Atma-Bodha Lesson # 4:
from Swami Atmananda Podcasts Hosted by Swami Atmananda Saraswati
आत्म-बोध के चौथे श्लोक में पू गुरूजी श्री स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी ने बताया की इस श्लोक की संगती यह है की हम सबके अंदर मात्र अज्ञान नहीं है बल्कि कुछ उल्टा विपरीत ज्ञान भी है। यह उल्टा ज्ञान प्रॉब्लम को कॉम्प्लिकेट कर देता है। जिसके अंदर केवल अज्ञान होता है वो व्यक्ति विनम्र होता है और ठीक ज्ञान की पूरी कोशिश करता है लेकिन जब विपरीत ज्ञान आ जाता है तब प्रामाणिक ज्ञान के लिए जिज्ञासा के बजे अपने काल्पनिक अल्पता की निवृत्ति के लिए चेष्टा होने लगती हैं। प्रत्येक व्यक्ति अपने आप को छोटा देखता है और उसकी दलील यह है की हमें छोटापन दिखाई पड़ता है - अनुभव होता है। इसके उत्तर में यह श्लोक दिया गया है। यहाँ इस श्लोक में बताते हैं की किसी भी अनुभव को हमें सच नहीं मान लेना चाहिए। ध्यान पूर्वक व्याख्या सुने।
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