PODCAST · history
Padhaku Nitin
by Aaj Tak Radio
Padhaku Nitin is a casual and long conversation-based podcast where Aaj Tak Radio host Nitin talks to experts and discuss a wide range of topics like history, war, politics, policy, ideologies, cinema, travelling, sports, nature and everything that is interesting. A single episode of the show can be as enriching as reading four books. As we say in the podcast,Chaar kitaabe padhne jitna gyaan milega Padhaku Nitin mein.कब कोई हक़ीक़त से मिथक बन जाता है? क्यों कोई कहानी सदियाँ पार करके हमारे सिरहाने आ बैठती है? कुछ नाम तो इंसानों की कलेक्टिव मेमोरी का हमेशा के लिए हिस्सा बन जाते हैं लेकिन पूरी की पूरी सभ्यता चुपचाप कैसे मिट जाती है?भाषा के ग्रामर से मिले कब, क्यों, कैसे, कहां, किसने ऐसे शब्द हैं जो सेंटेंस में जुड़ जाएँ तो सवाल पैदा करते हैं और सवालों के बारे में आइंस्टीन ने कहा था- The important thing is not to stop questioning. पढ़ाकू नितिन ऐसा ही पॉडकास्ट है जिसमें किसी टॉपिक का रेशा रेशा खुलने तक हम सवाल पूछने से थकते नहीं.
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Photojournalist Raghu Rai के जूनून, डिटेल्ड फोटोग्राफ़ी और सूफ़ीपन के अद्भुत किस्से! : Padhaku Nitin
आसमान के पार भी शायद कोई आसमान होगा। जो लोग इस जहान से रुख़सत पा जाते हैं, शायद वहाँ ठौर पाते होंगे। लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो जाते-जाते ऐसी ख़ला छोड़ जाते हैं, जिसे भरने का कोई रास्ता समझ में नहीं आता। कुछ दिन पहले दुनिया ने एक ऐसी ही ख़ला महसूस की, जब मशहूर फ़ोटोग्राफ़र रघु राय ने दुनिया को अलविदा कहा। वही रघु राय, जिनकी तस्वीरों को अगर कोई chronological order में लगाए, तो आज़ादी से आज तक के सालों की सिलसिलेवार तस्वीर देख सकता है। इतना इतिहास, इतना charm है उनमें। इस यात्रा के बारे में हमने उनसे एक बार पहले Padhaku Nitin में बात की थी—वो भी सुनिएगा। ये एपिसोड रघु राय को ही tribute है—Padhaku Nitin की तरफ़ से भी और हमारे आज के मेहमान की तरफ़ से भी। मेरे साथ हैं India Today Group के Photo Editor, Bandeep Singh। Bandeep जी इंडस्ट्री के सबसे प्रतिष्ठित photojournalists में से एक हैं। एक photojournalist के craft पर बात करने के लिए, दूसरे photojournalist से बेहतर कौन होगा? और बंदीप जी और रघु राय के बीच कई connections और समानताएँ भी हैं। एपिसोड अंत तक देखिएगा। प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: अमन पाल
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Aarushi Talvar, Sushant Singh Rajput, Nirbhaya Case के अपराधियों का दिमाग कैसे पढ़ा गया?
Crime and Punishment. यूं तो कहने को ये दोस्तोवेस्की के उपन्यास का नाम भी है. लेकिन Crime and punishment समाज का एक नंगा सच है. इन्हीं दोनों के बीच एक पूरा Penal System revolve करता है. Justice System revolve करता है. जिसके लिए बहुत ज़रूरी है Crime और Criminal की सोच और Behavior को समझना. Forensic Psychology यही करती है कुछ टूल्स के सहारे. जिनके बारे में सुनने को मिलता है Narco Test, Lie Detector, Brain Mapping. अब इनका मकसद एक हो सकता है- क्राइम सॉल्व करना. लेकिन इनके इर्द गिर्द अब भी कई Confusion है. तो आज एक Forensic Psychologist के ज़रिए एक Criminal के दिमाग में उतरते हैं. वो कैसे सोचता है. कैसे काम करता है. क्या क्राइम होने से पहले Criminal mind को identify किया जा सकता है? Padhaku Nitin के इस एपिसोड में हमारे साथ हैं Dr. Divya Dubey. Forensic Psychologist हैं. Op Jindal University में इसी Subject की Professor भी हैं. तिहाड़ से लेकर साबरमती जेल में जाती है Criminals की Counselling भी करती हैं.
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Surgical Strike से भी बड़ा ऑपरेशन, लेकिन सरकार ने आपसे क्यों छुपाया? : पढ़ाकू नितिन
जासूस, जासूसी ऑपरेशंस, ISI RAW CIA KGB MOSSAD. जबसे धुरंधर आई है जनता को एक बार फिर से Covert Operation की दुनिया में रस आने लगा है. आना Logical भी है, बात राज़ की हो तो उसे जानने की उत्सुकता भी उतनी ही होती है. आज के एपिसोड में बात करेंगे एक Covert Operation की. और कोई ऐसे वैसे नहीं India के सबसे बड़े Covert Operation की, जिसे अंजाम दिया Special Forces ने. पहले बता दूं कि ये ऑपरेशन Surgical Strike से भी बड़ा था. लेकिन आज भी इसकी बात नहीं होती. क्यों नहीं होती? क्यों इतने बड़े ऑपरेशन पर किसी ने बात नहीं की. क्या था ये ऑपरेशन? यही कहानी कहती है ये किताब Operation X. लिखने वाले यूं तो इस किताब के दो हैं, Captain MNR Samant और Senior Defence Journalist Sandeep Unnithan. लेकिन आज Captain साहब हमारे साथ नहीं है. 2019 में किताब आने के कुछ हफ़्तों पहले उनका निधन हुआ. हमारे साथ हैं Defence Journalist, Sandeep Unnithan. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: सूरज सिंह
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90 के दशक ने कैसे बदल दिया Indian Pop Culture का जुगराफिया! : Padhaku Nitin Podcast
Gangs of Wasseypur का एक बहुचर्चित सीन है. जिसमें रामाधीर सिंह जी इस बात का वर्णन करते हैं कि सिनेमा का समाज से रिश्ता क्या है? और आप भी जानते ही हैं. चाहे पापा की दी हुई घुड़की पर तड़कता भड़कता दिलीप कुमारनुमा कमबैक देना हो, या गर्लफ्रेंड की आंखों की तारीफ़ करके रिश्ते मधुर बनाने हों. Filmein और अगर आयाम को थोड़ा बड़ा करें तो पॉप कल्चर इसमें हमेशा काम आया है. इस बात को तो आप भी चलते फिरते कह ही देते हैं हम लोग. लेकिन आज पढ़ाकू नितिन के इस एपिसोड में 90s के दशक पर बात करेंगे. समझेंगे कि जब दुनिया और देश में इतना कुछ बदल रहा था. तभी म्यूज़िक सिनेमा टीवी शोज़ और Ads इतने क्यों बदले? 90s के वो गाने इतने पसंद क्यों आते हैं? Late 90s के Rock Bands, Indie Bands आज भी इतने अचानक से रील्स पर क्यों चल निकलते हैं? क्या इस बड़े रिव्ल्यूशन के पीछे एक बड़ा कारण इकॉनमी और पॉलिटिक्स भी है? और इसका राज़ भी खोलेंगे कि 90s के गानों को रिमिक्स करके आदित्य धर जैसे फिल्म मेकर्स क्यों इस्तेमाल करते हैं? आपको पता चलेगा कि इसकी भी पॉलिटिक्स है! हमारे साथ हैं प्रॉफेसर, हिस्टोरियन, पॉप कल्चर Enthusiast Arup Chatterjee. फिलहाल OP Jindal University में पढ़ाते हैं. प्रतिष्ठित अखबारों के लिए बड़े इंट्रेस्टिंग आर्टिकल्स लिखते हैं. 3 किताबें लिख चुके हैं. सुनिए पूरा एपिसोड
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Asli Dhurandhar के किस्से, RAW का भौकाल और Unknown Men के Open Secrets! : Padhaku Nitin
मार्च 2026 के आख़िरी हफ़्ते में एक ख़बर आई—पाकिस्तान के बहावलपुर में एक व्यक्ति मारा गया। यह था जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक और 2001 के संसद हमले के मास्टरमाइंड मसूद अज़हर का बड़ा भाई, मोहम्मद ताहिर अनवर। अब ध्यान खींचने वाली बात क्या थी? किसने मारा—नहीं पता। कैसे मारा—नहीं पता। यही एक पैटर्न सा बनता दिख रहा है। पिछले 5-6 सालों में भारत की धरती पर आतंक फैलाने का इरादा रखने वाले कई पाकिस्तानी और खालिस्तानी आतंकियों को अलग-अलग मौकों पर इसी तरह मौत के घाट उतारा गया है। किसने मारा—नहीं पता। और फिर एक शब्द सामने आता है—“Unknown Men।” पाकिस्तान आरोप लगाता है कि ये RAW के लोग हैं, लेकिन RAW इन आरोपों को तवज्जो ही नहीं देता। अगर आपने धुरंधर 2 देखी है, तो उसमें भी इस तरह के ऑपरेशंस का इशारा मिलता है। लेकिन धुरंधर 2 तो एक फिल्म है… असल में क्या हो रहा है? क्या R&AW जैसी एजेंसियां वाकई ऐसे ऑपरेशंस को अंजाम देती हैं? CIA और ISI जैसी एजेंसियों पर भी ऐसे आरोप लगते रहे हैं। तो सोचा, जासूसी की इस दुनिया में थोड़ा गहराई से उतरते हैं—RAW की वर्किंग को समझते हैं, केस स्टडीज़ के ज़रिए, पुराने उदाहरणों के ज़रिए। और इसलिए आज हमारे साथ हैं इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट Abhinandan Mishra। ये पहले नेवल ऑफिसर रह चुके हैं, नॉवेल लिख चुके हैं, बैंक PO भी रहे हैं और वकालत की पढ़ाई भी की है। लेकिन सबसे खास बात—इन्होंने इंटेलिजेंस एजेंसियों की कार्रवाई पर विस्तार से लिखा है। इनसे पूछेंगे सारे सवाल। जानेंगे सब। क्योंकि ये है Padhaku Nitin—जहां हम मानते हैं, लाइफ़ है छोटी… जानना सब है। प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: रोहन भारती
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Bishnoi समाज का लंबा संघर्ष, Salman Khan Black Buck Case और Pakistan में ग़ायब होते काले हिरण! : पढ़ाकू नितिन
भारत एक ऐसा देश है. जहां तीन कोस में भाषा और पानी ही नहीं. कहानियां भी बदल जाती हैं. क्योंकि हर गांव की अपनी एक लेगसी है. हर गांव के अपने हीरोज़. लेकिन हरियाणा और राजस्थान के कुछ गांवों की विशेषता ही यही है कि वहां रहने वाले लोग जानवरों और प्रकृति से इतना प्रेम करते हैं कि उनके लिए अपनी जान तक दे सकते हैं. ये समाज ही बिश्ननोई समाज के नाम से जाता है, जिनके लिए प्रकृति एक धर्म है. पढ़ाकू नितिन के इस एपिसोड में हमारी मेहमान इसी समाज पर गहरी रिसर्च कर चुकीं एडवोकेट अनु लाल है. हाल ही में उनकी किताब आई “Bishnoi and the blackbuck” नाम से तो हमने सोचा इसी मुद्दे पर उनसे खुल के बात की जाए. रेशा रेशा खोला जाए. वही किया है, एपिसोड पूरा देखिएगा सुनिएगा. क्योंकि ज़िंदगी छोटी सी है जानना सब है. शुरुआत यहीं से कीजिए.
