EPISODE · Jun 11, 2024 · 1 MIN
Arrey Ab Aisi Kavita Likho | Raghuvir Sahay
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
अरे अब ऐसी कविता लिखो | रघुवीर सहायअरे अब ऐसी कविता लिखोकि जिसमें छंद घूमकर आयघुमड़ता जाय देह में दर्दकहीं पर एक बार ठहरायकि जिसमें एक प्रतिज्ञा करूंवही दो बार शब्द बन जायबताऊँ बार-बार वह अर्थन भाषा अपने को दोहरायअरे अब ऐसी कविता लिखोकि कोई मूड़ नहीं मटकायन कोई पुलक-पुलक रह जायन कोई बेमतलब अकुलायछंद से जोड़ो अपना आपकि कवि की व्यथा हृदय सह जायथामकर हँसना-रोना आजउदासी होनी की कह जाय।
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Arrey Ab Aisi Kavita Likho | Raghuvir Sahay
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