EPISODE · Mar 26, 2026 · 1H 21M
27 Mar 26 - तुम्हारा "होना" ही सबसे बड़ा दुख है! दुख से मुक्ति का मार्ग!!
from Baba ji Vijay Vats · host Baba ji Vijay Vats
00:00 - सत्संग का प्रारंभ: संसार में दुख की व्यापकता (Beginning of Satsang)00:29 - मैं दुखी हूँ। इस दुख से पार पाने का इलाज क्या है?03:09 - विडंबना: मनुष्य वह मरीज है जो अपना डॉक्टर खुद है, फिर भी दुखी है06:41 - गहरा आध्यात्मिक सूत्र: "तुम्हारा होना (अहंकार) ही दुख है"12:25 - खुद ही को कर बुलंद इतना: अहंकार के शिखर और ईश्वरीय रज़ा15:10 - गीत: "हर दुआ मेरी किसी दीवार से टकरा गई" - प्रार्थना का दर्द 🎶18:07 - ठहरने का विज्ञान: संत के सानिध्य में ही मन शांत हो सकता है22:52 - अमीर और गरीब का साझा दुख: गरीबी बनाम अमीरी की "चौकीदारी"28:20 - "आराम" और "राम" में क्या अंतर है? उत्तेजना बनाम शांति35:45 - इंद्रियों की तृप्ति बनाम आंतरिक तृप्ति: उत्तेजना रहित अवस्था का सच45:10 - परमात्मा 'अज्ञात' (Unknown) नहीं, 'अज्ञ' (Unknowable) है52:15 - स्वर्ग और नर्क के नाम पर होने वाली रूहानी लूट से कैसे बचें?01:02:40 - समाज के लिए संत का होना क्यों ज़रूरी है? (Importance of a Master)01:10:15 - मन की भाग-दौड़ और शाश्वत ठहराव का रूहानी विज्ञान01:15:40 - पूर्ण समर्पण: जब 'मैं' मिटता है, तभी तृप्ति मिलती है01:21:05 - अंतिम संकीर्तन: "तृप्ति की अवस्था" और आशीर्वाद
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