EPISODE · Jul 10, 2025 · 2 MIN
Behnein | Abha Bodhisattva
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
बहनें | आभा बोधिसत्त्वबहनें होती हैं,अनबुझ पहेली-सीजिन्हें समझना या सुलझानाइतना आसान नही होता जितनालटों की तरह उलझी हुई दुनिया को ,इन्हें समझते और सुलझाते ...मेंविदा करने का दिन आ जाता है न जाने कबइन्हें समझ लिया जाता अगर वो होती ...कोई बन्द तिजोरी...जिन्हे छुपा कर रखते भाई या कोई...देखते सिर्फ़...या ...कि होती ...सांझ का दिया ...जिनके बिना ...न होती कहीं रोशनी...पर नही़बहनें तो पानी होती हैंबहती हैं... इस घर से उस घरप्यास बुझातींजी जुड़ातीं...किस-किस काकिस-किस के साथ विदाहो जातीं चुपचाप...दूर तक सुनाई देती उनकीरुलाई...कुछ दूर तक आती है...माँकुछ दूर तक भाईसखियाँ थोड़ी और दूर तकचलती हैं रोती-धोती... ...फिर वे भी लौट जाती हैं घरविदा के दिन काइंतज़ार करने...इन्हें सुलझाने में लग जाते हैं...भाई या कोई...।
Embed this episode
NOW PLAYING
Behnein | Abha Bodhisattva
No transcript for this episode yet
Similar Episodes
No similar episodes found.