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Bestselling Crime Author ने खोल दी Dhurandhar 2 की पोल!: पढ़ाकू नितिन
सोशल मीडिया पर Dhurandhar 2 का बहुत शोर है. कोई गानों की तारीफ़ कर रहा है. कोई एक्टर्स की. कोई कहानी की. लेकिन ये पॉडकास्ट कोई फिल्म रिव्यू नहीं है. क्योंकि Padhaku Nitin के इस एपिसोड में हमने की है फिल्म के किरदारों की बात. फिल्म में कई किरदार हैं, जो या तो सच्चे किरदारों से inspired हैं. जैसे राकेश बेदी द्वारा निभाया गया जमील जमाली का किरदार या फिर वो सच्चे किरदार ही हैं जैसे रहमान बलोच, SP Aslam Chaudhary. लेकिन अब क्योंकि फिल्म में क्या सही है, क्या फिक्शन इसकी Lines Blurred हैं. तो हमने सोचा इस Line को थोड़ा क्लियर किया जाए. बताया जाए कि इन किरदारों की असल कहानी क्या है? किस हद तक ये Inspired हैं? हमारे मेहमान है Senior Journalist और अब तो Bestselling Author भी अनिरुध्य मित्रा. सालों साल से अंडरवर्ल्ड पर रिसर्च करते हैं. सिर्फ़ भारत के ही नहीं, पाकिस्तान के भी. Covert Operation, Intelligence Agencies पर पढ़ना लिखना आपका शौक़ पैशन और प्रोफेशन भी है. और मज़ेदार बात ये है इनकी किताब Delhi Directives का थीम भी Dhurandhar से कई जगह तो हूबहू मिलता है. कैसे मिलता है ये भी पूछा. बाकि पॉडकास्ट Dhurandhar स्पेशल है ही, चिंता मत कीजिए Spoilers नहीं दिए हैं. एपिसोड पूरा सुनिएगा और शेयर भी कीजिएगा
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Overtime, WFH से लेकर POSH और Maternity Leave तक कैसे सुलझाएं Office के सारे पंगे? : पढ़ाकू नितिन
Toxic Work Culture... ये शब्द हम रोज़ सुनते हैं, मीम्स में देखते हैं, दोस्तों की शाम की रैंट में सुनते हैं. लेकिन Legally इसका मतलब क्या है? और सबसे ज़रूरी, आप इससे बच कैसे सकते हैं?वकील रावी बीरबल से हमने पूछे आपके मन के सारे सवालToxic Work Culture की Legal Definition क्या है?70 घंटे काम करवाना Legal है या नहीं?बॉस चिल्लाए तो Employee के क्या Rights हैं?POSH Act असल में काम कैसे करता है?Overwork, Harassment, और Hostile Environment Law की नज़र में कहाँ खड़े हैं ये?प्रड्यूसर: मानव देव रावतसाउंड मिक्स: सूरज सिंह
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हेलो बच्चों, गैंग्स ऑफ़ वासेपुर और छावा के क्या किस्से बता गए एक्टर विनीत सिंह! : पढ़ाकू नितिन
Padhaku Nitin के इस एपिसोड में हमारे मेहमान हैं मुक्काबाज़, राइटर और दिल से एक्टर Vineet Kumar Singh. आपने उन्हें कई फिल्मों में देखा ही होगा. कभी गैंग्स ऑफ़ वसेपुर के छरहरे दानिश ख़ान. कभी Ugly Film में Police Station में रिपोर्ट लिखवाने ऐसे पहुंचे घबराए हुए Casting Director के तौर पर. कभी Boxer जैसी कड़ी बॉडी लिए मुक्काबाज़ के श्रवण बने. कभी हाथ में पन्ने लेकर SuperBoys of Malegaon में चिल्लाते दिखे ‘Writer सबका बाप होता है’. छावा में जब संभाजी से संवाद किया तो लोगों की आंखें भरी. और इनका सबसे लेटेस्ट काम आपको देखने को मिलेगा. Netflix पर आई वेब सीरीज़ Hello Bachhon में. Vineet इस सीरीज़ में Physicswallah के CEO और Star Teacher Alakh Pandey का किरदार निभा रहे हैं. ये पॉडकास्ट पूरा सुनिएगा और हां, उसके बाद Netflix पर जाकर Hello Bacchon भी देखिएगा. दोनों में मज़ा आना पक्का है. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: रोहन भारती
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हिमंता बिस्व सरमा की परेशानी, कांग्रेस की चार्जशीट और असम की मियां प्रॉब्लम: पढ़ाकू नितिन
हमने कुछ महीने पहले ज़ुबिन गर्ग पर एक लंबी चौड़ा पॉडकास्ट किया था. उनके गानों की चर्चा हुई, उनके किस्से सुने हमने लेकिन जाते जाते हमारे गेस्ट ने एक बात कही- जब 2026 में असम चुनाव होगा तो ज़ुबिन गर्ग एक बड़ा मुद्दा साबित होगा. असम चुनाव का ऐलान हो चुका है. पार्टियों ने ज़मीन पर उतर कर जनता की सुध लेनी शुरू कर दी है. Screening Committees अब चुनावी चेहरों पर मंथन करना शुरू कर चुकी हैं. Strategies बन चुकी हैं. तो हमने सोचा कि Pre-Chunav माहौल में एक ऐसा पॉडकास्ट तो कर ही लिया जाए. जिससे कि हमारे देखने सुनने वालों को पता तो चले कि असम चुनाव इतना ख़ास है क्यों? हिंदी भाषी ऑडियंस को इस बात का अंदाज़ा तो हो कि दरअसल असम के मुद्दे क्या हैं? वहां बड़ी बड़ी पार्टियां कौनसी हैं? बड़े चेहरे कौनसे हैं?Padhaku Nitin का ये एपिसोड Assam पर ही. और मेहमान हैं Kaushik Deka, India Today North East के एडिटर हैं. India Today Magazine के Managing Editor हैं. इस बात को कहने में कोई दो राए नहीं है कि असम पर इनसे ज़्यादा बेहतर एक्सपर्ट आपको नहीं मिल सकता, क्योंकि Experience और Insight दोनों तगड़े हैं इनके. एपिसोड पूरा सुनिएगा. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: रोहन भारती
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आपकी ज़िंदगी से 8 साल खा रहे प्रदूषण को कौन रोक नहीं रहा? : पढ़ाकू नितिन
देश के कोने कोने से आवाज़ें आ रहीं हैं. AQI डबल से ट्रिपल डिजिट हुआ जा रहा है इसका ख़्याल कीजिए. हवा में जो ज़हर घुलता जा रहा है इसका ख़्याल कीजिए. क्योंकि WHO के आंकड़े ऐसा बताते हैं कि दुनिया की 99% जनता, Air Pollution के सीधे ख़तरों से प्रभावित है. न उनका दिल सुरक्षित है, न दिमाग और न फेंफड़े. अब जब बात इतनी गंभीर है, तो इस पर बात होना भी Urgent हो जाता है. तो याद रखिए, Padhaku Nitin का ये एपिसोड सिर्फ़ इंट्रेस्टिंग ही नहीं बेहद Urgent भी है. आज बात करेंगे की Air Pollution की समस्या को Solve करने में हम कहां पीछे रह रहे हैं? क्या Policy Making की कमी है? या क्या हम इस प्रॉबल्म को Misjudge कर रहे हैं? क्या Pollution के चलते सिर्फ़ हमारी Society ही नहीं, Economy भी धीमे धीमे नुकसान उठा रही है? फोकस दिल्ली पर भी करेंगे. पूछेंगे कि क्या AQI को टेंप्रेचर का स्केल बता देना या पानी छिड़क देना Monitoring Scales के आसपास. किसी भी तरह से Pollution को मिटाने के लिए कोई वैज्ञानिक तरीका है? यही पूछा है इस एपिसोड में जाने माने Environmentalist Chandra Bhushan जी से. पिछले दो दशकों से ये लगातार Environment से जुड़े मुद्दों पर गहरी रिसर्च करते हैं, करवाते हैं. Panels का हिस्सा होते हैं और उस चर्चा से और भी आगे बढ़कर चीज़ें समझाते हैं जहां Air Pollution की चर्चा दिल्ली की गाड़ियों से शुरू होती है. iForest (International Forum for Environment, Sustainability और Technology) नाम की प्रतिष्ठित संस्था के CEO भी हैं. एपिसोड पूरा सुनिएगा. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: अमन पाल
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Dhurandhar, Kashmir Files और Kerala Story जैसी फिल्में नहीं बननी चाहिए? : पढ़ाकू नितिन
सिनेमा सिर्फ़ मनोरंजन ही नहीं, किसी समाज को, उसकी जड़ों और उसके culture को समझने का एक रास्ता भी है. सिनेमा के अंदर वह ताकत है कि आप 2026 में किसी थिएटर में बैठकर The Godfather देखें, तो मुमकिन है आपको लगे कि World War II अभी-अभी खत्म हुआ है. उसी थिएटर में बैठकर Interstellar देखें, तो महसूस हो कि दुनिया खत्म होने के कगार पर है. और अगर ओए लक्की! लक्की ओए! देखें, तो समझ आए कि दिल्लीवालों की complexities क्या हैं. Cinema एक subjective माध्यम भी है. दो अलग-अलग लोग एक ही फिल्म को अलग नजरिए से देख सकते हैं और इस पर बहस कर सकते हैं कि क्या वह फिल्म किसी propaganda का हिस्सा है या सच्चाई दिखाती है. आपने धुरंधर, छावा और The Kashmir Files को लेकर हुए बवाल भी देखे होंगे. क्योंकि आजकल फिल्मों पर propaganda cinema होने के आरोप पहले से ज़्यादा लगने लगे हैं. Padhaku Nitin के इस एपिसोड में फिल्म journalist Mihir Pandya और documentary filmmaker Eshan Sharma के साथ इसी मुद्दे को टटोलेंगे. ये सिनेमा को पढ़ते भी हैं और पढ़ाते भी हैं, एक अलग नजरिए के साथ. इन्होंने हाल ही में propaganda cinema पर एक workshop भी की है. इसलिए आज हम इन्हीं से समझेंगे कि propaganda cinema आखिर होता क्या है. क्या propaganda-less cinema जैसी कोई चीज होती भी है. क्या सिनेमा सिर्फ एक छलावा है. क्या cinema की अपनी politics होती है, और क्या politics के बिना cinema संभव है. अंत तक बने रहिएगा. चैनल Subscribe करना भी न भूलिएगा. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: अमन पाल
