Atma-Bodha Lesson # 38 :
from Swami Atmananda Podcasts Hosted by Swami Atmananda Saraswati
आत्म-बोध के 38th श्लोक में आचार्यश्री हमें आत्म-अभ्यास के लिए एक नया आयाम प्रदान कर रहे हैं - वो है ध्यान और समाधी का अभ्यास। ध्यान रहे की हमें यह साधना पहले नहीं प्रदान करी गयी, बल्कि जब हमें अहम् ब्रहास्मि का स्पष्ट ज्ञान हो गया तब ही प्रदान करी जा रही है। जब ज्ञान हुआ ही नहीं है तो किसपे ध्यान करें? इसलिए लोग ध्यान के नाम पर केवल मन को शांत करने का प्रयास करते हैं, वो वस्तुतः ठीक ध्यान नहीं है। ध्यान परमात्मा का, आत्मा का, सत्य का करना चाहिए। एकान्त में बैठकर अंतर्मुख होकर आत्मा के तरफ ध्यान मोड़ें और इसे अनंत और एक, अखंड देखें। अर्थात आत्मा को स्पष्ट रूप से ब्रह्म देखें - और इसके प्रति प्रगाढ़ महत्त्व की बुद्धि उत्पन्न करें। जिसके प्रति महत्त्व की बुद्धि होती है उसके प्रति ही भावना जगती है। इस पाठ के प्रश्न : १. ध्यान का उचित समय कौन सा होता है - ज्ञान के पूर्व या बाद में ? २. ध्यान के लिए एकान्त-वास क्यों करना चाहिए? ३. भावना उत्पन्न करना क्या होता है?
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