26 Mar 26 - लोभ, अपूर्णता और पूर्णता की खोज!! विराट (Infinite) होने की आंतरिक तमन्ना episode artwork

EPISODE · Mar 25, 2026 · 1H 16M

26 Mar 26 - लोभ, अपूर्णता और पूर्णता की खोज!! विराट (Infinite) होने की आंतरिक तमन्ना

from Baba ji Vijay Vats · host Baba ji Vijay Vats

00:10 - लीला प्रसाद का प्रश्न: लोभ (Greed) को विकार क्यों कहा गया है?00:46 - अपूर्ण व्यक्ति ही लोभ करता है: भीतर की कमी का बाहरी प्रदर्शन02:36 - लोभ का असली अर्थ: विराट (Infinite) होने की आंतरिक तमन्ना05:48 - गुरुडम और यांत्रिक पाठ: क्या राम-राम जपने मात्र से पूर्णता मिल सकती है?06:58 - राजनीतिक लोभ और श्रेय (Credit) लेने की होड़08:42 - गीत: "पन्ना की तमन्ना है कि हीरा मुझे मिल जाए" - एक आध्यात्मिक रूपक 🎶10:15 - बाहरी दिखावा बनाम भीतरी 'होना' (Being)12:47 - अहंकार और परमात्मा की मूर्तियाँ: जब इंसान खुद को भगवान से बड़ा मानने लगे13:57 - राजा का असली धर्म: सूर्य की तरह सबको बराबर बाँटना15:10 - सूत्र: "शीश तली धर घर मेरे आ" - अहंकार के विसर्जन का आह्वान16:44 - धर्म बनाम इंसानियत: क्या हिंदू-मुसलमान कभी परमात्मा को पा सकेंगे?18:40 - मान्यताओं का 'शीश': जब तक मानोगे, तब तक जान नहीं पाओगे21:19 - भीतरी आँखें और पलकें: मान्यताओं का पर्दा हटाकर सत्य को देखना22:42 - गीत: "कर्मी आवे कपड़ा, नदरी मोक्ष द्वार" - मानव शरीर का सौभाग्य 🎶24:32 - संस्कार और मैल: मेकअप की परतों के नीचे छिपा आपका असली स्वरूप26:00 - कबीर का सूत्र: "निंदक निरे राखिए" - बिना साबुन-पानी भीतरी सफाई की कला---सारांश (Summary)इस प्रवचन में बाबा जी बताते हैं कि लोभ (Greed) का मूल कारण मनुष्य का खुद को 'अपूर्ण' अनुभव करना है। यह अपूर्णता उसे 'विराट' होने के लिए प्रेरित करती है, लेकिन सही मार्ग न पता होने के कारण वह धन, पद और प्रतिष्ठा जुटाने के गलत रास्ते पर निकल पड़ता है। वे यांत्रिक धार्मिक अनुष्ठानों और मान्यताओं को 'मैल' या 'मेकअप' की तरह बताते हैं जो हमारे असली स्वरूप को छिपा देते हैं। बाबा जी के अनुसार, मुक्ति का मार्ग मान्यताओं को छोड़कर 'द्रष्टा' बनने और अहंकार (शीश) को विसर्जित करने में है।---मुख्य विषय (Topics)- आध्यात्मिक मनोविज्ञान: लोभ और अपूर्णता के बीच का गहरा संबंध (Psychology of Greed).- अहंकार का विसर्जन: "शीश तली धर" का वास्तविक रूहानी अर्थ (Ego Dissolution).- मान्यता बनाम अनुभव: क्यों 'मानना' सत्य को जानने में सबसे बड़ी अड़चन है।- सामाजिक सुधार: एक आदर्श राजा और सूर्य जैसी निष्पक्ष शासन व्यवस्था।- आत्म-सफाई का विज्ञान: संस्कारों की मैल और निंदक (Critics) की उपयोगिता।---Shorts Style Topics- लोभ क्यों होता है? क्योंकि आप खुद को बहुत छोटा मानते हैं [00:46] 🤏💰- अहंकार की तस्वीर: जब इंसान खुद को भगवान का 'मैनेजर' समझ बैठे [12:47] 🎭🔱- सच्चा सरेंडर: अपनी मान्यताओं का सिर हथेली पर रखकर गुरु के पास आओ [15:10] 🤲🚪- बिना साबुन-पानी सफाई: अपने आलोचकों को पास रखो, वे आपकी मैल धो देंगे [26:00] 🧼✨- मानव जीवन का लक्ष्य: यह शरीर 'मोक्ष द्वार' है, इसे व्यर्थ मत गँवाओ [22:42] 🧬🧘‍♂️---Music Segments (Geet/Shayari)- 🎶 "पन्ना की तमन्ना है कि हीरा मुझे मिल जाए, चाहे मेरी जान जाए..." - [08:42]- 🎶 "शीश तली धर घर मेरे आ..." - [15:10]- 🎶 "कर्मी आवे कपड़ा, नदरी मोक्ष द्वार" - [22:42]- ✒️ "बुत-परस्तों का निराला भगवान देखा है, खुद तराशा है और नाम भगवान रखा है।" - [12:59]- ✒️ "निंदक निरे राखिए, आंगन कुटी छवा। बिन साबुन बिन वार के सकल मैल जाए।" - [26:00]---वीडियो के लिए शीर्षक (Titles)1. लोभ या पूर्णता की प्यास? बाबा जी का लोभ पर क्रांतिकारी प्रवचन2. मान्यताएं छोड़ो, सत्य को देखो: क्यों 'मानना' अध्यात्म का सबसे बड़ा दुश्मन है?3. शीश तली धर: क्या आप अपना अहंकार विसर्जित करने के लिए तैयार हैं?4. निंदक निरे राखिए: कबीर के इस सूत्र से करें अपनी भीतरी सफाई5. पन्ना की तमन्ना और अध्यात्म: फिल्मी गीतों में छिपा जीवन का गहरा सच---सामान्य हैशटैग्स (Hashtags)#Lobh #Greed #BabaJiVijayVats #SelfRealization #Kabir #SpiritualAwakening #Surrender #EgoDissolution #TruthOfLife #InnerPeace #HinglishSatsang #Meditation #MokshDwar #Awareness---नाम हैशटैग्स (Name Hashtags)#BabaJi #VijayVats #Kabir #Nanak #Mahaveer #Buddha #Krishna #LilaPrasad

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This episode was published on March 25, 2026.

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