EPISODE · Mar 29, 2022 · 5 MIN
4. S01 - E04 दोस्तों, आपका स्वागत, एहतराम है मेरे इस नए घर में! 🥰
from 'Wah! Ye Diariyaan' (स्वरचित १००+ गज़लें, नज़्में, और कविताऐं)!'
आई कुछ बातें करते हैं; कुछ एक-दूसरे की सुनते, और कुछ अपनी सुनाते हैं!🤗-हमसफ़र हैं, हमकदम हैं, हमनज़र हों, तो है बात,एक दूजे की पनाहों का असर हो, तो है बात,यूं तो हम मिलते हैं, जब नसें गुलजार हों,पर ख़िज़ाँ में साथ हों हम अगर, तो है बात!-छोड़ दें कुछ देर को, अपनी बेईमानी लतें,मुस्कुरा कर ढायें क़हर, हर किसी पर, तो है बात!-हमसफ़र हैं, हमकदम हैं, हमनज़र हों, तो है बात,एक दूजे की पनाहों का असर हो, तो है बात,यूं तो हम मिलते हैं, जब नसें गुलजार हों,पर ख़िज़ाँ में साथ हों हम अगर, तो है बात!-तालीम है, वक़्त है और हुनर भी साथ है,इस आशियां को बनाएं हम शहर, तो है बात!-हमसफ़र हैं, हमकदम हैं, हमनज़र हों, तो है बात,एक दूजे की पनाहों का असर हो, तो है बात,यूं तो हम मिलते हैं, जब नसें गुलजार हों,पर ख़िज़ाँ में साथ हों हम अगर, तो है बात!-गम नहीं गर ख्वाब पूरे नहीं हो सकते तो क्या,मंजिल-ए-हासिल में छोड़ें, न कोई कसर तो है बात!-हमसफ़र हैं, हमकदम हैं, हमनज़र हों, तो है बात,एक दूजे की पनाहों का असर हो, तो है बात,यूं तो हम मिलते हैं, जब नसें गुलजार हों,पर ख़िज़ाँ में साथ हों हम अगर, तो है बात!-है यक़ीन, ना था यकीन, कि यूं ही मिल जाओगे तुम,खैर, मिलते जो रहो दोबारा, तो है बात!-हमसफ़र हैं, हमकदम हैं, हमनज़र हों, तो है बात,एक दूजे की पनाहों का असर हो, तो है बात,यूं तो हम मिलते हैं, जब नसें गुलजार हों,पर ख़िज़ाँ में साथ हों हम अगर, तो है बात!
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4. S01 - E04 दोस्तों, आपका स्वागत, एहतराम है मेरे इस नए घर में! 🥰
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