EPISODE · Dec 16, 2025 · 2 MIN
Apna Abhinay Itna Accha Karta Hun | Naveen Sagar
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
अपना अभिनय इतना अच्छा करता हूँ । नवीन सागरघर से बाहर निकलाफिर अपने बाहर निकल करअपने पीछे-पीछे चलने लगापीछे मैं इतने फ़ासले पर छूटता रहाकि ओझल होने से पहले दिख जाता थाएक दिनघर लौटने के रास्ते में ओझल हो गयाओझल के पीछे कहाँ जाताघर लौट आयादीवारें धुँधली पड़ कर झुक-सी गईंसीढ़ियाँ नीचे से ऊपरऊपर से नीचे होने लगींपर वह घर नहीं लौटाघर से बाहर निकलाफिर मुझसे बाहर निकल कर चला गयामैं आईने में देखता हूँवह आईने में से मुझे नहीं देखतामैं बार-बार लौटता हूँपर वह नहीं लौटताघर में किसी को शक नहीं हैमूक चीज़ें जानती हैं पर मुझसे पूछती नहीं हैंकि वहकहाँ गया और तुम कौन हो!अपना अभिनय इतना अच्छा करता हूँकि हूबहू लगता हूँदरवाज़े खुल जाते हैं -नींद के नीम अँधेरे चलचित्र में जागा हुआसूने बिस्तर पर सोता हूँ।
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