकारिक पहल थी।* चार्टर अधिनियम, 1833 (Charter Act, 1833):* धारा का काम: यह ब्रिटिश भारत में केंद्रीकरण की दिशा में अंतिम कदम था, और इसने कंपनी के प्रशासनिक स्वरूप को पूरी तरह से बदल दिया।* विस्तार से:*

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    यूपीएससी सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के वैकल्पिक विषय (Optional Subject)

    SK सोढा इकबाल SK, INDIAN।आप यूपीएससी सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के वैकल्पिक विषय (Optional Subject) वाले पेपर के बारे में जानना चाहते हैं। मैं आपको इसे संक्षिप्त और विस्तृत दोनों रूपों में समझाने की कोशिश करता हूँ, जिससे आपको लगे कि पूरा विषय कवर हो गया है।यूपीएससी वैकल्पिक विषय (Optional Subject) पेपर: एक संक्षिप्त अवलोकनयूपीएससी सिविल सेवा मुख्य परीक्षा में उम्मीदवारों को अपनी पसंद का एक वैकल्पिक विषय चुनना होता है। इस विषय के दो पेपर होते हैं, प्रत्येक 250 अंकों का, कुल 500 अंक। ये अंक अंतिम मेरिट सूची में जोड़े जाते हैं, जिससे वैकल्पिक विषय चयन परीक्षा में सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।वैकल्पिक विषयों की सूची में साहित्य से लेकर विज्ञान, इंजीनियरिंग और सामाजिक विज्ञान तक विभिन्न प्रकार के लगभग 26-28 विषय शामिल होते हैं। उम्मीदवार अपनी रुचि, पृष्ठभूमि, अध्ययन सामग्री की उपलब्धता और विषय के पिछले प्रदर्शन के आधार पर विषय का चुनाव करते हैं।वैकल्पिक विषय का विस्तृत विवरण (Short Form of Discrete with Comprehensive Subject Matter)यूपीएससी के वैकल्पिक विषय को "विस्तार से शॉर्ट फॉर्म ऑफ़ डिस्क्रीट" में समझने के लिए, हम इसे निम्नलिखित बिंदुओं में विभाजित कर सकते हैं:1. विषय का चयन (Subject Selection) * विभिन्न विकल्प: यूपीएससी द्वारा अनुमोदित वैकल्पिक विषयों की एक लंबी सूची है, जिसमें शामिल हैं: * सामाजिक विज्ञान: इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान और अंतर्राष्ट्रीय संबंध, लोक प्रशासन, समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, दर्शनशास्त्र, अर्थशास्त्र। * विज्ञान और इंजीनियरिंग: भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित, वनस्पति विज्ञान, प्राणी विज्ञान, भूविज्ञान, कृषि, पशुपालन और पशु चिकित्सा विज्ञान, सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग। * साहित्य: हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, उर्दू, बंगाली, पंजाबी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, गुजराती, मराठी, ओडिया, नेपाली, डोगरी, मैथिली, मणिपुरी, संथाली, सिंधी, आदि। * चयन