EPISODE · Jan 8, 2026 · 3 MIN
Baat Un Dinon Ki Hai | Rajendra Sharma
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
बात उन दिनों की है । राजेंद्र शर्माबात उन दिनों की हैजब नहीं था रंगीन टेलीविज़न इक्का-दुक्का समृद्ध घरों में ही होता थाशटर वाला ब्लैक एंड व्हाइट टेलीविज़न ।रविवार को आने वाली पिक्चरदेखने पूरा मोहल्ला पहुँचताटेलीविज़न वाले घरअहाते मे लगाया जाता टेलीविज़न पूरा मोहल्ला देखता पिक्चरमध्यातंर मे जब सलमा सुल्तानअपने जूड़े मे लगाए गुलाब का फूलअपनी बेशक़ीमती मुस्कुराहट से पढ़ती समाचारपूरे मोहल्ले को चाय पिलाताटेलीविज़न वाला घर।इस बीच लोग बतियातेपूछते एक-दूसरे का हालपिक्चर ख़त्म होने परपूरा मोहल्ला लौटताअपने-अपने घरमनोरंजन के साथसंबंधों की असीम ऊष्मा के साथ।अब हर घर में रंगीन टेलीविज़न कोई किसी के यहाँ नहीं जातादेखने टेलीविज़न पुराने पड़ोसी को नहीं पताअपने नए पड़ोसी का नामनए पड़ोसी की कोई दिलचस्पी नहींपुराने पड़ोसी मेंअब हर आदमी है अपने में समृद्धबात उन दिनों की हैजब नहीं था मोबाइल फ़ोनइक्का-दुक्का समृद्ध घरों में ही होता थाकाला चोग़े वाला टेलीफ़ोनजिसका नंबर पूरा मोहल्लाबाँटता अपने रिश्तेदारों कोपीपी के रूप मेंपड़ोसी का फ़ोन आतापाँच मिनट का समय माँगकरटेलीफ़ोन वाला पड़ोसीबुलाता अपने पड़ोसी कोवह आताफ़ोन अटैंड करता।फिर वही बैठता कुछ देरभाई साहब, भाभी जी से बतियातापूछता और बताता कुशल-क्षेमचाय पीकर वहाँ से लौटतासंबंधों की असीम ऊष्मा के साथअब हर जेब में है मोबाइलहर आदमी है समृद्धकोई किसी के यहाँ नहीं सुनने जाताटेलीफ़ोनपुराने पड़ोसी को नहीं पतानए पड़ोसी का नामनए पड़ोसी की कोई दिलचस्पी नहींपुराने पड़ोसी मेंमोहल्ले भर मेंसंबंधों की जो ऊष्मा महकती थीदिन-रातवह अब लुप्त हो गई हैसोचता हूँ मैंसमृद्धिक्यों लील लेती हैसंबंधों की ऊष्मा...
What this episode covers
बात उन दिनों की है । राजेंद्र शर्माबात उन दिनों की हैजब नहीं था रंगीन टेलीविज़न इक्का-दुक्का समृद्ध घरों में ही होता थाशटर वाला ब्लैक एंड व्हाइट टेलीविज़न ।रविवार को आने वाली पिक्चरदेखने पूरा मोहल्ला पहुँचताटेलीविज़न वाले घरअहाते मे लगाया जाता टेलीविज़न पूरा मोहल्ला देखता पिक्चरमध्यातंर मे जब सलमा सुल्तानअपने जूड़े मे लगाए गुलाब का फूलअपनी बेशक़ीमती मुस्कुराहट से पढ़ती समाचारपूरे मोहल्ले को चाय पिलाताटेलीविज़न वाला घर।इस बीच लोग बतियातेपूछते एक-दूसरे का हालपिक्चर ख़त्म होने परपूरा मोहल्ला लौटताअपने-अपने घरमनोरंजन के साथसंबंधों की असीम ऊष्मा के साथ।अब हर घर में रंगीन टेलीविज़न कोई किसी के यहाँ नहीं जातादेखने टेलीविज़न पुराने पड़ोसी को नहीं पताअपने नए पड़ोसी का नामनए पड़ोसी की कोई दिलचस्पी नहींपुराने पड़ोसी मेंअब हर आदमी है अपने में समृद्धबात उन दिनों की हैजब नहीं था मोबाइल फ़ोनइक्का-दुक्का समृद्ध घरों में ही होता थाकाला चोग़े वाला टेलीफ़ोनजिसका नंबर पूरा मोहल्लाबाँटता अपने रिश्तेदारों कोपीपी के रूप मेंपड़ोसी का फ़ोन आतापाँच मिनट का समय माँगकरटेलीफ़ोन वाला पड़ोसीबुलाता अपने पड़ोसी कोवह आताफ़ोन अटैंड करता।फिर वही बैठता कुछ देरभाई साहब, भाभी जी से बतियातापूछता और बताता कुशल-क्षेमचाय पीकर वहाँ से लौटतासंबंधों की असीम ऊष्मा के साथअब हर जेब में है मोबाइलहर आदमी है समृद्धकोई किसी के यहाँ नहीं सुनने जाताटेलीफ़ोनपुराने पड़ोसी को नहीं पतानए पड़ोसी का नामनए पड़ोसी की कोई दिलचस्पी नहींपुराने पड़ोसी मेंमोहल्ले भर मेंसंबंधों की जो ऊष्मा महकती थीदिन-रातवह अब लुप्त हो गई हैसोचता हूँ मैंसमृद्धिक्यों लील लेती हैसंबंधों की ऊष्मा...
NOW PLAYING
Baat Un Dinon Ki Hai | Rajendra Sharma
No transcript for this episode yet