EPISODE · Jan 2, 2026 · 1H 8M
2 Jan 26 - वर्तमान में कैसे ठहरें? अहंकार और परमात्मा के बीच का संघर्ष | कबीर के दोहों का गहरा अर्थ
from Baba ji Vijay Vats · host Baba ji Vijay Vats
00:00 - कबीर के दोहे का गहरा रहस्य: 'बीती ताही बिसार दे' की व्याख्याकारों द्वारा हत्या।01:30 - अतीत और भविष्य के बीच का बहुमूल्य क्षण: वर्तमान (Present) की महत्ता।03:00 - ठहर जाने का महत्व: दौड़ते-दौड़ते प्रवचन सुनने से बात अंतस में नहीं उतरेगी।05:20 - पास्ट और फ्यूचर के बीच एक लम्हा: वही क्षण जीवन को बदल या सुधार सकता है।07:38 - प्रबुद्ध और परमात्मा की परिभाषा: वर्तमान में ठहरना प्रबुद्धता है, उसमें स्थित हो जाना भगवत्ता है।09:30 - बुद्ध और मक्खी का प्रसंग: होश (Awareness) और सजगता में क्रिया करने का उदाहरण।12:56 - भविष्य और अतीत को भूलने का असली अर्थ: दोनों ही हमारी स्मृतियों और योजनाओं के रिकॉर्डर में हैं।16:40 - क्या भविष्य बदला जा सकता है? दार्शनिक बनाम संत की वाणी का कड़वा सच।21:19 - 'जो बन आवे सहज में': कबीर के अनुसार सहजता से होने वाले कार्य ही सत्य हैं।24:40 - अहंकार और फ्यूचर निर्माण: "हम करके दिखाएंगे" की ज़िद ही परमात्मा को विदा कर देती है।31:46 - कर्म का सुपर सेंसिटिव रिकॉर्ड: बीती बातों का स्मृतियों में फीड हो जाना।33:26 - वर्तमान ही निर्णायक है: तीन काल में से वर्तमान ही सबसे बहुमूल्य है जिसे हम खो देते हैं।47:44 - चेतना का परम विकास (Evolution of Consciousness): बाहर का विकास काजी और क्षणिक है।53:07 - डिजोल्व (Dissolve) बनाम मर्ज (Merge): बुद्ध विलीन होते हैं, कृष्ण और कबीर समुद्र में समा जाते हैं।59:06 - अहंकार को राख करना: धूनी और राख शरीर पर मलने का असली आध्यात्मिक संदेश।01:03:46 - तुलसीदास और कालिदास के उदाहरण: शब्दों और परिभाषाओं से पहचानी जाने वाली मूढ़ता।---सारांश (Summary)इस वीडियो में बाबाजी कबीर के प्रसिद्ध दोहे 'बीती ताही बिसार दे' के माध्यम से वर्तमान में जीने की कला सिखाते हैं। वे स्पष्ट करते हैं कि अतीत और भविष्य की स्मृतियों व योजनाओं में उलझे रहना ही हमारे दुखों का मूल कारण है। बाबाजी के अनुसार, चेतना का असली विकास 'सहजता' में है, जहाँ व्यक्ति अपने अहंकार को मिटाकर परमात्मा में विलीन हो जाता है।---मुख्य विषय (Topics)कबीर के दोहों का रहस्यात्मक अर्थवर्तमान में ठहरने की प्रबुद्ध कलाचेतना का विकास बनाम बाहरी विकासअहंकार और परमात्मा के बीच का संघर्षबुद्ध, कृष्ण और महावीर की सजगता का अंतरसत्य की सहजता और विलीन होने का मार्ग---शॉर्ट्स के लिए टॉपिक (Shorts Style Topics)- वर्तमान में ठहरना सीख लिया तो तुम भगवान हो [07:38] ✨🧘♂️- अतीत और भविष्य केवल दिमाग का रिकॉर्डर हैं [15:15] 🧠🎞️- "हम करके दिखाएंगे" कहने पर परमात्मा विदा हो जाता है [27:54] 🛑⚖️- चेतना का विकास ही असली विकास है, स्मार्ट सिटी नहीं [47:44] 🏗️🚫- बुद्ध डिजोल्व होते हैं पर कृष्ण समुद्र में मर्ज होते हैं [53:07] 🌊💎---वीडियो के लिए शीर्षक (Titles)1. बीती ताही बिसार दे: कबीर का वो सच जो किसी ने नहीं बताया!2. वर्तमान में कैसे ठहरें? | बाबाजी का रहस्यात्मक प्रवचन | 1 January 20263. प्रबुद्ध और परमात्मा में क्या अंतर है? | बुद्ध और कृष्ण की सजगता का रहस्य4. अहंकार को राख कैसे करें? | चेतना का विकास और सहज समाधि5. जो बीत गया उसे भूल जाओ, जो आ रहा है उसे होने दो | जीवन का मूल मंत्र---सामान्य हैशटैग्स (Hashtags)#BabaJiSatsang #KabirKeDohe #PresentMoment #Spirituality #Consciousness #Mindfulness #AncientWisdom #NewYear2026 #Meditation #MokshDwar---नाम हैशटैग्स (Name Hashtags)#BabaJiVijayVats #LordKrishna #GautamBuddha #MahavirSwami #SantKabir #Tulsidas #VikasDivyakirti #KhanSir #AcharyaPrashant #RohitMiddha
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2 Jan 26 - वर्तमान में कैसे ठहरें? अहंकार और परमात्मा के बीच का संघर्ष | कबीर के दोहों का गहरा अर्थ
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