EPISODE · Jun 22, 2023 · 4 MIN
A Letter of Love | Hindi Nazm | Written By Gaurav Anand | #lovepoetry #lovepoems #lovequotes #poetryoflove #loveandpoetry #loveisintheair #heartfeltpoetry #romancepoetry #soulfulpoetry #beautifulpoetr
from WeatherWood Stories | Hindi | English | Urdu · host gaurav anand
मुझे मन के कमरे की सफाई में कुछ मिला है एक ट्रंक है लोहे का पीले रंग से रंगा जिस पर जूही के सफ़ेद फूल बने है पतली, लम्बी, रेशमी मखमली लता के तरह बढ़ने वाली बड़ी क्षुप की तरह और उसमे रखा एक पत्र जिसमे तुम्हारा नाम , तुम्हारी कर के लिखा है और मेरा नाम नहीं सिर्फ प्रिय कर के लिखा है पत्र भी तुम्हारी तरह सुव्यवस्थित है हर एक लाइन हर एक अक्षर बांयी तरफ से थोडा हटकर पत्र के मजमून कुछ धुंधले पड़े है शायद इसलिए की साल हा साल दिल रोता रहा पर अब भी मैं इन्हें पढ़ सकता हूँ कुछ यूँ के मेरे दिन किसी अंगारे से हो गए है रातें लम्बी और बर्फ सी जमी है हसरतें उबासी लेने लगी है और तमन्नायें अंगड़ाई लेती है मन का सूरज भरी दोपहर डूब रहा है पूरा दिन सिर्फ एक करवट में गुजर रहा है मेरा बिस्तर मेरी तकिया भीगी है लगता है गर्म मौसम में गिरे पसीने से यूँ आंख मलने को जब हाँथ लगाया तो पता चला नहीं ये तो अश्रु धरा है जो शुष्क और सूखे गिलाफों को भिगो रही है वो पहला गुलाब का फूल जो तुम्हारे प्रेम निवेदन का प्रतीक है उसे कांच के एक मर्तबान में डाल दिया है इस उम्मीद में की जब तुम वापस लौटोगे तब तक ये उसी तरह ताज़ा और नम रहेगा जैसे मेरा और तुम्हारा प्रेम पतझड़ के इस मौसम में प्रेम वृक्ष की सूखी शाख मेरे चेहरे पर झूलती दिखती है मेरी माँ कई बार मेरे सर से ७ मिर्च बायीं ओर घुमा के जला चुकी है कुछ और भी किया है उसने नज़र उतरने को पर वो नज़र जो मुझे लगी है वो तुम्हारी है झील सी गहरी जिसमें मैंने उतर कर देखा है मेरा चेहरा दिखाई देता है जो अभी तक सिर्फ मेरा था पर अब तुमने अपना कॉपी राईट ले लिया मुझे उसकी रोयल्टी भी नहीं दी ना जाने कब ये यात्रा ख़त्म होगी तुम्हारे , तुम्हारे ननिहाल से वापस आने की मेरी विरह के अंगारों पर चलने की इस चाँद की जो दिन के उजालों में भी छुप के सफ़र करता है उन आंसुओं की जो यादों के घोड़ों पर निकल पड़े है अब कौन कह सकता है ये पत्र तुमने मुझे लिखा था जो किसी अमिट प्रेम का प्रवाह था इसमें लिखे प्रेम में डूबे हर एक अक्षर क्षुब्ध और शर्मशार है की तुम्हारी कलम से निकले तुमने भले ये पत्र पुल के किनारे खड़े होकर फाड़ कर नदी में प्रवाहित कर दिया हो पर इसके हर एक शब्द मैंने पुनः जोड़कर जो पत्र मेरे ह्रदय के ट्रंक में सहेज लिया है , उसे , उसे तुम कभी नहीं मिटा सकते ये पत्र मैं हर मौसम में निकलता हूँ गर्मी में मौसम में इसे धुप दिखता हूँ सावन में अरमानों की मिट्टी में दबाता हूँ जो शीत ऋतू आने तक अंकुरित हो जाये बसंत में सी पत्र में जो फूल आते है उन्हें तन्हाई की सुई से गूथ कर हार बनता हूँ पतझड़ में सूख जाने पर पुनः नम बीजों को इकठ्ठा कर लेता हूँ की गर्मियों में सुखा कर फिर से बरसात में इसका एक और पेड़ लगाना है मैं जाने कितने सालों से ये कर रहा हूँ ये हुनर जो मैंने न सीखा होता तो शायद मैं उस दिन ही मर गया होता जब तुमने इस पत्र को सिर्फ कागज़ समझ कर नदी में प्रवाहित किया था #lovepoetry #lovepoems #lovequotes #poetryoflove #loveandpoetry #loveisintheair #heartfeltpoetry #romancepoetry #soulfulpoetry #beautifulpoetry
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