Atma-Bodha Lesson # 17 :
from Swami Atmananda Podcasts Hosted by Swami Atmananda Saraswati
आत्म-बोध के 17th श्लोक में पू गुरूजी श्री स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी ने बताया की इस श्लोक में हमें आचार्यश्री बता रहे हैं की यद्यपि हम सब की आत्मा सर्वव्यापी ब्रह्म है लेकिन ये हमें हर जगह दिखाई नहीं दे सकती है। जैसे हम सबका प्रतिबिम्ब यद्यपि हर जगह मंद रूप से होने के बावजूद हमें हर जगह दिखाई नहीं देता है, लेकिन दर्पण जैसे उपकरण में दिखाई दे जाता है। उसी तरह से आत्मा का साक्षात्कार केवल एक शुद्ध अंतःकरण में ही दिखाई देता है।
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