Atma-Bodha Lesson # 11 :
from Swami Atmananda Podcasts Hosted by Swami Atmananda Saraswati
आत्म-बोध के 11th श्लोक में पू गुरूजी श्री स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी ने बताया की इस श्लोक में भी आचार्य हमें यह बता रहे हैं की मनुष्यों का व्यावहारिक भेद एक सच्चाई है लेकिन गहराई में सब दिव्य हैं, और अगर वे चाहें तो अपनी प्रकृति को सुन्दर बनाकर अपने दिव्य स्वरुप का साक्षात्कार कर सकते हैं। व्यवहार में भेद के आधार से ही कर्तव्यताओं का निर्धारण होता है। उपाधि हमारी कैसी हो यह हम सब जैसी भी चाहे वो बना सकते हैं। समस्त औपाधिक भेद आत्मा पर आरोपित होते हैं अर्थातृ उपाधि आत्मा को स्पर्श तक नहीं करती है।
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