EPISODE · Dec 19, 2020 · 12 MIN
बेथलेहेम कि ओर यात्रा - (आगमन काल विशेष ) - 21 वां दिन जकरियस Journey to Bethlehem
from Greater Glory of God · host FR. C. GEORGE MARY CLARET
Click to watch video https://youtu.be/UmGzGKl9cFQ Greater Glory of God प्रस्तुत करता है आगमन काल विशेष बेथलेहेम कि ओर यात्रा आगमन काल में 26 व्यक्तियों के साथ बेथलेहेम कि ओर यात्रा 21 वां दिन जकरियस सन्त लूकस का सुसमाचार अध्याय 01 योहन बपतिस्ता के जन्म का सन्देश 5) यहूदिया के राजा हेरोद के समय अबियस के दल का जकरियस नामक एक याजक था। उसकी पत्नी हारून वंश की थी और उसका नाम एलीज़बेथ था। 6) वे दोनों ईश्वर की दृष्टि में धार्मिक थे-वे प्रभु की सब आज्ञाओं और नियमों का निर्दोष अनुसरण करते थे। 7) उनके कोई सन्तान नहीं थी, क्योंकि एलीज़बेथ बाँझ थी और दोनों बूढ़े हो चले थे। 8) जकरियस नियुक्ति के क्रम से अपने दल के साथ याजक का कार्य कर रहा था। 9) किसी दिन याजकों की प्रथा के अनुसार उसके नाम 10) चिट्टी निकली कि वह प्रभु के मन्दिर में प्रवेश कर धूप जलाये। 11) धूप जलाने के समय सारी जनता बाहर प्रार्थना कर रही थी। उस समय प्रभु का दूत उसे धूप की वेदी की दायीं और दिखाई दिया। 12) जकरियस स्वर्गदूत को देख कर घबरा गया और भयभीत हो उठा; 13) परन्तु स्वर्गदूत ने उस से कहा, "जकरियस! डरिए नहीं। आपकी प्रार्थना सुनी गयी है-आपकी पत्नी एलीज़बेथ के एक पुत्र उत्पन्न होगा, आप उसका नाम योहन रखेंगे। 14) आप आनन्दित और उल्लसित हो उठेंगे और उसके जन्म पर बहुत-से लोग आनन्द मनायेंगे। 15) वह प्रभु की दृष्टि में महान् होगा, अंगूरी और मदिरा नहीं पियेगा, वह अपनी माता के गर्भ में ही पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो जायेगा 16) और इस्राएल के बहुत-से लोगों का मन उनके प्रभु-ईश्वर की ओर अभिमुख करेगा। 17) वह पिता और पुत्र का मेल कराने, स्वेच्छाचारियों को धर्मियों की सद्बुद्धि प्रदान करने और प्रभु के लिए एक सुयोग्य प्रजा तैयार करने के लिए एलियस के मनोभाव और सामर्थ्य से सम्पन्न प्रभु का अग्रदूत बनेगा।" 18) जक़रियस ने स्वर्गदूत से कहा, "इस पर मैं कैसे विश्वास करूँ? क्योंकि मैं तो बूढ़ा हूँ और मेरी पत्नी बूढ़ी हो चली है।" 19) स्वर्गदूत ने उसे उत्तर दिया, "मैं गब्रिएल हूँ-ईश्वर के सामने उपस्थित रहता हूँ। मैं आप से बातें करने और आप को यह शुभ समाचार सुनाने भेजा गया हूँ। 20) देखिए, जिस दिन तक ये बातें पूरी नहीं होंगी, उस दिन तक आप मौन रहेंगे और बोल नहीं सकेंगे; क्योंकि आपने मेरी बातों पर, जो अपने समय पर पूरी होंगी, विश्वास नहीं किया।" 21) जनता जकरियस की बाट जोह रही थी और आश्चर्य कर रही थी कि वह मन्दिर में इतनी देर क्यों लगा रहा है। 22) बाहर निकलने पर जब वह उन से बोल नहीं सका, तो वे समझ गये कि उसे मन्दिर में कोई दिव्य दर्शन हुआ है। वह उन से इशारा करता जाता था, और गूंगा ही रह गया। 23) अपनी सेवा के दिन पूरे हो जाने पर वह अपने घर चला गया। 24) कुछ समय बाद उसकी पत्नी एलीज़बेथ गर्भवती हो गयी। उसने पाँच महीने तक अपने को यह कहते हुए छिपाये रखा, 25) "यह प्रभु का वरदान है। उसने समाज में मेरा कलंक दूर करने की कृपा की है।" योहन बपतिस्ता का जन्म 56) लगभग तीन महीने एलीज़बेथ के साथ रह कर मरियम अपने घर लौट गयी। 57) एलीज़बेथ के प्रसव का समय पूरा हो गया और उसने एक पुत्र को जन्म दिया। 58) उसके पड़ोसियों और सम्बन्धियों ने सुना कि प्रभु ने उस पर इतनी बड़ी दया की है और उन्होंने उसके साथ आनन्द मनाया। 59) आठवें दिन वे बच्चे का ख़तना करने आये। वे उसका नाम उसके पिता के नाम पर ज़करियस रखना चाहते थे, 60) परन्तु उसकी माँ ने कहा, "जी नहीं, इसका नाम योहन रखा जायेगा।" 61) उन्होंने उस से कहा, "तुम्हारे कुटुम्ब में यह नाम तो किसी का भी नहीं है"। 62) तब उन्होंने उसके पिता से इशारे से पूछा कि वह उसका नाम क्या रखना चाहता है। 63) उसने पाटी मँगा कर लिखा, "इसका नाम योहन है"। सब अचम्भे में पड़ गये। 64) उसी क्षण ज़करियस के मुख और जीभ के बन्धन खुल गये और वह ईश्वर की स्तुति करते हुए बोलने लगा। 65) सभी पड़ोसी विस्मित हो गये और यहूदिया के पहाड़ी प्रदेश में ये सब बातें चारों ओर फैल गयीं। 66) सभी सुनने वालों ने उन पर मन-ही-मन विचार कर कहा, "पता नहीं, यह बालक क्या होगा?" वास्तव में बालक पर प्रभु का अनुग्रह बना रहा। 67) उसका पिता पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो गया और उसने यह कहते हुए भविष्यवाणी कीः
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