EPISODE · Mar 28, 2022 · 9 MIN
1. S01 - E01 यादें सिमटतीं हैं ऐसे, कि जैसे झुलसीं हुईं हैं!🤗
from 'Wah! Ye Diariyaan' (स्वरचित १००+ गज़लें, नज़्में, और कविताऐं)!'
🤗क्या आपने कभी डायरी लिखी है दोस्तों? क्या आपने कभी अपनी यादों को किसी डायरी के पन्नों में छुपा के रखा है?-यादें पन्ने जैसी, ज़िल्द वक़्त सी है,किताबें अरमां जैसी, सिलाई सख़्त सी है,खुले न खुले ये साफ़ा, कौन जाने,मुसन्निस दिलचस्प सा, कहानी मस्त सी है!-हमें न उससे कोई गिला, न एहतराम कोई,वो भी हमसे नाखुश, और न कोई खुशी सी है!-यादें पन्ने जैसी, ज़िल्द वक़्त सी है,किताबें अरमां जैसी, सिलाई सख़्त सी है,खुले न खुले ये साफ़ा, कौन जाने,मुसन्निस दिलचस्प सा, कहानी मस्त सी है!-आग़ाज़ न कर पाए, तो एक ख़लिश सी रही,न मेहमां ही मिला, और ख़ुश्क ज़मीन सी है!-यादें पन्ने जैसी, ज़िल्द वक़्त सी है,किताबें अरमां जैसी, सिलाई सख़्त सी है,खुले न खुले ये साफ़ा, कौन जाने,मुसन्निस दिलचस्प सा, कहानी मस्त सी है! -फ़रोख़्त का हिसाब क्या रखना, जब की उनकी बाबत,ना बाज़ार में दिखी, ना नज़र में वो ही है!-यादें पन्ने जैसी, ज़िल्द वक़्त सी है,किताबें अरमां जैसी, सिलाई सख़्त सी है,खुले न खुले ये साफ़ा, कौन जाने,मुसन्निस दिलचस्प सा, कहानी मस्त सी है!-उम्दा फासाना, उम्दी जुबान, उम्दा तराना,मेरी जवानी बे-आबरू, बहुत बड़ी सी है!-यादें पन्ने जैसी, ज़िल्द वक़्त सी है,किताबें अरमां जैसी, सिलाई सख़्त सी है,खुले न खुले ये साफ़ा, कौन जाने,मुसन्निस दिलचस्प सा, कहानी मस्त सी है!-'ऐ दर्द', मुनव्वर सा है तेरा ठिकाना.बस कमी इसमें, कुछ चांद सितारों की है!-यादें पन्ने जैसी, ज़िल्द वक़्त सी है,किताबें अरमां जैसी, सिलाई सख़्त सी है,खुले न खुले ये साफ़ा, कौन जाने,मुसन्निस दिलचस्प सा, कहानी मस्त सी है!
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1. S01 - E01 यादें सिमटतीं हैं ऐसे, कि जैसे झुलसीं हुईं हैं!🤗
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