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भारत क्यों नहीं बन पा रहा विश्वगुरु? Economist ने किया पर्दाफाश : पढ़ाकू नितिन
फरवरी 2026 आ चुका है. साथ ही आ चुका है इस साल का बजट भी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कल लोकसभा में Union Budget 2026 पेश किया. 83 मिनट का भाषण दिया. कई ऐलान किए. और अब हर साल की तरह बजट पर प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं. सरकार बजट के फायदे गिना रही है. विपक्ष नुकसान. प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि इस साल बजट हमारे युवाओं के सपनों का बिंब है और नेता प्रतिपक्ष कह रहे हैं कि युवा और किसान परेशान है और बजट ज़रूरी मुद्दों को एड्रेस नहीं कर रहा. Experts समझाने में जुटे हैं कि भारी Economic Terms में लबरेज़ बजट. आपके हमारे लिए क्या समेटे हुए है? तो चलिए हम भी एक ऐसे ही Expert की शरण लेते हैं जो हमको समझाएं कि क्या वाकई इस साल का बजट थोड़ा बोरिंग है, जैसा कि सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं हैं. या फिर कुछ ऐसे Undertones समेटे हुए है जो फिलहाल हमें समझ नहीं आ रहे लेकिन समझना ज़रूरी है. हमारे साथ है हमारे पुराने मेहमान Economist Arun Kumar जी. Yale, Columbia University जैसी Universities में Lectures दे चुके हैं. दुनियाभर में बुलाए जाते हैं. JNU में 30 साल इकॉनमिक्स पढ़ा चुके हैं. खासियत ये है इनकी कि आसान भाषा में सब समझाकर चौंका देते हैं. गुरुवार आने वाला पढ़ाकू नितिन का एपिसोड इस बार आपके लिए सोमवार ही ले आए हैं. पूरा देखिएगा और प्यार दीजिएगा. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: सूरज सिंह
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Neeraj Chopra, Bajrang Punia, Rahgir जहां पढ़े उस LPU का ये सच नहीं जानते होंगे आप? : पढ़ाकू नितिन
पढ़ाकू नितिन में ऐसा कम होता है जब हम स्टूडियो से बाहर निकलते हों. लेकिन इस बार हम सिर्फ़ स्टूडियो से ही नहीं शहर, यहां तक की राज्य से भी बाहर आ गए हैं. पढ़ाकू नितिन की टीम पहुंच गई है पंजाब के जालंधर. इस एपिसोड में हम घूमे जालंधर की मशहूर Lovely Professional University में. 150 से ज़्यादा कोर्सेज़, 35 हज़ार से ज़्यादा स्टूडेंट्स—Agriculture, Robotics, Management, Technology, Liberal Arts, Law और न जाने कितने ऐसे कोर्सेज़। दिमाग में सवाल आया कि आख़िर इतनी बड़ी यूनिवर्सिटी चलती कैसे है? स्कूली शिक्षा की खामियों की बात तो हम अक्सर सुनते रहते हैं, लेकिन यूनिवर्सिटी लेवल पर ये मामला कैसा है? यूनिवर्सिटीज़ करोड़ों के प्लेसमेंट्स कैसे करवाती हैं? एक वर्ल्ड-क्लास यूनिवर्सिटी कैसी होती है? क्या भारत में कोई वर्ल्ड-क्लास यूनिवर्सिटी है? और ये भी कि जब एक ही कैंपस में 40 से ज़्यादा देशों के स्टूडेंट्स पढ़ते हों, अलग-अलग राज्यों से, अलग-अलग पृष्ठभूमि से लोग आते हों—तो इतना सब कुछ मैनेज कैसे होता है? ये सारे सवाल हमने पूछे अपनी LPU की Pro-VC, Mrs. Rashmi Mittal से। प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: रोहन भारती
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दिल्ली, मुंबई, नोएडा और गुरुग्राम जैसे महानगरों का भट्टा कैसे बैठ गया?: पढ़ाकू नितिन
जीने का हक़ सभी को है, ये तो हमारा संविधान भी कहता है. लेकिन बार-बार इसका उल्लंघन होना हमें सवाल पूछने मजबूर करता है. कुछ ही दिन पहले, नोएडा के सोफ़्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता एक हादसे का शिकार हो गए, ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में उनकी कार पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी. और ये सिर्फ़ एक घटना नहीं, रिकॉर्ड्स बताते हैं कि 2004 से 2015 के बीच क़रीब ऐसे 40 लाख मामले देखने को मिले हैं. ये आंकड़े हालात का अंदाज़ा तो देते हैं, लेकिन असलियत इससे कहीं ज़्यादा गहरी है. ‘पढ़ाकू नितिन’ के इस एपिसोड में हमारे मेहमान हैं केटी रवींद्रन, School of Planning and Architecture में Urban Design Department के डीन. उनसे हमने पूछा कि क्या हम अपने शहरों को अब तक Flawless क्यों नहीं बना पाए? क्यों Bangalore का Traffic अब भी बदनाम है? क्यों Monsoon आते ही बार बार ये डर सताता है कि पार्किंग में खड़ी गाड़ी डूब न जाए? पिछले साल Old Rajinder Nagar के Basement का मामला भी आपको याद होगा. तो सोचा क्यों न एक Expert से समझा जाए कि आखिर ये शहर बसाए कैसे जाते हैं? क्या इन्हें बसाते वक्त ऐसे Sustainable Methods के बारे में नहीं सोचा जाता कि Traffic न लगे. जानेंगे Noida, Gurugram, Delhi, Chandigarh, Bangalore, London, New York, Paris किस तरह से Urban Planning के लिहाज़ से शानदार या Flawed हैं. सुनिए पूरा पॉडकास्ट और हां, लाइक शेयर Subscribe करना न भूलिए प्रड्यूस: मानव और माज़ साउंड मिक्सिंग: अमन पाल
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Rail neer के नाम पर scam, IRCTC का सच और Train में किन्नरों-TT ख़ौफ़! : पढ़ाकू नितिन
न जाने कितनी ही बॉलीवुड फिल्मों के क्लाइमेक्स सीन और न जाने कितने ही भारतीयों के आम जीवन का हिस्सा रही है यह रेल. भारतीय मिडिल क्लास की यादों का एक बड़ा हिस्सा रेलवे से जुड़ा है. लेकिन रेलवे की यात्राओं को रोमांटिसाइज़ करना जितना ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी यह समझना भी है कि रेलवे, कई दूसरी सरकारी संस्थाओं की तरह, अव्यवस्था से अछूता नहीं रहा है. रेलवे के मुताबिक, पिछले पांच सालों में खाने से जुड़ी 19,000 से ज़्यादा शिकायतें दर्ज हुई हैं. 2021–22 में शिकायतें करीब 1,000 थीं, 2023–24 में यह संख्या 7,000 के पार पहुंच गई और 2024–25 में 6,000 से ज्यादा हो गई. ये आंकड़े हालात का अंदाज़ा तो देते हैं, लेकिन हकीकत इससे कहीं ज़्यादा गहरी है. ‘पढ़ाकू नितिन’ के इस एपिसोड में हमारे साथ एक ऐसे व्लॉगर हैं, जो इसी हकीकत को लगातार सामने लाते रहते हैं. वे ट्रेनों में सफर करते हैं, छोटी हो या लंबी दूरी, हर यात्रा में. जहां 14 रुपये की पानी की बोतल 20 में बेची जाती है, वहां सवाल उठाते हैं. महंगा खाना बेचा जाता है, तो शिकायत दर्ज कराते हैं. इस दौरान होने वाली झड़पों को भी वे बेहद सहजता से संभालते हैं. इनका नाम है शाहनवाज़. सोशल मीडिया पर ये “पीटर क्लिप्स” के नाम से मशहूर हैं. आपने इनकी रील्स और वीडियो ज़रूर देखी होंगी. आज देखिए इनका पहला पॉडकास्ट, जहां हमने रेलवे में भ्रष्टाचार, यात्रियों की परेशानियों और उनकी आंखों देखी अव्यवस्थाओं पर खुलकर बातचीत की है. प्रड्यूसर : मानव देव रावत साउंड मिक्सिंग: अमन पाल
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Mohit Chauhan Rockstar, Silk Route, Singer KK के कौन-से राज़ खोल गए? : पढ़ाकू नितिन
Nostalgia किसी Time Machine की तरह होता है न? एक बार हिट किया नहीं कि आप पहुंच जाते हैं एक दूसरे Time-Space में. Music अक्सर इस तरह के Nostalgias के लिए Trigger साबित होता है. जो आपको 2026 में बैठे बैठे भी कई दशकों पहले की यात्रा मिनटों में करवा लाता है. तो चलिए आपको उस दौर में ले चलते हैं, Mid 1990s. जब Indie Pop किसी ठंडी हवा के झोंके की तरह Audience के कानों को कुछ शानदार Earworms दे रहा था. कुछ नए Bands, नए Sounds, नए Styles जो आज भी लोगों को याद हैं. आज हमारे साथ एक ऐसे ही Artist हैं जिन्होंने शुरूआत Popularity Indie Pop के दौर में पाई लेकिन फिर Bollywood में आकर भी खूब धूम मचाई. ये वही आर्टिस्ट हैं, जिन्होंने जो छुआ उसे सोना बना दिया. चाहे Silk Route के गाने हों, Rockstar की Album या Singles. इन्होंने कभी निराश नहीं किया. हमारे साथ हैं Playback Singer और Musician Mohit Chauhan. जिनका नया गाना सिर्फ़ सुरीला ही नहीं है, Social Cause के लिए Contributor भी है. पॉडकास्ट पूरा सुनिएगा. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: अमन पाल
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Ram Mandir से जुड़े कौनसे राज़ खोल गए रामलला के वकील?