के मानदंड: उम्मीदवार आमतौर पर इन मानदंडों पर विचार करते हैं: * रुचि: विषय में वास्तविक रुचि होनी चाहिए ताकि अध्ययन उबाऊ न लगे। * शैक्षणिक पृष्ठभूमि: यदि आपने स्नातक या स्नातकोत्तर स्तर पर विषय का अध्ययन किया है, तो आपको एक फायदा मिलता है। * अध्ययन सामग्री की उपलब्धता: बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाली अध्ययन सामग्री और कोचिंग की उपलब्धता। * अंक प्राप्त करने की प्रवृत्ति: कुछ विषयों में दूसरों की तुलना में अधिक अंक प्राप्त करने की प्रवृत्ति देखी जाती है (हालांकि यह हर साल बदल सकती है)। * सामान्य अध्ययन के साथ ओवरलैप: कुछ विषय (जैसे इतिहास, भूगोल, लोक प्रशासन) सामान्य अध्ययन के पेपरों के साथ काफी हद तक ओवरलैप करते हैं, जिससे तैयारी में मदद मिलती है।2. पेपर पैटर्न और संरचना (Paper Pattern & Structure) * दो पेपर: प्रत्येक वैकल्पिक विषय के दो पेपर होते हैं - पेपर-I और पेपर-II। * प्रत्येक 250 अंक: दोनों पेपर 250-250 अंकों के होते हैं, जिससे कुल 500 अंक हो जाते हैं। * प्रश्नों का प्रकार: प्रश्न सैद्धांतिक, विश्लेषणात्मक और कभी-कभी समस्या-समाधान आधारित होते हैं, जो विषय की गहन समझ का परीक्षण करते हैं। * अनिवार्य और वैकल्पिक प्रश्न: आमतौर पर, प्रत्येक पेपर में कुल 8 प्रश्न होते हैं, जिन्हें दो खंडों में विभाजित किया जाता है। प्रत्येक खंड से कम से कम एक प्रश्न चुनना अनिवार्य होता है। प्रश्न 1 और प्रश्न 5 आमतौर पर अनिवार्य होते हैं। उम्मीदवारों को कुल 5 प्रश्नों के उत्तर देने होते हैं। * शब्द सीमा: प्रत्येक प्रश्न या उसके उप-भाग के लिए विशिष्ट शब्द सीमा निर्धारित होती है।3. पाठ्यक्रम और विषय-वस्तु (Syllabus & Content) * विस्तृत पाठ्यक्रम: प्रत्येक वैकल्पिक विषय का यूपीएससी द्वारा एक विस्तृत और स्पष्ट पाठ्यक्रम प्रदान किया जाता है। यह पाठ्यक्रम एक गाइड के रूप में कार्य करता है और यह बताता है कि विषय के भीतर किन-किन उप-विषयों और अवधारणाओं का अध्ययन करना है। * पेपर-I: आमतौर पर विषय के बुनियादी सिद्धांतों, अवधारणाओं और सैद्धांतिक पहलुओं पर केंद्रित होता है। * पेपर-II: अक्सर विषय के अनुप्रयुक्त (Applied) पहलुओं, वर्तमान विकास, या विशिष्ट संदर्भों (जैसे भारतीय संदर्भ, यदि लागू हो) पर केंद्रित होता है। * उदाहरण के लिए: * इतिहास: पेपर-I प्राचीन और मध्यकालीन भारत पर, जबकि पेपर-II आधुनिक भारत और विश्व इतिहास पर केंद्रित हो सकता है। * लोक प्रशासन: पेपर-I प्रशासनिक सिद्धांत पर, जबकि पेपर-II भारतीय प्रशासन

