Atma-Bodha Lesson # 12 :
from Swami Atmananda Podcasts Hosted by Swami Atmananda Saraswati
आत्म-बोध के 12th श्लोक में पू गुरूजी श्री स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी ने बताया की इस श्लोक में भी आचार्य हमें अपनी उपाधियों का परिचय देना प्रारम्भ करते हैं। सबसे पहले हमारे स्थूल शरीर का परिचय देते हैं। जब हम शरीर को शरीर देखने लगें तो उसे आत्मा समझने की भूल समाप्त हो जाएगी। यह ही इस विवेक का प्रयोजन होता है। स्थूल शरीर किस उपादान से बनता है? इसकी विशिष्टता का हेतु क्या होता है ? और इसका प्रयोजन क्या होता है? इस सभी प्रश्नो का उत्तर इस श्लोक में दिया गया है।
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