दिसंबर सुनते ही दिमाग में क्या आता है? साल का आखिरी महीना. मगर पिछले एक ऐसी किताब आई जिसे पढ़कर, दिसंबर एक और कारण से याद आएगा. कारण है राम जन्मभूमि विवाद का. जब आप इस विवाद की टाइमलाइन देखेंगे तो आपको पैटर्न नज़र आएगा कि इस विवाद से जुड़े लगभग सारे बड़े घटनाक्रम दिसंबर में ही घटे फिर चाहे इस मामले में पहला मुकदमा दर्ज होना हो… या बाबरी मस्जिद का गिरना. और इसी दिसंबर में हम बात करने जा रहे हैं रामजन्मभूमि विवाद पर. वो भी उनसे जो Literally ‘भगवान के वकील’ रहे हैं. हमारे साथ हैं आज दो वकील, अनिरुद्ध शर्मा और श्रीधर पोटराजू. आपको 2019 का रामजन्मभूमि केस याद है न? इस केस में राल लला विराजमान को रिप्रेज़ेंट करने वालों में ये दोनों शामिल थे. इन दोनों ने हाल ही में मिलकर एक किताब लिखी जिसका नाम है Case for Ram. ये किताब दरअसल उस मुकदमे के पीछे की कहानी है. ये किताब सुप्रीम कोर्ट में हुई बहसों को समेटे हुए है. ये किताब समेटे हुए है उन तैयारियों की तफसील जो सुप्रीम कोर्ट में एक केस लड़ने के लिए की जाती है. भयंकर डिटेलिंग के भरा हुई किताब है, उतना ही डीटेल्ड ये पॉडकास्ट भी है. पूरा सुनिएगा
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1971 India Pakistan War के Nail-Biting Secret और Bangladesh की आज़ादी में Condom कैसे बना हथियार? : पढ़ाकू नितिन
बांग्लादेश. कभी ये नाम सुनकर ऐसा लगता था जैसे कोई ऐसा पड़ोसी है जिसके यहां से आदान प्रदान चलता रहता है. तभी आपके यहां खीर ज़्यादा बनी तो वहां पहुंचा दी, उधर से पराठे ज़्यादा बने तो इधर आ गए. ऐसा नज़दीकी रिश्ता. कारण था बांग्लादेश के बनने में जो सहायता भारत ने की थी. पिछले दो सालों में इसी पड़ोसी ने आंतरिक तौर पर काफ़ी उथल पुथल देखी. बांग्लादेश के राष्ट्रपिता कहे जाने वाले बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान की मूर्तियां वहीं के लोगों ने गिराई. उनकी बेटी और बांग्लादेश की तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख़ हसीना को वहां से तुरंत भागना पड़ा. भारत ने उन्हें अपने यहां शरण भी दी. मगर भारत-बांग्लादेश का ऐसा रिश्ता आखिर बना कैसे? 1971 में हुआ क्या था? ईस्ट पाकिस्तान से बांग्लादेश तक का सफ़र तय करने में ऐसे कौन कौन से पड़ाव थे जिनके बारे में दुनिया को पता ही नहीं है? और जब ये हो रहा था तो दुनिया भर में क्या घट रहा था? इसी सवाल को Address करती है Iqbal Chand Malhotra और Subroto Chattopadhyay की क़िताब Bangladesh: Humiliation, Carnage, Liberation, Chaos. और किताब के दोनों लेखक हैं हमारे मेहमान. मिलेंगे सारे सवालों के जवाब. सुनिएगा पूरा एपिसोड प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: रोहन भारती
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Dhurandhar की सच्चाई, Kashmir में ISI का Jihad Game और Kashmir में Hybrid आतंकियों का ख़ौफ़! : पढ़ाकू नितिन
कश्मीर के इतिहास से आप और हम अनभिज्ञ तो नहीं हैं। हम उसकी ख़ूबसूरती, उसके कल्चर से जिस तरह वाक़िफ़ हैं, उसके सबसे बड़े दुर्भाग्य से भी उसी तरह वाक़िफ़ हैं। और उसका दुर्भाग्य यह है कि वह पाकिस्तान की शाह-रग है। उसका प्लेग्राउंड है। वह प्लेग्राउंड जहाँ पाकिस्तान अपनी उन ख़ुराफ़ातों को अंजाम देता है, जिससे भारत को प्रेशराइज़ किया जा सके। लिहाज़ा, कश्मीर से आने वाली छोटी-से-छोटी ख़बर भी एक प्रायोरिटी बन जाती है। हाल ही में हमारे हाथ एक किताब लगी. यह किताब कश्मीर की बिगड़ी हुई तहरीर की कहानी सुनाती है। कहानी सुनाती है उस जिहाद गेम की, जो पाकिस्तानी इंटेलिजेंस एजेंसी ISI कई सालों तक कश्मीर में खेलती रही है। यह किताब आपको ले चलती है पाकिस्तान के डार्क वॉर के बीचों-बीच। किताब का नाम है The Jihad Game और लेखक हैं Abhinav Pandya। अभिनव पांडेय कश्मीर में कई वर्षों तक रहकर काउंटर-इंसर्जेंसी पर ग्राउंड रिसर्च कर चुके हैं। जम्मू-कश्मीर में टेररिज़्म और काउंटर टेररिज़्म पर ही उनकी Ph.D. भी है। पढ़ाकू नितिन के एपिसोड में हम उनकी इसी किताब पर बात करेंगे। समझेंगे कि आखिर पाकिस्तान किस तरह लश्कर, जैश और हिज़्बुल जैसे संगठनों के ज़रिए सालों-साल कश्मीर में ऑपरेट करता रहा है? और सबसे अहम — यह भी समझेंगे कि किस तरह ये संगठन कश्मीर के यूथ को Radicalize करते हैं? प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: अमन पाल
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बांग्लादेश कैसे बना - Indian Intelligence का प्लान, भुट्टो की थेथरई या Left का ऑपरेशन? : पढ़ाकू नितिन
बांग्लादेश. कभी ये नाम सुनकर ऐसा लगता था जैसे कोई ऐसा पड़ोसी है जिसके यहां से आदान प्रदान चलता रहता है. तभी आपके यहां खीर ज़्यादा बनी तो वहां पहुंचा दी, उधर से पराठे ज़्यादा बने तो इधर आ गए. ऐसा नज़दीकी रिश्ता. कारण था बांग्लादेश के बनने में जो सहायता भारत ने की थी. पिछले दो सालों में इसी पड़ोसी ने आंतरिक तौर पर काफ़ी उथल पुथल देखी. बांग्लादेश के राष्ट्रपिता कहे जाने वाले बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान की मूर्तियां वहीं के लोगों ने गिराई. उनकी बेटी और बांग्लादेश की तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख़ हसीना को वहां से तुरंत भागना पड़ा. भारत ने उन्हें अपने यहां शरण भी दी. मगर भारत-बांग्लादेश का ऐसा रिश्ता आखिर बना कैसे? 1971 में हुआ क्या था? ईस्ट पाकिस्तान से बांग्लादेश तक का सफ़र तय करने में ऐसे कौन कौन से पड़ाव थे जिनके बारे में दुनिया को पता ही नहीं है? और जब ये हो रहा था तो दुनिया भर में क्या घट रहा था? इसी सवाल को Address करती है Iqbal Chand Malhotra और Subroto Chattopadhyay की क़िताब Bangladesh: Humiliation, Carnage, Liberation, Chaos. और किताब के दोनों लेखक हैं हमारे मेहमान. मिलेंगे सारे सवालों के जवाब. सुनिएगा पूरा एपिसोड. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: अमन पाल
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Bondi Beach Terror Attack का सच और यहूदियों से मुसलमानों का Dispute Explained: पढ़ाकू नितिन
14 December 2025. Australia ने पिछले 3 दशकों का सबसे वीभत्स और सबसे बड़ा आतंकी हमला देखा. जब Sydney के Bondi Beach पर दो बंदूकधारी ताबड़तोड़ गोलीबारी करते दिखे. अफ़रा तफ़री मची 15 लोगों ने अपनी जान गंवाई. 30 से ज़्यादा लोग घायल हुए. 10 साल की छोटी बच्ची से लेकर 41 साल तक के Rabbi तक इसमें मारे गए. जब जांच हुई तो मालूम हुआ कि हमलावरों के तार IS से जुड़े थे. कयास लगाए गए कि उन्होंने हमला करने के लिए ये दिन इसलिए चुना. ताकि वो Hanukkah मना रहे Jewish परिवारों को मारकर एक Messaging दे सकें. कुछ लोगों ने इस हमले को Anti-Semitic कहा.. कुछ ने इसमें एक Geopolitical एंगल ढूंढते हुए कहा कि देखो अभी तो Australia Palestine को मान्यता देने वाला था. और अब उनके यहां यहूदियों पर इतना बड़ा हमला हुआ.. ट्रंप से लेकर नेतन्याहू तक ने इस हमले की निंदा की और इसे Australia में उठते Anti-Semitic Sentiment का Indicator बताया. लेकिन सवाल उठता है कि ये Anti Semitism है क्या? हम इसे सीधा Anti-Jew क्यों नहीं कह देते? आखिर Islamic State को Jews से क्या दिक्कत है? Jews दरअसल मुसलमानों और Christians से अलग होते हुए भी एक जैसे क्यों है? Jews के Origins से लेकर. Holocaust. फिर Israel का बनना और फिर World Order का बदलना सब समझेंगे आज. इस सबमें Jews का Direct Indirect Role क्या रहा ये भी समझेंगे ? Bondi Beach पर हुए इस हमले को तो समझेंगे ही मगर बात थोड़ी इतिहास पर ज़्यादा करेंगे. Padhaku Nitin World Affairs के इस एपिसोड में यही सब समझने के लिए हमने दावत दी है कलकत्ता की ऐतिहासिक Presidency यूनिवर्सिटी में Holocaust History पढ़ाने वाले, Anti Semitism के मुद्दे पर Expertise रखने वाले Professor नवरस आफ़रीदी को. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: रोहन भारती
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Pilot ने खोले IndiGo और Aviation Industry के दबे राज़! : पढ़ाकू नितिन
एक दौर में मिडिल क्लास का ख़्वाब थी हवाई यात्रा. अक्सर एयरपोर्ट पर खींची गई तस्वीरें-वीडियोज़ अपने प्रियजनों को भेजने के लिए ली जाती थीं. ये बताने के लिए कि लीजिए हमने ये ज़मीन छोड़कर परवाज़ ले ली है. बॉलीवुड का भी इसमें बड़ा योगदान था. अक्सर हीरो हीरोइन को वस्ल का लम्हा एयरपोर्ट के आंगन में ही नसीब होता था. एयरपोर्ट पर खींचे गए फोटोज़ वीडियोज़ तो आजकल वायरल भी हो रहे हैं. लेकिन इन फोटोज़ में भाव सेलिब्रेशन का नहीं बल्कि असंतोष, नाराज़गी और मुख्यत: निराशा का है. वजह है देश की सबसे बड़ी Airlines में से एक, IndiGo का Crisis का होना. मुमकिन है आपने भी ख़बरें को देखी ही होंगी और ऐसी वीडियोज़ भी. लेकिन ये मेरा दावा है कि ऐसा पॉडकास्ट नहीं देखा होगा जिसमें इतनी सरल हिंदी में आपको इस Crisis से जुड़े जटिल सवालों के सरलतम जवाब मिले हों. तो सोच क्या रहे हैं, देख डालिए पढ़ाकू नितिन का ये एपिसोड जहां हमारे मेहमान हैं सिविल एविएशन एक्सपर्ट और एक्स पायलट हर्ष वर्धन. जिनसे हमने समझा अचानक इतनी बड़ी Airline इतनी बुरी तरह फेल क्यों होती दिखी? क्या Possible कारण हैं? DGCA की ओर से, Airline की ओर से? Infrastructural दिक्कत है या Operational? इसी बहाने झांकेगे कि Indian Civil Aviation की दुनिया अंदर से दिखती कैसी है? प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: अमन पाल
