EPISODE · Sep 11, 2022 · 4 MIN
4. दिमाग का खेल
from Gita Acharan · host Siva Prasad
गीता हमें हमारी इंद्रियों के बारे में समझने पर जोर देती है क्योंकि वे हमारे आंतरिक और बाहरी दुनिया के बीच के द्वार हैं। तंत्रिका विज्ञान(न्यूरो साइंस) ने कहा है, न्यूरॉन्स जो एक साथ काम करते हैं, एक साथ जुडक़र श्रृंखला बनाते हैं जिसको हार्डवायरिंग कहते हैं। गीता के शब्द भी उस समय की भाषा का प्रयोग करते हुए ऐसा ही संदेश देते हैं। हमारे मस्तिष्क में लगभग 100 अरब न्यूरॉन होते हैं। उनमें से कुछ डी.एन.ए. द्वारा शरीर के स्वचालित कार्यों की देखभाल के लिए जन्म से ही जुड़े होते हैं और कुछ हमारे जीवन काल के दौरान हमारे द्वारा जोड़े जाते हैं। उदहारण के लिये गाड़ी चलाना सीखने के पहले दिन हम सभी को गाड़ी चलाना मुश्किल लगा और फिर धीरे-धीरे इसकी आदत हो गई। यह हार्ड वायरिंग के कारण ही है जो मस्तिष्क अप्रयुक्त न्यूरॉन्स के साथ ड्राइविंग में शामिल सभी गतिविधियों को समन्वयित करने के लिए करता है। ऐसा ही सभी कौशल के साथ होता है। साधारण चलने से लेकर खेलकूद तक और शल्य चिकित्सक(सर्जन) द्वारा जटिल शल्य चिकित्सा(सर्जरी) तक। हार्डवायरिंग मस्तिष्क के लिए बहुत अधिक ऊर्जा बचाता है और हमारे जीवन को आसान बनाता है। नया जन्मा बच्चा‘सार्वभौमिक’ होता है अर्थात एक कोरे कागज की तरह होता है जो नई चीजों को ग्रहण करने में सक्षम होता है। परिवार, साथियों और समाज द्वारा वातावरण के अनुकूल बनाने से दिमाग में कई तंत्रिका प्रतिरूप (न्यूरल पैटर्न) बनते हैं। ये प्रतिरूप हमें बाहरी दुनिया से विशेष प्रकार के आवेगों और संवेदनाओं की तलाश करने की उम्मीद करते हैं और हम उन्हें प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। उदाहरण के लिए, हम सभी अपने बारे में प्रशंसा सुनना पसंद करते हैं क्योंकि हमारे तंत्रिका प्रतिरूप उसी की अपेक्षा करते हैं और उसका आनंद लेते हैं। ये प्रतिरूप उम्मीदों, पूर्वाग्रहों और निर्णयों की नींव हैं। किए गए प्रयासों के साथ इन प्रतिरूपों का संयोजन, अहंकार के अलावा और कुछ नहीं है और आज की दुनिया में, सफलता और खुशी को हमारे तंत्रिका प्रतिरूप से मेल खाने वाली संवेदनाओं के रूप में परिभाषित किया जाता है। एक बार ये प्रतिरूप टूट जाने पर व्यक्ति स्वयं में केंद्रित हो जाता है। परिणामस्वरूप आनंद प्रवाहित होता है क्योंकि हम बाहरी संवेदनाओं पर निर्भर नहीं हैं और श्रीकृष्ण इसे‘आत्मरमन’ कहते हैं। गीता जीवन जीने का अर्थ, इन प्रतिरूपों को तोडऩे के लिए गीता में दिए गए विभिन्न निर्देशों / विधियों का उपयोग करना है, जो हमें आनन्दित और बंधनों से मुक्त बनाता है।
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