  7. 3

    यूपीएससी सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के वैकल्पिक विषय (Optional Subject

    SK सोढा इकबाल SK, INDIAN।आप यूपीएससी सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के वैकल्पिक विषय (Optional Subject) वाले पेपर के बारे में जानना चाहते हैं। मैं आपको इसे संक्षिप्त और विस्तृत दोनों रूपों में समझाने की कोशिश करता हूँ, जिससे आपको लगे कि पूरा विषय कवर हो गया है।यूपीएससी वैकल्पिक विषय (Optional Subject) पेपर: एक संक्षिप्त अवलोकनयूपीएससी सिविल सेवा मुख्य परीक्षा में उम्मीदवारों को अपनी पसंद का एक वैकल्पिक विषय चुनना होता है। इस विषय के दो पेपर होते हैं, प्रत्येक 250 अंकों का, कुल 500 अंक। ये अंक अंतिम मेरिट सूची में जोड़े जाते हैं, जिससे वैकल्पिक विषय चयन परीक्षा में सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।वैकल्पिक विषयों की सूची में साहित्य से लेकर विज्ञान, इंजीनियरिंग और सामाजिक विज्ञान तक विभिन्न प्रकार के लगभग 26-28 विषय शामिल होते हैं। उम्मीदवार अपनी रुचि, पृष्ठभूमि, अध्ययन सामग्री की उपलब्धता और विषय के पिछले प्रदर्शन के आधार पर विषय का चुनाव करते हैं।वैकल्पिक विषय का विस्तृत विवरण (Short Form of Discrete with Comprehensive Subject Matter)यूपीएससी के वैकल्पिक विषय को "विस्तार से शॉर्ट फॉर्म ऑफ़ डिस्क्रीट" में समझने के लिए, हम इसे निम्नलिखित बिंदुओं में विभाजित कर सकते हैं:1. विषय का चयन (Subject Selection) * विभिन्न विकल्प: यूपीएससी द्वारा अनुमोदित वैकल्पिक विषयों की एक लंबी सूची है, जिसमें शामिल हैं: * सामाजिक विज्ञान: इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान और अंतर्राष्ट्रीय संबंध, लोक प्रशासन, समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, दर्शनशास्त्र, अर्थशास्त्र। * विज्ञान और इंजीनियरिंग: भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित, वनस्पति विज्ञान, प्राणी विज्ञान, भूविज्ञान, कृषि, पशुपालन और पशु चिकित्सा विज्ञान, सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग। * साहित्य: हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, उर्दू, बंगाली, पंजाबी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, गुजराती, मराठी, ओडिया, नेपाली, डोगरी, मैथिली, मणिपुरी, संथाली, सिंधी, आदि। * चयन के मानदंड: उम्मीदवार आमतौर पर इन मानदंडों पर विचार करते हैं: * रुचि: विषय में वास्तविक रुचि होनी चाहिए ताकि अध्ययन उबाऊ न लगे। * शैक्षणिक पृष्ठभूमि: यदि आपने स्नातक या स्नातकोत्तर स्तर पर विषय का अध्ययन किया है, तो आपको एक फायदा मिलता है। * अध्ययन सामग्री की उपलब्धता: बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाली अध्ययन सामग्री और कोचिंग की उपलब्धता। * अंक प्राप्त करने की प्रवृत्ति: कुछ विषयों में दूसरों की तुलना में अधिक अंक प्राप्त करने की प्रवृत्ति देखी जाती है (हालांकि यह हर साल बदल सकती है)। * सामान्य अध्ययन के साथ ओवरलैप: कुछ विषय (जैसे इतिहास, भूगोल, लोक प्रशासन) सामान्य अध्ययन के पेपरों के साथ काफी हद तक ओवरलैप करते हैं, जिससे तैयारी में मदद मिलती है।2. पेपर पैटर्न और संरचना (Paper Pattern & Structure) * दो पेपर: प्रत्येक वैकल्पिक विषय के दो पेपर होते हैं - पेपर-I और पेपर-II। * प्रत्येक 250 अंक: दोनों पेपर 250-250 अंकों के होते हैं, जिससे कुल 500 अंक हो जाते हैं। * प्रश्नों का प्रकार: प्रश्न सैद्धांतिक, विश्लेषणात्मक और कभी-कभी समस्या-समाधान आधारित होते हैं, जो विषय की गहन समझ का परीक्षण करते हैं। * अनिवार्य और वैकल्पिक प्रश्न: आमतौर पर, प्रत्येक पेपर में कुल 8 प्रश्न होते हैं, जिन्हें दो खंडों में विभाजित किया जाता है। प्रत्येक खंड से कम से कम एक प्रश्न चुनना अनिवार्य होता है। प्रश्न 1 और प्रश्न 5 आमतौर पर अनिवार्य होते हैं। उम्मीदवारों को कुल 5 प्रश्नों के उत्तर देने होते हैं। * शब्द सीमा: प्रत्येक प्रश्न या उसके उप-भाग के लिए विशिष्ट शब्द सीमा निर्धारित होती है।3. पाठ्यक्रम और विषय-वस्तु (Syllabus & Content) * विस्तृत पाठ्यक्रम: प्रत्येक वैकल्पिक विषय का यूपीएससी द्वारा एक विस्तृत और स्पष्ट पाठ्यक्रम प्रदान किया जाता है। यह पाठ्यक्रम एक गाइड के रूप में कार्य करता है और यह बताता है कि विषय के भीतर किन-किन उप-विषयों और अवधारणाओं का अध्ययन करना है। * पेपर-I: आमतौर पर विषय के बुनियादी सिद्धांतों, अवधारणाओं और सैद्धांतिक पहलुओं पर केंद्रित होता है। * पेपर-II: अक्सर विषय के अनुप्रयुक्त (Applied) पहलुओं, वर्तमान विकास, या विशिष्ट संदर्भों (जैसे भारतीय संदर्भ, यदि लागू हो) पर केंद्रित होता है। * उदाहरण के लिए: * इतिहास: पेपर-I प्राचीन और मध्यकालीन भारत पर, जबकि पेपर-II आधुनिक भारत और विश्व इतिहास पर केंद्रित हो सकता है। * लोक प्रशासन: पेपर-I प्रशासनिक सिद्धांत पर, जबकि पेपर-II भारतीय प्रशासन