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India की सबसे बड़ी Security Company बनने की अनसुनी कहानी! : पढ़ाकू नितिन
कल्पना कीजिए, साल 1970 का दशक। इमरजेंसी का दौर। एक निडर पत्रकार बेखौफ होकर सरकार के खिलाफ आग उगलते लेख लिख रहा है। जब ऊपर से दबाव इतना बढ़ गया कि नौकरी छोड़नी पड़ी, तो उसने हार नहीं मानी। सीधे पहुंच गया जयप्रकाश नारायण के पास, जिन्होंने उस वक्त इंदिरा गांधी की कुर्सी हिला रखी थी। जेपी ने उसे सलाह दी, “कुछ ऐसा करो कि रिटायर हो रहे हमारे सैनिकों को सम्मान के साथ रोजगार मिले।” बस इसी एक सलाह से 1974 में जन्म हुआ एक छोटी-सी सिक्योरिटी कंपनी का, नाम रखा SIS, यानी Security and Intelligence Services (India)। आज, 50 साल बाद वही SIS: - भारत और ऑस्ट्रेलिया की नंबर-1 सिक्योरिटी सर्विसेज कंपनी - न्यूज़ीलैंड में तीसरे और सिंगापुर में पांचवें नंबर पर - NSE में लिस्टेड - 3 लाख से ज्यादा कर्मचारी, यानी TCS, Infosys और Reliance के ठीक बाद चौथे नंबर पर - भारत की सबसे बड़ी एम्प्लॉयर आपने कभी न कभी किसी मॉल, सोसाइटी या ऑफिस के गेट पर “SIS” का बैज लगाए गार्ड को जरूर देखा होगा। लेकिन हैरानी की बात ये है कि TCS, Infosys, Reliance तो हर कोई जानता है, पर SIS के बारे में हममें से ज्यादातर लोग आज भी अनजान हैं। इस गुमनाम दिग्गज की पूरी कहानी अब एक किताब में आ गई है, किताब का नाम है The SIS Story और लेखक हैं प्रिंस मैथ्यू थॉमस. यही प्रिंस थॉमस, पढ़ाकू नितिन के इस एपिसोड में हमारे मेहमान हैं. सुनिए पूरा पॉडकास्ट प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: अमन पाल
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Delhi में Putin Modi Meet, India-Russia Summit से चिढ़ तो नहीं जाएंगे Trump? : Padhaku Nitin
जब भी मैं कोई फिल्म देखता हूँ, तो एक्टिंग के बारे में एक बात बार-बार समझ में आती है, कि असल खेल तो सही तरीके से रिएक्ट करने का होता है। हैरानी की बात है कि जियोपॉलिटिक्स को फॉलो करते वक्त भी बिलकुल वैसा ही लगता है, सब कुछ इसी पर टिका है कि आप सामने वाली स्थिति पर सही ढंग से रिएक्ट करें। एक देश दूसरे पर टैरिफ थोपकर दबाव बनाता है, दूसरा देश उसी हालत में डिप्लोमैटिकली रिएक्ट करता है, कुछ डील्स फाइनल करता है, बस यही जियोपॉलिटिक्स है। इस हफ्ते जियोपॉलिटिक्स के मैदान में दो बड़े-बड़े इवेंट हुए। पहला, 30 नवंबर को फ्लोरिडा में यूक्रेन पीस डील को लेकर अमेरिका और यूक्रेन के प्रतिनिधि आपस में मिले। दूसरा बड़ा इवेंट है राष्ट्रपति पुतिन का भारत दौरा। 2022 में यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद से यह पुतिन की पहली भारत यात्रा है। इसका महत्व तो अपने आप में बहुत बड़ा है। लेकिन सवाल यह है कि यह महत्व कितना बड़ा है? किस स्तर का है? यूक्रेन की शांति वार्ता को लेकर इस वक्त क्या-क्या बातें चल रही हैं? क्या भारत इस मुलाकात के जरिए दुनिया को और खास तौर पर अमेरिका को कोई खास संदेश देना चाहता है? इन सारे एंग्ल्स को हम डीकोड करेंगे, एक-एक करके सारे सवाल पूछेंगे प्रोफेसर राजन कुमार से। रूस और सेंट्रल एशियन स्टडीज के बड़े जानकार हैं, जेएनयू में पढ़ाते हैं। पहले भी हमारे शो पर आ चुके हैं और पिछली बार जब आए थे तो आप लोगों ने उस एपिसोड को खूब सारा प्यार दिया था। प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: अमन पाल
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Dubai Plane Crash का सच, Fighter Jets की दुनिया और LCA Tejas बेचने की जल्दी! : पढ़ाकू नितिन
21 नवंबर 2025 की दोपहर दुबई के मकतूम एयरपोर्ट से कुछ ख़बरें-विज़ुअल्स आए जिन्होंने भारतीयों का ध्यान ख़ींचा. ख़बर थी दुबई के एयरशो के दौरान हुए एक भारतीय फाइटर प्लेन तेजस के क्रैश होने की. तुरंत उभरी चिंता, दुख में तब बदली जब ये मालूम हुआ कि पायलट विंग कमांडर नमांश स्याल ने इस क्रैश में अपनी जान भी गंवाई. लेकिन बात सिर्फ़ दुख की नहीं थी, चिंता के विषय और भी हैं. क्योंकि न सिर्फ़ तेजस Indian Air Force का Indispensable हिस्सा है, बल्कि हम इस प्लेन को Export करने की दिशा में भी तेज़ी से काम कर रहे थे. तो Padhaku Nitin World Affairs के इस एपिसोड में हमने बात शुरू की इसी Crash से. समझा कि आखिर भारत दुबई के इस एयरशो में करने क्या गया था? समझा कि तेजस क्रैश की जांच किस तरह से आगे बढ़ रही है? कौन जांच करेगा? कैसे करेगा? और ये भी कि आखिर कोई प्लेन क्रैश क्यों होता है? और ये भी कि भारतीय जेट के क्रैश होने पर पाकिस्तान में मीम्स क्यों बन रहे हैं? हमारे मेहमान हैं सीनियर डिफेंस जर्नलिस्ट संदीप उन्नीथन. इन्हें आप जानते ही हैं. एपिसोड पूरा सुनिएगा. प्रड्यूसर: मानव देव रावतसाउंड मिक्स: रोहन भारती
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उन्मुक्त चंद को विराट कोहली ने दी साइकिल, पापा ने नाप दी दुनिया! : पढ़ाकू नितिन
‘पढ़ाकू नितिन’ के इस एपिसोड में हम किताबी कीड़ों से हटकर एक असली घुमक्कड़ से मिल रहे हैं, जो खुद को टूरिस्ट नहीं, यात्री कहते हैं. इस एपिसोड में हमारे साथ हैं साइक्लिस्ट और घुमक्कड़ भरत चंद ठाकुर. इन्होंने साइकिल से श्रीलंका को नाप डाला, दिल्ली से मुंबई तक सैर की, दुनिया के सबसे ऊंचे हाईवे में से एक पामीर हाईवे होते हुए ताजिकिस्तान को पार किया, भूटान को साइकिल पर घूम डाला और मनाली-लेह-लद्दाख भी हो आए. और सबसे मज़े की बात ये है कि अपनी साइक्लिंग की शुरुआत इन्होंने अपने बेटे की साइकिल से की थी, वो साइकिल जो विराट कोहली ने अंडर-19 वर्ल्ड कप जीतने पर उनके बेटे उन्मुक्त चंद को गिफ्ट की थी! जी हां, ये सज्जन न सिर्फ़ यात्री और टीचर हैं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के युवा सितारे उन्मुक्त चंद के पिता भी हैं. बस पॉडकास्ट पूरा देखिएगा और Aajtak Radio को Subscribe करना न भूलिएगा. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्सिंग: सूरज सिंह
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PM Modi, Nitish Kumar से लेकर Chirag Paswan तक की पॉलिटिक्स समझा गए Rajdeep Sardesai! : पढ़ाकू नितिन
इस बिहार चुनाव ने न जाने कितनों को चौंकाया! हुआ यूं कि Exit Polls के रुझानों में जो हवा, महागठबंधन के पक्ष में बन रही थी. वो असली नतीज़ों से आते ही हवा हो गई. जीत हुई NDA की और बिहार के नए सीएम बने, बिहार के पुराने सीएम नीतीश कुमार. लेकिन Exit Polls के आने से भी पहले से एक आवाज़ थी, जिसने नतीजों की सटीक भविष्यवाणी कर दी थी. ये आवाज़ थी 1988 से चुनावों को देख समझ और ओढ़-बिछा रहे सीनियर जर्नलिस्ट राजदीप सरदेसाई की. आपने उन्हें टीवी और सोशल मीडिया पर खूब देखा होगा, लेकिन इस बात का वादा है कि इस पॉडकास्ट में आपको वो एक नए अंदाज़ में ही बात करते नज़र आएंगे. पढ़ाकू नितिन में हमने उनसे पूछा कि जब वो बिहार चुनाव की रिपोर्टिंग के लिए ग्राउंड पर उतरे तो क्या चुन कर लाए? उनसे समझा कि आखिर ऐसा क्या है कि पिछले कुछ सालों से नीतीश कुमार जिसकी गाड़ी में बैठते हैं, वही फर्स्ट आती है? ये भी समझा कि नीतीश के अलावा NDA में मौजूद BJP और LJP का प्रदर्शन किस हद तक चौंकाने वाला रहा? बात सिर्फ़ जीतने वालों पर ही नहीं हुई समझा महागठबंधन के मुखिया तेजस्वी यादव इस बार के चुनाव में क्यों चूके? और ये भी पूछा कि आख़िर Prashant Kishor का भविष्य बिहार की राजनीति में राजदीप को कैसा दिखता है? बहुत मज़ा आएगा. गारंटी है. बस पॉडकास्ट पूरा सुनिएगा प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: अमन पाल
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Pakistan की ट्रेनिंग से बना Taliban, उसी को क्यों तबाह करना चाहता है?: पढ़ाकू नितिन
