2. S01 - E02 आज मैंने अपनी ऐसी ही कुछ डायरियॉं निकालीं आलमारी से! 😊 episode artwork

EPISODE · Mar 29, 2022 · 8 MIN

2. S01 - E02 आज मैंने अपनी ऐसी ही कुछ डायरियॉं निकालीं आलमारी से! 😊

from 'Wah! Ye Diariyaan' (स्वरचित १००+ गज़लें, नज़्में, और कविताऐं)!'

जब मैं उनको निकालने गया, तो एक शेल्फ में सारी की सारी आराम से सो रहीं थीं; दराज़ के खुलने की आवाज़ सुनते ही, दो तीन डायरियों ने तो करवट बदल के मुझे देखा और मुस्कुराईं!😊-आ पास आ, न दूर जा, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ,न तोड़ कर, न फोड़ कर, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ,मेरे भी अंदर आग है, मेरा लहू भी लाल है,न रंग कर, न भंग कर, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ! -मुझको भी हंसी आती है, जब देखता हूँ आईना,न चेहरा बना, न चेहरा छुपा, कि मैं भी तेरे जैसा हूं! -आ पास आ, न दूर जा, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ,न तोड़ कर, न फोड़ कर, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ,मेरे भी अंदर आग है, मेरा लहू भी लाल है,न रंग कर, न भंग कर, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ! -इस रंगदारी में कई, कितने हुनर सीखे नहीं,इंसान हूं, मौला नहीं, कि मैं भी तेरे जैसा हूं! -आ पास आ, न दूर जा, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ,न तोड़ कर, न फोड़ कर, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ,मेरे भी अंदर आग है, मेरा लहू भी लाल है,न रंग कर, न भंग कर, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ! -कई शामें मैंने काटीं हैं, अपने उन जज़्बातों के साथ,फ़क्र हुआ ये जान के, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ! -आ पास आ, न दूर जा, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ,न तोड़ कर, न फोड़ कर, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ,मेरे भी अंदर आग है, मेरा लहू भी लाल है,न रंग कर, न भंग कर, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ! -हासिल नहीं, तो दर-ब-दर, जाता रहा मैं हर गज़र,हासिल नहीं, मुमकिन नहीं, कि मैं भी तेरे जैसा हूं! -आ पास आ, न दूर जा, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ,न तोड़ कर, न फोड़ कर, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ,मेरे भी अंदर आग है, मेरा लहू भी लाल है,न रंग कर, न भंग कर, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ! -'ऐ दर्द' उठते बैठते, कोई गिला तो कर जिंदगी से,बंद कर दे वर्ना ये कहना, कि मैं भी तेरे जैसा हूं! -आ पास आ, न दूर जा, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ,न तोड़ कर, न फोड़ कर, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ,मेरे भी अंदर आग है, मेरा लहू भी लाल है,न रंग कर, न भंग कर, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ!

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