8. S01 - E08 जंग में निकले अकेले, बिना सिपहसालार के!🤺 episode artwork

EPISODE · Mar 29, 2022 · 9 MIN

8. S01 - E08 जंग में निकले अकेले, बिना सिपहसालार के!🤺

from 'Wah! Ye Diariyaan' (स्वरचित १००+ गज़लें, नज़्में, और कविताऐं)!'

हर रोज़ हम अपने अपने घर से निकलते हैं, जिंदगी की उस जंग में शामिल होने!😀-जंग में निकले अकेले, बिना सिपहसालार के,जान ले ली दुश्मनों की, बिना सिपहसालार के,आखिरी जंग काश ये हो, बस यही सोचा किए,अब नहीं होता गुज़र, बिना सिपहसालार के! -ख़ाक में मिल जाए, या सर क़लम हो जाए चाहे,कुछ तो कर गुजरेंगे हम, बिना सिपहसालार के! -जंग में निकले अकेले, बिना सिपहसालार के,जान ले ली दुश्मनों की, बिना सिपहसालार के,आखिरी जंग काश ये हो, बस यही सोचा किए,अब नहीं होता गुज़र, बिना सिपहसालार के! -ताज मेरे दुश्मनों का, सज नहीं सकता है क्या?न सोच ग़ुरबत दुश्मनों की, बिना सिपहसालार के! -जंग में निकले अकेले, बिना सिपहसालार के,जान ले ली दुश्मनों की, बिना सिपहसालार के,आखिरी जंग काश ये हो, बस यही सोचा किए,अब नहीं होता गुज़र, बिना सिपहसालार के! -क्यूँ है हसरत सर्द तेरी, क्यूँ कलेजा गर्द है,होता है ये गर तू निकले, बिना सिपहसालार के! -जंग में निकले अकेले, बिना सिपहसालार के,जान ले ली दुश्मनों की, बिना सिपहसालार के,आखिरी जंग काश ये हो, बस यही सोचा किए,अब नहीं होता गुज़र, बिना सिपहसालार के! -हुक्मरानों ने कहा, तू चीज़ क्या, औकात क्या,सोचा कह दूं, पर नहीं, बिना सिपहसालार के! -जंग में निकले अकेले, बिना सिपहसालार के,जान ले ली दुश्मनों की, बिना सिपहसालार के,आखिरी जंग काश ये हो, बस यही सोचा किए,अब नहीं होता गुज़र, बिना सिपहसालार के! -'ऐ दर्द', शर्बत में मिला कर अम्ल दे देते हैं लोग,बर्बाद हैं जो लड़ पड़ें, बिना सिपहसालार के! -जंग में निकले अकेले, बिना सिपहसालार के,जान ले ली दुश्मनों की, बिना सिपहसालार के,आखिरी जंग काश ये हो, बस यही सोचा किए,अब नहीं होता गुज़र, बिना सिपहसालार के!

Episode metadata supplied by the publisher feed · Published Mar 29, 2022

Embed this episode

NOW PLAYING

8. S01 - E08 जंग में निकले अकेले, बिना सिपहसालार के!🤺

0:00 9:07

No transcript for this episode yet

We transcribe on demand. Request one and we'll notify you when it's ready — usually under 10 minutes.

No similar episodes found.

No similar podcasts found.

Frequently Asked Questions

How long is this episode of 'Wah! Ye Diariyaan' (स्वरचित १००+ गज़लें, नज़्में, और कविताऐं)!'?

This episode is 9 minutes long.

When was this 'Wah! Ye Diariyaan' (स्वरचित १००+ गज़लें, नज़्में, और कविताऐं)!' episode published?

This episode was published on March 29, 2022.

Can I download this 'Wah! Ye Diariyaan' (स्वरचित १००+ गज़लें, नज़्में, और कविताऐं)!' episode?

Yes. Use the download control on the episode player to save the publisher-provided media file.
URL copied to clipboard!