भारत ने हाल ही में अपनी राजधानी दिल्ली में एक भयानक विस्फोट देखा। आप सभी ने इसकी खबरें जरूर सुनी-पढ़ी होंगी। इसके मात्र एक-दो दिन बाद पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में भी एक घातक बम धमाका हुआ जिसमें 12 लोग मारे गए और 20 घायल हो गए। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इस हमले का जिम्मेदार सीधे काबुल को ठहराया और कहा कि अब अफगानिस्तान-पाकिस्तान के बीच जंग सिर्फ डूरंड लाइन तक सीमित नहीं रही। इस हमले का समय भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि ठीक कुछ दिन पहले ही इस्तांबुल में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच शांति वार्ता असफल हो चुकी थी। याद कीजिए, जब अफगान तालिबान के कार्यवाहक विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी भारत आए थे, उसी दौरान भी खबरें थीं कि पाकिस्तान अफगानिस्तान पर बम बरसा रहा है। तो आज के पढ़ाकू नितिन World Affairs में हमारा पूरा फोकस पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव पर रहेगा। हम समझेंगे कि दोनों इस्लामिक देशों के बीच बॉर्डर पर हालात इतने बिगड़े क्यों हैं? असल विवाद क्या है? हाल ही में अफगानिस्तान ने ईरान के साथ जिस तरह की ट्रेड डील की है, उससे भी पाकिस्तान काफी बौखलाया हुआ है। हम साउथ एशिया में इन दोनों पड़ोसियों के बीच बदलते समीकरण को भी डीकोड करेंगे। और ये भी जानेंगे कि आखिर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस धमाके को भारत से क्यों जोड़ा? चूंकि पूरा मसला बॉर्डर का है, इसलिए हमारे साथ हैं साउथ एशियन यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल रिलेशंस और खासतौर पर बॉर्डर स्टडीज पढ़ाने वाले प्रोफेसर धनंजय त्रिपाठी। एपिसोड को अंत तक सुनिए और Aajtak Radio को सब्सक्राइब करना न भूलें। प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: अमन पाल
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Zubeen Garg को मारने की धमकी किसने दी थी, Singer का Fan क्यों है पूरा Assam?: पढ़ाकू नितिन
असमिया सिंगर और म्यूज़िशियन ज़ुबिन गर्ग की मौत को लेकर जनता के दिल में सिर्फ़ शोक नहीं, क्षोभ भी है. कारण है वो रहस्यमयी हालात जिनमें उनकी मृत्यु हुई और वो Questionable तरीका जिस तरह से उनकी मृत्यु की Investigation की गई. 19 सितंबर 2025 में हुई ज़ुबिन की मौत जहां पहले हादसा लगी, फिर साज़िश और अब इस साज़िश में शामिल हो चुकी हैं कई और परतें. इन्हीं परतों को आज खोलेंगे. समझेंगे कि आखिर Zubeen Garg असम के लिए कौन थे, 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में Exactly हुआ क्या था? क्या कुछ लोग हैं जो इस केस के सॉल्व होने में बाधा बन रहे हैं? वहीं ज़ुबिन जिन्होंने गाया पॉलिटिक्स नोकोरिबा बोन्धू…. उन्हीं की मौत पर राजनीति क्यों हो रही है? इस एपिसोड में हमारे साथ हैं India Today NE को संभालने वाले… साथ ही India Today Magazine के Managing Editor Kaushik Deka.. जिन्होंने न सिर्फ़ अपनी ज़िंदगी के कई साल ज़ुबिन गर्ग के साथ बिताए.. बल्कि वो उन चंद लोगों में से हैं जो ज़ुबिन के जाने के बाद भी लगातार उनके केस पर लिख रहे हैं. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: रोहन भारती
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Zohran Mamdani की जीत क्यों चाहते थे US President Donald Trump?: Padhaku Nitin
New York City.. अगर आप अमेरिकी Sitcoms के शौकीन रहे हैं तो इस नाम और इसकी लंबी लंबी इमारतों से वाकिफ़ होंगे. इस बड़े से शहर में Times Square से लेकर Wall Street भी है, लेकिन पिछले हफ़्ते ये शहर अपने Mayoral Elections के लिए चर्चाओं में रहा. इसी Election में जीत दर्ज की Indian Filmmaker Mira Nair के बेटे ज़ोहरान ममदानी ने. अब इंडियन जड़ों वाले ममदानी ने न सिर्फ़ अपनी विनिंग स्पीच में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को कोट किया, आखिर में धूम मचाले धूम के संगीत पर झूमे. बल्कि उसी मंच से उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी ललकारा. भारत में उनकी वीडियोज़ खूब वायरल हो रही हैं. उन पर एक एपिसोड हम पहले भी कर चुके हैं. लेकिन इस पॉडकास्ट में बात करेंगे कि जिन मुद्दों पर ज़ोहरान जीत पाए, उन्हें अंजाम तक पहुंचाना कितना Practical है? ट्रंप, ज़ोहरान ममदानी से चिढ़ते क्यों है? और आखिर New York City में पिछले 100 सालों में एक भी Republican क्यों नहीं जीत पाया? हमने पूछे ये सभी सवाल Washington DC में रहने वाले Journalist Rohit Sharma के साथ. पूरा पॉडकास्ट सुनिएगा. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: सूरज सिंह
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Bihar में घूम रहे Journalists ने समझाया सीमांचल का गणित! पढ़ाकू नितिन, Bihar Election 2025 Special
Padhaku Nitin के इस एपिसोड में हमने खोला Bihar Election 2025 की परतों को … समझा कि आखिर बिहार चुनाव 2025 में कौन से मुद्दे सबसे ज़्यादा अहम साबित हो सकते हैं ग्राउंड पर? जनता के लिए क्या है Non-negotiable? आपसी गठबंधन में अंदरखाने क्या Insecurities हैं? तीन बड़े फोर्सेज़ जो नज़र आ रहे हैं, वो कहां कहां मात खा रहे हैं? बात की बिहार के Socio Economic Structure की भी, ताकि मुद्दों को बेहतरी से समझ पाएं और बात की जंगलराज और बाहुबल की राजनीति की भी. बिहार से जोड़े गए दो लोग. पहले, Political Economist Pushpendra और दूसरे India Today Magazine के लिए लिखने वाले और बिहार की राजनीति पर पकड़ रखने वाले Pushyamitra. दोनों ही ग्राउंड पर हैं. लगातार लोगों से मिल रहे हैं, रैलियां देखकर रहे हैं. तो बिहार चुनाव में हमारे संजय तो यहीं हैं. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: सूरज सिंह
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KC Tyagi ने सुनाए Fidel Castro और Yasser Arafat से मुलाक़ात के क़िस्से| Padhaku Nitin World Affairs
9 अक्टूबर, 2025 को फ़िलिस्तीन इज़रायल के बीच Egypt में Ceasefire deal साइन हुई. अगले ही दिन इज़रायली कैबिनेट ने इसे पास किया. हालांकि वो अलग बात है, कि उसके बाद भी वहां Israeli Airstrike की ख़बरें फिर आईं. अब गाज़ा से ऐसी तस्वीरें आ रही हैं, जहां लोग बड़ी संख्या में अपने घर लौट रहे हैं. लेकिन घरों के नाम पर वहां बचा है मलबा. बड़ी दिक्कत ये है कि उन्हें इसी मलबे को पहचानकर पता लगाना है, कि हां यहां उनका घर था. यहां उनका पड़ोस. कईयों को तो उसी मलबे में दबे अपने परिवार भी ढूंढने पड़ रहे हैं.. ये दृश्य सोचने पर मजबूर तो करते हैं कि आखिर ये मसला यहां तक पहुंचा कैसे? ज़रूरत महसूस होती है गाज़ा के पूरे Crisis की तरफ़ दो कदम पीछे हटकर देखने की और क्या ये सीज़फायर जो इससे पहले भी इतनी दफ़ा हुआ, फिर ब्रेक हुआ. क्या वो अब Survive कर पाएगा? लेकिन इस बार फिलिस्तीन के मुद्दे पर बात करने के लिए कोई प्रोफेसर या कोई डिप्लोमेट नहीं आए हैं. इस बार पढ़ाकू नितिन World Affairs में हमारे मेहमान हैं, KC Tyagi. जिन्हें ज़्यादातर लोग समाजवादी आंदोलन के बड़े नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद के तौर पर जानते हैं. लेकिन वो फिलिस्तीन के हक में बात करने वाले International Institution League of Parliamentarian for Al-quds and Palestine के मेंबर भी हैं. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: अमन पाल
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Indian Ocean का खेल, चीन की हैरतअंगेज़ Navy और Indian Navy की सबसे बड़ी दिक्कत!: पढ़ाकू नितिन
जिस देश की Navy जितनी ताकतवर होगी, उसका सागरों पर जितना कंट्रोल होगा. यही है मेहैनियन डोक्टरीन. इसी डोक्टरीन पर चलता नज़र आ रहा है हमारा पड़ोसी चीन. जिसने 2010 के बाद से अपनी नेवी की ताकत बढ़ाने की रफ्तार इस कदर पकड़ी की आज चीन हर पांच साल में उतनी बड़ी नेवी खड़ी कर सकता है, जितनी भारत के पास मौजूदा वक्त पर है. चिंता वाली बात ये है- कि इतनी बड़ी नेवी के साथ वो सिर्फ़ साउथ चाइना सी तक तो महदूद नहीं रहने वाला? क्या उसका Influence Indian Ocean में भी बढ़ रहा है? या बढ़ेगा? तो हमने सोचा कि आपके चहीते Senior Defence Journalist Sandeep Unnithan को फिर दावत दी जाए. और उनसे समझा जाए कि Indian Ocean के Power Dynamics फिलहाल किस तरह के हैं? भारतीय नेवी चीन के सामने कहां स्टैंड करती हैं? Indian Ocean में आधिपत्य बनाने के लिए भारत क्या कर रहा है? अगर Indian Navy ताकतवर है तो क्या कारण हैं? अगर कमज़ोर है तो क्या कारण हैं? क्या पानी में लड़ने की Tactics बदल जाती हैं? हथियार किस तरह बदल जाते हैं? और Indian Ocean में भविष्य में क्या खेल देखने को मिल सकता है? आप जल्दी से आजतक रेडियो को Subscribe कर लीजिए. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: अमन पाल
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Nobel Peace Prize जीतने वाले Venezuela पर बम बरसने वाले हैं? : पढ़ाकू नितिन