  8. 2

    (History, Civilization, Culture and Ancient Cities of Uttar Pradesh)

    SK सोढा इकबाल SK, INDIAN हूँ।थीम 1: उत्तर प्रदेश का इतिहास, सभ्यता, संस्कृति और प्राचीन शहर (History, Civilization, Culture and Ancient Cities of Uttar Pradesh)स्टूडेंट, इस थीम में हम उत्तर प्रदेश के जायकेदार और कदीमी इतिहास को इंतेहाई गहराई से जानेंगे। यह जानना क्यों निहायत ज़रूरी है? क्योंकि उत्तर प्रदेश भारतीय तारीख़ का एक मरकज़ी और अहम् मुकाम रहा है। यहाँ से हमें न सिर्फ कदीमी तहज़ीबों जैसे कि सिंधु घाटी की तहज़ीब (जिसके कुछ निशान पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मिलते हैं) और वैदिक काल के पुख्ता सबूत मिलते हैं, बल्कि यह बौद्ध धर्म और जैन धर्म के फलने-फूलने का भी गवाह रहा है। इस ज़मीन पर ही भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया और महापरिनिर्वाण प्राप्त किया, जिससे यह बौद्ध तीर्थयात्रियों का एक अहम मरकज़ बन गया। हम यहाँ की क़दीमी नदियों जैसे गंगा, यमुना, सरयू के किनारे बसी सभ्यताओं की रिवायतों और उनके इंसानी बस्ती पर पड़ने वाले असरात की तफ़सीली चर्चा करेंगे।हम उत्तर प्रदेश की नायाब और मुख्तलिफ तहज़ीब का विस्तार से अध्ययन करेंगे, जिसमें यहाँ की फन (कला), तामीरात (स्थापत्य/आर्किटेक्चर) जो कि मुग़ल और अवधी शैलियों का एक हसीन इम्तेज़ाज है, यहाँ का क्लासिकल और फोक संगीत, मुख्तलिफ नृत्य शैलियाँ जैसे कथक, यहाँ की लोक कलाएँ जैसे चित्रकारी (मसलन, मिर्ज़ापुर की लोक चित्रकलाएँ), और हिंदुस्तानी व अवधी अदब (साहित्य) शामिल हैं। यह समझना निहायत ज़रूरी है कि कैसे मुख्तलिफ कालों में, मसलन मौर्य, गुप्त, सल्तनत, मुग़ल, और ब्रिटिश हुकूमत के दौरान, यहाँ की तहज़ीब ने अपने मुख्तलिफ रंग दिखाए और एक खास पहचान बनाई।हम उत्तर प्रदेश के कुछ क़दीमी और तारीख़ी शहरों पर भी खुसूसी तवज्जो देंगे, जैसे कि: * वाराणसी (काशी): यह दुनिया के सबसे पुराने लगातार आबाद शहरों में से एक है। इसका मजहबी, रूहानी, और तहज़ीबी अहमियत बहुत ज़्यादा है। यहाँ के घाट, मंदिर, और बनारसी सिल्क अपनी अलग पहचान रखते हैं। * प्रयागराज (इलाहाबाद): गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदियों के संगम (त्रिवेणी संगम) पर बसा यह शहर कुंभ मेले का मरकज़ है और इसका सियासी व मजहबी अहमियत भी बड़ी है। * मथुरा: भगवान कृष्ण की जन्मभूमि होने के नाते यह एक बड़ा मजहबी और तीर्थ स्थल है। यहाँ की ब्रज संस्कृति और होली का त्यौहार बहुत मशहूर है। * अयोध्या: भगवान राम की जन्मभूमि होने के नाते यह हिंदुस्तानी मज़हबी इतिहास में एक खास मुकाम रखता है। यहाँ के मंदिर और घाट तारीख़ी अहमियत के हामिल हैं। * लखनऊ: अवध के नवाबों की राजधानी होने के नाते यह शहर अपनी तहज़ीब, अदब, संगीत, और लज़ीज़ खाने के लिए मशहूर है। इसे "नवाबों का शहर" भी कहा जाता है। * आगरा: मुग़ल सल्तनत की राजधानी रहा यह शहर ताजमहल, आगरा फोर्ट और फतेहपुर सीकरी जैसी आलमी तहज़ीबी विरासतों का घर है।एक इंतिज़ामकार के तौर पर, इन शहरों की तारीख़ी पसेमंज़र (historical background) और तहज़ीबी अहमियत को समझना आपको तरक्कीयाती मंसूबों (development plans) को बेहतर तरीके से लागू करने और स्थानीय पहचान व विरासत को बनाए रखने में मदद करेगा। यह आपको पर्यटन को बढ़ावा देने, विरासत स्थलों का संरक्षण करने और स्थानीय लोगों की तहज़ीबी जज़्बात का एहतराम करने में भी मदद करेगा। इन शहरों की पुरानी बनावट, उनकी रिवायतें और वहाँ के लोगों का जीवन-शैली समझना एक कामयाब प्रशासक के लिए बहुत ज़रूरी है।

