EPISODE · Dec 31, 2025 · 2 MIN
Aao Prem Deep Ek Agyaat Jalao | Nirmala Putul
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
आओ प्रेम दीप एक अज्ञात जलाओ - निर्मला पुतुल आओ मन के सूने आँगन आओप्रेम पूरित भाव अनोखाएक मन हर दीप जलाओघर पूरा रौशन हो जावे जो दूर भगावे अंधियारेआओ भी ओलती आँगन ताखा भनसा गोहाल गलियारा वो तुलसी चौराहासर्वत्र आस के सपने सजाओ बरसों से बेजान हुई बस्ती की वो बुधनी काकी उसकी देहरी कुटिया आओ और अन्तरंग उसकी उम्मीद बनो कोई एक दीप दिखाओ काल कोठरी कब तक है जीना प्रिय के न आने तक ठीक कहाँ है आँखों का पथरानातेल बिना जब सूखे जब जब बाती ले आना सम्वेदन मन में जहाँ गिले शिकवे भूल सारेसंरक्षित रहते मानवता धन आओ मन के सूने आँगन आओ जहाँ न कोई अनुबंध प्रेम दीप एक अज्ञात जलाओ
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आओ प्रेम दीप एक अज्ञात जलाओ - निर्मला पुतुल आओ मन के सूने आँगन आओप्रेम पूरित भाव अनोखाएक मन हर दीप जलाओघर पूरा रौशन हो जावे जो दूर भगावे अंधियारेआओ भी ओलती आँगन ताखा भनसा गोहाल गलियारा वो तुलसी चौराहासर्वत्र आस के सपने सजाओ बरसों से बेजान हुई बस्ती की वो बुधनी काकी उसकी देहरी कुटिया आओ और अन्तरंग उसकी उम्मीद बनो कोई एक दीप दिखाओ काल कोठरी कब तक है जीना प्रिय के न आने तक ठीक कहाँ है आँखों का पथरानातेल बिना जब सूखे जब जब बाती ले आना सम्वेदन मन में जहाँ गिले शिकवे भूल सारेसंरक्षित रहते मानवता धन आओ मन के सूने आँगन आओ जहाँ न कोई अनुबंध प्रेम दीप एक अज्ञात जलाओ
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Aao Prem Deep Ek Agyaat Jalao | Nirmala Putul
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