यूं तो हर बीतते पल के साथ देश-दुनिया में कुछ न कुछ घटता है. मगर इन्हीं में कुछ घटनाएं ऐतिहासिक तब बन जाती हैं जब उनसे प्रभावित होने वालों का आंकड़ा सैंकड़ों में हो. इन्हीं में से एक घटना थी 9/11. दुनिया के सबसे बड़े आतंकवादी हमलों में से एक. एक तरफ़ जहां इस घटना ने मानवता को झंझोड़ा, दूसरी तरफ़ ये घटना Geopolitics के लिहाज़ से काफ़ी निर्णायक साबित हुई. इस हमले के आरोपी ओसामा बिन लादेन के सिर पर 25 मिलियन यानि करीब 210 करोड़ का इनाम रखा गया था. लेकिन हाल ही में अमेरिका ने एक देश के राष्ट्रपति के सिर पर इससे दोगुना इनाम रखा, 420 करोड़ या कहें कि 50 मिलियन डॉलर. इतना ही नहीं, अमेरिकन राष्ट्रपति ट्रंप ने CIA को इस देश में Covert Operation Conduct करने की परमिशन दी. दूसरी ओर दुनिया का सबसे बड़ा Aircraft Carrier USS Gerald Ford भी इस देश की दहलीज़ पर खड़ा कर दिया है. ये देश न तो दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी है. न सबसे बड़ा हथियारों का सप्लायर. न ही इस देश पर आतंकवादियों को शरण देने का आरोप है. लेकिन फिर भी इस देश में अमेरिका अपनी फौज़ उतारने पर उतारू है. ये देश है Venezuela. Padhaku Nitin World Affairs के इस एपिसोड में बात इसी पर होगी. हमारे साथ हैं प्रतिष्ठित Think Tank Observer Research Foundation से जुड़े Geopolitical Analyst Vivek Mishra. जिनसे हमने पूछा कि आखिर Venezuela में घट क्या रहा है? ट्रंप इस देश के राष्ट्रपति से इतने चिढ़े हुए क्यों है? अमेरिका कैरिबियन सी में सितंबर से अबतक 10 नावों को क्यों बम से उड़ा चुका है? और वेनेज़ुएला के इस राष्ट्रपति को अमेरिका 2019 के बाद से राष्ट्रपति न कहकर Drug Kingpin क्यों कहता है? Subscribe कर लीजिए आजतक रेडियो के यूट्यूब चैनल को ताकि ऐसे और मज़ेदार एपिसोड आप तक तुरंत पहुंचे. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: अमन पाल
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काले ताज महल, गुंबद और 22 कमरों के राज़ का खुलासा! : पढ़ाकू नितिन
ताज महल को लेकर एक विवाद फिर उठा है. जब एक फिल्म का ट्रेलर सामने आया. फिल्म एक बारगी देखने पर कोर्टरूम ड्रामा मालूम होती है, मगर इस फिल्म का केंद्र दरअसल ताज महल है और फिल्म का नाम The Taj Story. एक लाइन में कहें तो फिल्म वो सवाल उठाती है जो कई सालों के ताज महल के संदर्भ में उठता रहा है. क्या ताज महल दरअसल तेजो महालय था? यानि एक शिव मंदिर? क्या हमें पढ़ाया गया इतिहास झूठा है? इस तेजो महालय वाली थ्योरी के सेंटर में कौनसे तर्क हैं? क्या है उन 22 कमरों का रहस्य जो ताज महल के नीचे मौजूद हैं? इतने सारे दावों के बीच एक दावा पक्का है- इन सवालों के जवाब देने के लिए जो प्रोफेसर साहब हमारे मेहमान हैं, वो ताज महल पर बात करने के लिए सबसे मुफ़ीद नाम हैं. मध्यकालीन इतिहास पर लेक्चर देने के लिए लंदन से पेरिस तक बुलाए जाने वाले, 50 से ज़्यादा Research papers और 2 किताबें लिखने वाले, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के Centre of Advanced Studies, History Department के चेयरमैन रह चुके और इससे पहले हमारे एपिसोड नंबर 44 में शिरकत करने वाले Professor सैयद अली नदीम रिज़वी. एपिसोड दो पार्ट में रिलीज़ कर रहे हैं. ये दूसरा वाला है. प्यार भी दोगुना दीजिएगा. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: सूरज सिंह
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Taj Mahal पर लगे कलश, त्रिशूल और कमल के पीछे का पूरा सच क्या है?: पढ़ाकू नितिन
ताज महल का अगर Architectural पहलू हटा दें. तो उसकी दो इमेज हैं. एक शकील बदायूंनी का शेर है- एक शहंशाह ने बनवा के ताज महल… पूरी दुनिया को मोहब्बत की निशानी दी है. जबकि दूसरी तरफ़ साहिर लुधियानवी लिखते हैं कि- ये चमन-ज़ार ये जमुना का किनारा ये महल….ये मुनक़्क़श दर ओ दीवार ये मेहराब ये ताक़… इक शहंशाह ने दौलत का सहारा ले कर….हम ग़रीबों की मोहब्बत का उड़ाया है मज़ाक़…मेरी महबूब कहीं और मिला कर मुझ से... इसी ताज महल को लेकर एक विवाद फिर उठा है. जब एक फिल्म का ट्रेलर सामने आया. फिल्म एक बारगी देखने पर कोर्टरूम ड्रामा मालूम होती है, मगर इस फिल्म का केंद्र दरअसल ताज महल है और फिल्म का नाम The Taj Story. एक लाइन में कहें तो फिल्म वो सवाल उठाती है जो कई सालों के ताज महल के संदर्भ में उठता रहा है. क्या ताज महल दरअसल तेजो महालय था? यानि एक शिव मंदिर? क्या हमें पढ़ाया गया इतिहास झूठा है? इस तेजो महालय वाली थ्योरी के सेंटर में कौनसे तर्क हैं? क्या है उन 22 कमरों का रहस्य जो ताज महल के नीचे मौजूद हैं? इतने सारे दावों के बीच एक दावा पक्का है- इन सवालों के जवाब देने के लिए जो प्रोफेसर साहब हमारे मेहमान हैं, वो ताज महल पर बात करने के लिए सबसे मुफ़ीद नाम हैं. मध्यकालीन इतिहास पर लेक्चर देने के लिए लंदन से पेरिस तक बुलाए जाने वाले, 50 से ज़्यादा Research papers और 2 किताबें लिखने वाले, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के Centre of Advanced Studies, History Department के चेयरमैन रह चुके और इससे पहले हमारे एपिसोड नंबर 44 में शिरकत करने वाले Professor सैयद अली नदीम रिज़वी. एपिसोड दो पार्ट में रिलीज़ कर रहे हैं. प्यार भी दोगुना दीजिएगा. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: सूरज सिंह
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Deoband का आज़ादी की लड़ाई, भारत-पाक बंटवारे और तालिबान के बनने में है क्या Role?: Padhaku Nitin
सोशल मीडिया पर कुछ दिन से अचानक अफ़ग़ानिस्तान Trend करने लगा है. कारण? तालिबान सरकार के Acting Foreign Minister Amir Khan Muttaqi का भारत दौरा. यूं तो इस दौरान कई चर्चाओं ने जन्म लिया. मगर गौर करने वाली बात ये है कि वो यूपी के एक शहर देवबंद गए. जहां एक बहुत बड़े हुजूम ने उनका स्वागत किया. ये शहर देवबंद था. मगर देवबंद और तालिबान के बीच में कनेक्शन क्या है? और उससे भी ज़रूरी बात ये देवबंद में ऐसा ख़ास क्या है? पढ़ाकू नितिन के इस एपिसोड में हमने इन्हीं सवालों के जवाब मांगे असद मिर्ज़ा से. देवबंद पर किताब- Demystifying Madrasah And Deobandi Islam लिखने वाले असद मिर्ज़ा साहब. दुबई के खलीज टाइम्स, BBC Urdu में सेवाएं दे चुके हैं. और इस एपिसोड में हमने उनसे देवबंद.. वहां पनपे इस्लाम और उसके तालिबान से रिश्ते पर बात की. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: अमन पाल
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Amir Khan Muttaqi का दौरा, Taliban की स्वीकार्यता और महिला विरोधी Press Conference: पढ़ाकू नितिन
अफ़ग़ानिस्तान… एक ऐसा देश जो हमेशा से रणनीति और ताक़त के खेल का मैदान रहा है. चार साल पहले जब तालिबान ने सत्ता संभाली, भारत ने उसे मान्यता तो नहीं दी, लेकिन रिश्तों के दरवाज़े भी पूरी तरह बंद नहीं किए और अब, वही तालिबान दिल्ली में कूटनीति की मेज़ पर बैठा है. क्या ये बातचीत सिर्फ़ एक ज़रूरी कदम है या भारत के रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा हितों के लिए एक बड़ा मोड़? इसी बीच, अफ़ग़ान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताक़ी की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में एक भी महिला पत्रकार को जगह नहीं मिली, जिससे लोकतंत्र और समानता के हमारे मूल्यों पर भी सवाल उठे. बाद में एक दूसरी प्रेस कॉन्फ़्रेंस रखी गई, जिसमें महिला पत्रकारों को आगे बैठाया गया, इन्हीं में से एक थीं गीता मोहन, इंडिया टुडे ग्रुप की फॉरन अफ़ेयर्स एडिटर जो इस बार 'पढ़ाकू नितिन' की मेहमान हैं.
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Nitish Kumar, Lalu, Prashant Kishore और Akhilesh Yadav पर क्या बोले JDU नेता KC Tyagi? : पढ़ाकू नितिन
इस साल जहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 साल पूरे हुए. साथ ही भारतीय समाजवादी आंदोलन के भी 90 साल पूरे हुए. समाजवादी विचारधारा से उपजे आंदोलन ने भारत को इतना कुछ दिया है कि उंगलियों पर गिन पाना शायद मुश्किल हो. इसी आंदोलन ने भारत को वो नेता भी दिए जिन्होंने आगे चलकर केंद्र और राज्यों की राजनीति में अहम रोल निभाया. तो हमने सोचा कि ज़रा ठहर कर समझते हैं कि ये विचारधारा जिसे दुनियाभर के कई देशों ने अपनाया. उसे भारत ने किस तरह आत्मसात किया? क्यों Socialist शब्द संविधान की मूल प्रति में शामिल नहीं था? और क्यों इमरजेंसी के दौर में इसे संविधान में शामिल किया गया? सवाल कई सारे उठते हैं- क्या नेहरू समाजवादी थे? क्या भगत सिंह समाजवादी थे? या जेपी-लोहिया के हिसाब से समाजवाद का विचार कैसा था? समझेंगे कि आज़ादी और आज़ादी के इतने सालों बाद आज समाजवाद भारतीय राजनीति में कहां खड़ा मिलता है? पूछेंगे कि बिहार-यूपी जो समाजवादी नेताओं का गढ़ रहे, उनमें ग्रोथ का ग्राफ़ किस हद तक समाजवाद के कारण था? ये सब जानने के लिए हम पहुंचे पूर्व राज्यसभा सांसद, जेडीयू नेता और वरिष्ठ समाजवादी नेता KC Tyagi के पास. हमें तो Padhaku Nitin का ये एपिसोड रिकॉर्ड करने में बहुत आनंद आया, उम्मीद करते हैं सुनने-देखने में आपको भी आएगा. अगर आए तो तारीफ़ें सुझाव भेजिएगा, कमेंट बॉक्स खुला है.
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Gaza Peace Deal से उम्मीदें, Trump का Nobel, Netanyahu की हार और Israel का मक़सद : पढ़ाकू नतिन
दो साल से जलती ज़मीन... गाज़ा. जहां हर सुबह राख से उठती है और हर रात धमाके में खत्म होती है. अब उसी राख पर रखी गई है, एक नई “Peace Deal” की पर्ची. वादा है कि जंग रुकेगी, बंधक लौटेंगे, गाज़ा फिर से जिएगा. लेकिन क्या शांति बस एक दस्तावेज़ से लौट आती है? क्या ये डील अमन का रास्ता है या बस पुरानी जंग का नया नाम, सुनिए 'पढ़ाकू नितिन' में.
