EPISODE · Aug 14, 2024 · 2 MIN
Apni Devnagri Lipi | Kedarnath Singh
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
अपनी देवनागरी लिपि | केदारनाथ सिंहयह जो सीधी-सी, सरल-सीअपनी लिपि है देवनागरीइतनी सरल हैकि भूल गई है अपना सारा अतीतपर मेरा ख़याल है'क' किसी कुल्हाड़ी से पहलेनहीं आया था दुनिया में'च' पैदा हुआ होगाकिसी शिशु के गाल परमाँ के चुम्बन से!'ट' या 'ठ' तो इतने दमदार हैंकि फूट पड़े होंगेकिसी पत्थर को फोड़कर'न' एक स्थायी प्रतिरोध हैहर अन्याय का'म' एक पशु के रँभाने की आवाज़जो किसी कंठ से छनकरबन गयी होगी “माँ"!स' के संगीत मेंसंभव है एक हल्की-सी सिसकीसुनाई पड़े तुम्हें।हो सकता है एक खड़ीपाई के नीचेकिसी लिखते हुए हाथ कीतकलीफ़ दबी होकभी देखना ध्यान सेकिसी अक्षर में झाँककरवहाँ रोशनाई के तल मेंएक ज़रा-सी रोशनीतुम्हें हमेशा दिखाई पड़ेगी।यह मेरे लोगों का उल्लास हैजो ढल गया है मात्राओं में।अनुस्वार में उतर आया हैकोई कंठावरोध!पर कौन कह सकता हैइसके अंतिम वर्ण 'ह' मेंकितनी हँसी हैकितना हाहाकार !
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Apni Devnagri Lipi | Kedarnath Singh
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