EPISODE · Apr 2, 2022 · 6 MIN
9. S01 - E09 कल मेरी, मेरे मुकद्दर से मुलाकात हो गई!☺️
from 'Wah! Ye Diariyaan' (स्वरचित १००+ गज़लें, नज़्में, और कविताऐं)!'
मुकद्दर है ऐसा हसी़न, की कब क्या कर दे, कुछ पता ही नहीं!🥰-कल मेरी मेरे मुक़द्दर से मुलाकात हो गई,चमचमती सुबह से, स्याह रात हो गई,वो चल रहा था साथ मेरे, पर क्यूँ पता नहीं,जैसे ही मैं जल गया पूरा, बरसात हो गई! -मुझको यक़ीं था हर गज़र, पर मेरे मुकद्दर को नहीं,मैंने छूने की कोशिश जो की, मेरी सारी क़ायनात हो गई! -कल मेरी मेरे मुक़द्दर से मुलाकात हो गई,चमचमती सुबह से, स्याह रात हो गई,वो चल रहा था साथ मेरे, पर क्यूँ पता नहीं,जैसे ही मैं जल गया पूरा, बरसात हो गई! -जुगनूओं के बीच में रहोगे तो खत्म हो जाओगे,फिर न कहना, मेरी क्या औकात हो गई! -कल मेरी मेरे मुक़द्दर से मुलाकात हो गई,चमचमती सुबह से, स्याह रात हो गई,वो चल रहा था साथ मेरे, पर क्यूँ पता नहीं,जैसे ही मैं जल गया पूरा, बरसात हो गई! -जब शगुन के पन्ने पलटे, कुछ सूखे से पत्ते मिले,न जाने कब ज़िल्द उसकी, वारदात हो गई! -कल मेरी मेरे मुक़द्दर से मुलाकात हो गई,चमचमती सुबह से, स्याह रात हो गई,वो चल रहा था साथ मेरे, पर क्यूँ पता नहीं,जैसे ही मैं जल गया पूरा, बरसात हो गई! -ऐ दर्द' नक़्श उलझे, अक्स सुलझे, कैसी कयामत, कैसा सफ़र,एक अरसा गुज़र चुका क्या? सरकार की क्या जात हो गई! -कल मेरी मेरे मुक़द्दर से मुलाकात हो गई,चमचमती सुबह से, स्याह रात हो गई,वो चल रहा था साथ मेरे, पर क्यूँ पता नहीं,जैसे ही मैं जल गया पूरा, बरसात हो गई!
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9. S01 - E09 कल मेरी, मेरे मुकद्दर से मुलाकात हो गई!☺️
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