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Democracy से डर, Secularism की सीमा, Hindu की Anxiety और Mob की Beauty: पढ़ाकू नितिन
हज़ारों सालों से इंसान कबीलों, सल्तनतों और अब राष्ट्र-राज्य में जी रहा है. लेकिन सवाल वही है सबसे सही शासन व्यवस्था कौन-सी है? राज्य कानून और संस्थाओं का ढांचा है, जबकि राष्ट्र पहचान और भावनाओं का जाल, अक्सर हम दोनों को गड़बड़ा देते हैं. फिर आता है लोकतंत्र जो बराबरी और आवाज़ का वादा करता है, लेकिन साथ ही populism और polarisation भी लाता है. तो क्या लोकतंत्र ही सबसे बेहतर विकल्प है या कोई और मॉडल उससे आगे निकल सकता है? इन्हीं सवालों पर बातचीत होगी JNU के असोसिएट प्रोफ़ेसर अजय गुडावर्ती से, सुनिए 'पढ़ाकू नितिन' में. Disclaimer: इस पॉडकास्ट में व्यक्त किए गए विचार एक्सपर्ट के निजी हैं
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China-India के रिश्ते क्यों नहीं सुधर सकते और Modi क्यों गए Xi Jinping के गांव?: पढ़ाकू नितिन
भारत-चीन रिश्ते दशकों से उतार-चढ़ाव से गुज़रते रहे हैं. गलवान घाटी की झड़प के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और भी गहरा हुआ. आखिर चीन की महत्वाकांक्षा क्या है? शी जिनपिंग किस तरह की राजनीति कर रहे हैं? और भारत इन चुनौतियों से निपटने के लिए कैसी रणनीति बना रहा है? इन्हीं सवालों पर हमने विस्तार से बात की पूर्व राजनयिक अशोक कंठ, सुनिए 'पढ़ाकू नितिन' में. Disclaimer: इस पॉडकास्ट में व्यक्त किए गए विचार एक्सपर्ट के निजी हैं
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RSS तीन बार बैन लगने के बावजूद कैसे बना सबसे बड़ा संगठन?: पढ़ाकू नितिन
27 सितंबर 2025—ये तारीख सिर्फ़ कैलेंडर का पन्ना नहीं, बल्कि एक सदी की कहानी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) आज अपने 100 साल पूरे कर रहा है। इस सफ़र में RSS ने सबकुछ देखा— आज़ादी की गूंज, गांधी की हत्या का साया, इमरजेंसी की कड़वाहट, बाबरी मस्जिद का तूफ़ान, और वो मोड़, जब “अराजनीतिक” कहे जाने वाले संघ से दो प्रधानमंत्री निकले. सवाल उठे, आरोप लगे, तीन बार बैन भी झेला. लेकिन हर बार संघ और मज़बूत होकर लौटा. अब, 100 साल बाद, सबसे बड़ा सवाल— RSS की असली यात्रा कैसी रही? क्या ये उतार-चढ़ावों से भरी रही या अपनी विचारधारा की मज़बूती से टिके रहने की कहानी? इन्हीं सवालों पर चर्चा करने के लिए हमारे साथ हैं वरिष्ठ पत्रकार और लेखक निलांजन मुखोपाध्याय, जिन्होंने दशकों तक हिंदू संगठनों और राजनीति को क़रीब से कवर किया है और अपनी किताब The RSS: Icons of Indian Right में इन्हें दर्ज किया है. देखिए और समझिए, RSS के सौ सालों की ताक़त, आलोचनाएँ और जटिलताएँ. और हाँ, Aajtak Radio को Subscribe करना न भूलें.
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Pakistan Saudi Arabia Defence Pact के निशाने पर कौन और India क्यों नहीं करता ऐसी डील?: Padhaku Nitin
पाकिस्तान और सऊदी अरब ने नया डिफ़ेंस पैक्ट किया है अगर एक पर हमला होगा तो दोनों मानेंगे लेकिन क्या इसका असर भारत तक पहुंचेगा? सऊदी भारत का बड़ा ट्रेड पार्टनर है और पाकिस्तान हमारा विरोधी. तो इस समझौते से पाकिस्तान मज़बूत होगा या ये सिर्फ़ काग़ज़ी एलान है? और भारत को अब वेस्ट एशिया पॉलिसी नए सिरे से सोचना पड़ेगा, सुनिए 'पढ़ाकू नितिन' में. Disclaimer: इस पॉडकास्ट में व्यक्त किए गए विचार एक्सपर्ट के निजी हैं
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Nuclear Bomb बनाने से ज़्यादा टेढ़ी क्यों देसी Jet Engine Kaveri की राह? : Padhaku Nitin
15 अगस्त को लाल किले से दी जाने वाली पीएम स्पीच देश के लिए एक बड़ा इवेंट होता है. सबकी नज़र रहती है कि इस भाषण में कौनसा शब्द कितनी बार बोला गया? इस साल इसी भाषण में पीएम मोदी ने कहा कि “भारतीय फाइटर जेट्स को ज़रूरत है भारतीय इंजन की.” और फिर से सोशल मीडिया पर बात होने लगी कि यार… था तो सही एक स्वदेशी इंजन जिसकी दुहाई देकर अक्सर कहा जाता था कि भारत जेट बनाने के मामले में भी स्वदेशी बन जाएगा. ये नाम है- कावेरी इंजन. 1986 में इसे बनाने की शुरुआत हुई मगर अब तक कोई भारतीय जेट ऐसा नहीं उड़ा जिसका इंजन पूर्णत: भारतीय हो. तो कब होगा ये सपना पूरा? पढ़ाकू नितिन के इस एपिसोड में हमने बात की कावेरी इंजन पर और डिफेंस एक्सपर्ट संदीप उन्नीथन से समझा कि आखिर कावेरी इंजन को पूरा करने में दिक्कत क्या है? क्या फैक्टर्स हैं जो इसे अब भी नहीं बनने दे रहे. ये इतना ख़ास क्यों है और कुछ बेसिक सवाल भी कि आखिर एक जेट इंजन काम कैसे करता है. प्रड्यूसर: मानव देव रावतसाउंड मिक्स: रोहन भारती
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Qatar पर हमला कर क्या Netanyahu ने ग़लती की और क्या Israel के सामने Arab NATO टिकेगा?: पढ़ाकू नितिन
दोहा में अरब और इस्लामिक देशों का बड़ा सम्मेलन हुआ. इसी दौरान मिस्र ने फिर से "Arab NATO" का प्रस्ताव रखा यानि 22 अरब देशों की संयुक्त सेना! लेकिन क्या ये मुमकिन है, जब इतिहास गवाह है कि यही देश आपस में लड़ते रहे हैं? इज़रायल ने क़तर पर हमला कर दिया क़तर जो अमेरिका का बड़ा सहयोगी है. अब सवाल ये है कि क़तर अपनी सुरक्षा के लिए कब तक अमेरिका पर निर्भर रहेगा? क्या वो चीन का साथ लेगा? और क्या अरब NATO कभी हक़ीक़त बन पाएगा, प्रो. मोहसिन रज़ा के साथ 'पढ़ाकू नितिन' में हुई इस बातचीत को सुनिए.
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Gangs of Wasseypur में Anurag Kashyap से इस Dhanbad Coal Mafia की कहानी छूट गई!: पढ़ाकू नितिन
धनबाद, झारखंड—देश का कोल कैपिटल. कोयले ने जहाँ इंडस्ट्री को ताक़त दी, वहीं जन्म दिया माफ़िया, गैंगवार और करप्शन की अंधेरी दुनिया को. फ़िल्म गैंग्स ऑफ़ वासेपुर ने इसकी झलक दिखाई लेकिन असली कहानी उससे कहीं ज़्यादा डरावनी है. इन्हीं सचाईयों पर लिखी है किताब “Dhanbad – The Economics of Coal – The Mafia”, जिसके लेखक हैं प्रमोद कुमार गुप्ता पूर्व प्रिंसिपल चीफ़ कमिश्नर ऑफ़ इनकम टैक्स. उन्होंने कोल माफ़िया को अपनी आँखों से देखा, उनसे टक्कर ली और अपने अनुभवों को किताब में दर्ज किया, सुनिए 'पढ़ाकू नितिन' में.
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Nepal के Gen Z का Democracy पर डाउट, Nepo Kids की अय्याशी और Oli की China से गलबहियां: पढ़ाकू नितिन
अंग्रेज़ी में कहते हैं Straw that broke the camel’s back और हिन्दी में इसके करीब है ताबूत की आख़िरी कील. नेपाल में सरकार ने अचानक लगभग सभी बड़े सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स बैन कर दिए. इसके बाद हज़ारों लोग, ख़ासकर जेन-ज़ी यानी 1997 से 2012 के बीच जन्मी पीढ़ी सड़कों पर उतर आई सरकार ने शुरुआत में सख़्ती दिखाई, लेकिन हालात इतने बिगड़े कि मंत्री सड़क पर पिट गए सरकारी इमारतों को आग लगा दी गई और आखिरकार प्रधानमंत्री के.पी. ओली को इस्तीफ़ा देकर देश छोड़ना पड़ा।तो क्या ये सब सिर्फ़ सोशल मीडिया बैन की वजह से हुआ? या फिर ये पहले से जमा गुस्से का फट पड़ना था, सुनिए 'पढ़ाकू नितिन' में.
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Hitler कैसे बना Palestine का Hero और ISIS-Alqaeda का Hitler कनेक्शन क्या है?: पढ़ाकू नितिन
अडॉल्फ हिटलर, इतिहास का वो किरदार, जिसके बिना modern world history अधूरी है. पिछली सदी की लगभग हर बड़ी कहानी में जर्मनी के इस नेता का नाम किसी न किसी तरह सामने आता है. आज हमारे साथ हैं किताब Hitler: The Proclaimed Messiah of the Palestinian Cause के लेखक आभास मालदहियार, सुनिए 'पढ़ाकू नितिन' में.
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ABOUT THIS SHOW
Padhaku Nitin is a casual and long conversation-based podcast where Aaj Tak Radio host Nitin talks to experts and discuss a wide range of topics like history, war, politics, policy, ideologies, cinema, travelling, sports, nature and everything that is interesting. A single episode of the show can be as enriching as reading four books. As we say in the podcast,Chaar kitaabe padhne jitna gyaan milega Padhaku Nitin mein.कब कोई हक़ीक़त से मिथक बन जाता है? क्यों कोई कहानी सदियाँ पार करके हमारे सिरहाने आ बैठती है? कुछ नाम तो इंसानों की कलेक्टिव मेमोरी का हमेशा के लिए हिस्सा बन जाते हैं लेकिन पूरी की पूरी सभ्यता चुपचाप कैसे मिट जाती है?भाषा के ग्रामर से मिले कब, क्यों, कैसे, कहां, किसने ऐसे शब्द हैं जो सेंटेंस में जुड़ जाएँ तो सवाल पैदा करते हैं और सवालों के बारे में आइंस्टीन ने कहा था- The important thing is not to stop questioning. पढ़ाकू नितिन ऐसा ही पॉडकास्ट है जिसमें किसी टॉपिक का रेशा रेशा खुलने तक हम सवाल पूछने से थकते नहीं.
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