Atma-Bodha Lesson # 16 :
from Swami Atmananda Podcasts Hosted by Swami Atmananda Saraswati
आत्म-बोध के 16th पाठ एवं श्लोक में पू गुरूजी श्री स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी ने बताया की इस श्लोक में भी आचार्य हमें आत्मा को उपाधियों से युक्ति पूर्वक अलग देखने की प्रेरणा दे रहे हैं। अज्ञान में जीते हुए हम सब ने अनात्मा के साथ बहुत ही घनिष्ठ सम्बन्ध और तादात्म्य स्थापित कर लिया है। हम लोग सम्मोहित से हो गए हैं। जितना तीव्र तदंतय है उतना ही तीव्र युक्ति पूर्वक अपने मोह की निवृत्ति के लिए मनन और चिंतन होना चाहिए। यहाँ धान में से चावल और भूसी अलग करने का दृष्टांत दे रहे हैं। बस उसी तरह हमें विवेक करना चाहिए और अपनी निराधार धारणाओं से अपने आप को मुक्त करते हुए शुद्धरूप देखना चाहिए।
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