EPISODE · Dec 10, 2020 · 15 MIN
बेथलेहेम कि ओर यात्रा - बारहवां दिन- मूसा (आगमन काल में 26 व्यक्तियों के साथ बेथलेहेम कि ओर यात्रा)
from Greater Glory of God · host FR. C. GEORGE MARY CLARET
Click to watch the video of it https://youtu.be/LHUNgbVdO2c Greater Glory of God Podcast प्रस्तुत करता है आगमन काल विशेष बेथलेहेम कि ओर यात्रा आगमन काल में 26 व्यक्तियों के साथ बेथलेहेम कि ओर यात्रा बारहवां दिन- मूसा निर्गमन ग्रन्थ 3:1-2 1) मूसा अपने ससुर, मिदयान के याजक, यित्रों की भेडें चराया करता था। वह उन्हें बहुत दूर तक उजाड़ प्रदेश में ले जा कर ईश्वर के पर्वत होरेब के पास पहुँचा। 2) वहाँ उसे झाड़ी के बीच में से निकलती हुई आग की लपट के रूप में प्रभु का दूत दिखाई दिया। उसने देखा कि झाड़ी में तो आग लगी है, किन्तु वह भस्म नहीं हो रही है। गणना ग्रन्थ 12:1-8 1) मूसा ने एक इथोपियाई स्त्री से विवाह किया था। इस इथोपियाई पत्नी के कारण मिरयम और हारून मूसा की निन्दा करने लगे। 2) उन्होंने कहा, ''क्या प्रभु केवल मूसा के द्वारा बोला है? क्या वह हमारे द्वारा भी नहीं बोला है?'' प्रभु ने यह सुना। 3) मूसा अत्यन्त विनम्र था। वह पृथ्वी के सब मनुष्यों में सब से अधिक विनम्र था। 4) प्रभु ने तुरन्त मूसा, हारून और मिरयम से कहा, ''तुम तीनों दर्शन-कक्ष जाओ''। तीनों वहाँ गये। 5) तब प्रभु बादल के खम्भे के रूप में उतर कर तम्बू के पास खड़ा हो गया। उसने हारून और मिरयम को बुलाया। दोनों आगे बढ़े 6) और प्रभु ने उन से कहा, ''मेरी बात ध्यान से सुनो। मैं तुम्हारे नबियों को दिव्य दर्षनों में दिखाई देता हूँ और स्वप्नों में उन से बातें करता हूँ। 7) मैं अपने सेवक मूसा के साथ ऐसा नहीं करता। मेरी सारी प्रजा में वही विश्वसनीय है। 8) मैं उसे पहेली नहीं बुझाता, बल्कि आमने-सामने स्पष्ट रूप से बातें करता हूँ। वह प्रभु का स्वरूप देखता है। मेरे सेवक मूसा की निन्दा करने में तुम्हें डर क्यों नहीं लगा?''
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