Atma-Bodha Lesson # 9 :
from Swami Atmananda Podcasts Hosted by Swami Atmananda Saraswati
आत्म-बोध के 9th श्लोक में पू गुरूजी श्री स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी ने बताया की इस श्लोक में भी आचार्य जगत का रहस्य बता है। जिसे पिछले श्लोक में परमेश्वर, जगदाधार, जगत का अभिन्न निनित्त उपादान कारण आदि बताया था - अब उसका स्वरुप लक्षण बता रहे हैं। उसका स्वरुप लक्षण है - सत और चित स्वरूपता। अर्थात मात्र सत्ता जो की स्वप्रकाश होती है। इसी के ऊपर पूरा जगत कल्पित है। यह सृष्टि का सिद्धांत ही अद्वैत की सिद्धि के लिए अनुकूल होता है।
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