EPISODE · Aug 25, 2024 · 1 MIN
Bache Hue Shabd | Madan Kashyap
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
बचे हुए शब्द | मदन कश्यप जितने शब्द आ पाते हैं कविता में उससे कहीं ज़्यादा छूट जाते हैं।बचे हुए शब्द छपछप करते रहते हैंमेरी आत्मा के निकट बह रहे पनसोते मेंबचे हुए शब्दथल कोजल कोहवा कोअग्नि कोआकाश को लगातार करते रहते हैं उद्वेलितमैं इन्हें फाँसने की कोशिश करता हूँ तो मुस्कुरा कर कहते हैं: तिकड़म से नहीं लिखी जाती कविता और मुझ पर छींटे उछाल कर चले जाते हैं दूर गहरे जल मेंमैं जानता हूँ इन बचे हुए शब्दों में ही बची रहेगी कविता!
NOW PLAYING
Bache Hue Shabd | Madan Kashyap
No transcript for this episode yet
Similar Episodes
May 1, 2026 ·16m
Apr 29, 2026 ·46m
Apr 29, 2026 ·18m
Apr 28, 2026 ·49m