Atma-Bodha Lesson # 23 :
from Swami Atmananda Podcasts Hosted by Swami Atmananda Saraswati
आत्म-बोध के 23rd श्लोक में आचार्यश्री हमें अनात्म के धर्मों का अपवाद करने की प्रक्रिया बता रहे हैं। पिछले दो श्लोकों में हम लोगों ने देह, इन्द्रिय, और मन में आत्म-बुद्धि का अपवाद किया और अब इस श्लोक में बुद्धि के धर्मों का अपने ऊपर से अपवाद करते हैं। अपवाद या निषेध अत्यंत युक्ति पूर्वक होता है, अर्थात हम लोगों को यह बात ठीक से समझनी पड़ती है। यहाँ पर युक्ति यह है की जब बुद्धि होती है तभी हम लोगों में राग, इच्छा, सुख और दुःख आदि होते हैं, लेकिन जब गहरी निद्रा आदि की अवस्था में जाते हैं तब ये राग आदि कुछ भी नहीं होते हैं। इससे यह स्पष्ट हो जाता है की ये राग आदि बुद्धि के कारण ही आते हैं। अतः अपवाद उचित है।
Embed this episode
No transcript yet.