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    UPSC GS Paper 4 -व्यापक तैयारी(2026-2030)

    UPSC GS Paper 4 - व्यापक तैयारी (2026-2030)(दृश्य: सौम्य पृष्ठभूमि संगीत बजता है। स्क्रीन पर "UPSC CIVIL SERVICES" लोगो दिखाई देता है, फिर मुख्य शीर्षक "UPSC GS Paper 4: Comprehensive Preparation 2026-2030" आता है, जिसके साथ इमेज में दिख रही किताबें, कम्पास और न्याय का तराजू जैसे विजुअल्स जुड़ते जाते हैं।)आवाज (उत्साही, स्पष्ट):नमस्कार, और UPSC सिविल सेवा परीक्षा की अपनी तैयारी यात्रा में आपका स्वागत है!आज हम एक ऐसे विषय पर बात करने जा रहे हैं, जो न केवल इस प्रतिष्ठित परीक्षा को पास करने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि एक जिम्मेदार और प्रभावशाली सिविल सेवक बनने के लिए भी अनिवार्य है। हम बात कर रहे हैं - UPSC सामान्य अध्ययन पेपर 4 की, जिसका विषय है - "नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा और अभिरुचि" (Ethics, Integrity, and Aptitude)।(दृश्य: किताबें खुली हुई दिखाई देती हैं, उन पर फोकस होता है।)यह सिर्फ एक और पेपर नहीं है; यह आपकी सोच, आपके निर्णय लेने की क्षमता और आपके नैतिक मूल्यों का परीक्षण है। सिविल सेवा में प्रवेश के बाद, आपको ऐसे निर्णय लेने होंगे जो लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित करेंगे। ऐसे में, आपकी सत्यनिष्ठा, आपकी ईमानदारी और विषम परिस्थितियों में भी सही का चुनाव करने की आपकी क्षमता ही आपको एक सफल प्रशासक बनाएगी।(दृश्य: कम्पास पर धीरे-धीरे ज़ूम होता है, फिर न्याय के तराजू पर फोकस आता है।)हमारा यह विशेष कार्यक्रम, UPSC GS Paper 4: Comprehensive Preparation 2026-2030, आपको इसी यात्रा के लिए तैयार करने के उद्देश्य से डिज़ाइन किया गया है। 2026 से लेकर 2030 तक की परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए, यह कोर्स आपको नीतिशास्त्र के सिद्धांतों, सिविल सेवा के लिए आवश्यक नैतिक मूल्यों और प्रशासकीय अभिरुचि की गहराई से समझ प्रदान करेगा।(दृश्य: पृष्ठभूमि में सरकारी इमारत (जो इमेज में है) उभर कर सामने आती है।)हमारा लक्ष्य केवल आपको सैद्धांतिक ज्ञान देना नहीं है, बल्कि आपको वास्तविक जीवन की स्थितियों में नैतिक दुविधाओं को समझने और उनका प्रभावी समाधान खोजने में सक्षम बनाना है। इस व्यापक तैयारी में शामिल होंगे: * नीतिशास्त्र और मानवीय अंतरापृष्ठ: मानवीय क्रियाकलापों में नीतिशास्त्र का सार, और उसके निर्धारक व परिणाम। * अभिवृत्ति: इसका कार्य, विचार और आचरण के संबंध में इसका प्रभाव और सिविल सेवाओं के संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता। * भावनात्मक बुद्धिमत्ता: प्रशासन और शासन में इसकी उपयोगिता और अनुप्रयोग। * भारत और विश्व के नैतिक विचारक तथा दार्शनिक: उनके विचारों का अध्ययन और उनके अनुप्रयोग। * लोक प्रशासन में लोक/सिविल सेवा मूल्य और नीतिशास्त्र: सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता, निस्वार्थता, वस्तुनिष्ठता, सहानुभूति, सहिष्णुता, करुणा आदि। * शासन व्यवस्था में ईमानदारी: लोक सेवा की अवधारणा, शासन और ईमानदारी का दार्शनिक आधार। * केस स्टडीज़: वास्तविक जीवन की स्थितियों पर आधारित केस स्टडीज़ के माध्यम से विश्लेषण और निर्णय लेने की क्षमता का विकास।(दृश्य: स्क्रीन पर "Comprhensive Preparation" (सही वर्तनी के साथ "Comprehensive Preparation") और "2026-2030" फिर से आता है।)यह कार्यक्रम केवल परीक्षा उत्तीर्ण करने से कहीं बढ़कर है; यह आपको एक ऐसे भविष्य के लिए तैयार करेगा जहाँ आप राष्ट्र निर्माण में सक्रिय रूप से योगदान दे सकें। हम आपको आवश्यक उपकरण, ज्ञान और अंतर्दृष्टि प्रदान करेंगे ताकि आप न केवल इस महत्वपूर्ण पेपर में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकें, बल्कि एक नैतिक और प्रभावशाली सिविल सेवक के रूप में अपनी भूमिका निभा सकें।तो, यदि आप एक ऐसी तैयारी की तलाश में हैं जो आपको न केवल सफलता दिलाए, बल्कि आपको एक बेहतर नागरिक और प्रशासक भी बनाए, तो हमारा यह UPSC GS Paper 4: Comprehensive Preparation 2026-2030 कार्यक्रम आपके लिए ही है।(दृश्य: स्क्रीन पर संपर्क जानकारी या वेबसाइट का यूआरएल आता है। संगीत ऊपर उठता है और समाप्त होता है।)।

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सबसे पहले तो यह एक ऑडियो से बना हुआ पूरा एल्बम जो जिंदगी की हकीकतको बताता है कि सच में जिंदगी कैसी यह लग्ज़री लाइव और और उसके सामने वालों के बारे में बताता है दरअसल में एक रैपर हूं और मैं यह चाहता हूं मैं जो भी लिखूं उसके पीछे कुछ ना कुछ बड़ी वजह हो जो लोगों केकाम आए उनको एक नजरियादे लोग क्या है कैसेहैं और भी बहुतकुछ

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