EPISODE · Mar 20, 2020 · 9 MIN
भगत के खत -1: पिता के एक कदम से शर्मिंदा हो गए थे भगत सिंह
from Pod Khaas · host Aaj Tak Radio
शहीद-ए-आज़म भगत सिंह, आज़ादी का वो परवाना जो अपने दो अन्य साथियों सुखदेव और राजगुरु के साथ वतन के लिए 23 मार्च 1931 को फांसी के फंदे पर हंसते-हंसते झूल गया. उनके शहीद दिवस के इस मौके पर 'आज तक रेडियो' लाया है भगत सिंह की कुछ चुनिंदा चिट्ठियों पर आधारित श्रृंखला 'भगत के ख़त'. इस भाग में सुनिए उनका वो पत्र जो उन्होंने अपना पिता को लिखा था. इसमें भगत सिंह ने अपने पिता के लिए बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया है.
What this episode covers
शहीद-ए-आज़म भगत सिंह, आज़ादी का वो परवाना जो अपने दो अन्य साथियों सुखदेव और राजगुरु के साथ वतन के लिए 23 मार्च 1931 को फांसी के फंदे पर हंसते-हंसते झूल गया. उनके शहीद दिवस के इस मौके पर 'आज तक रेडियो' लाया है भगत सिंह की कुछ चुनिंदा चिट्ठियों पर आधारित श्रृंखला 'भगत के ख़त'. इस भाग में सुनिए उनका वो पत्र जो उन्होंने अपना पिता को लिखा था. इसमें भगत सिंह ने अपने पिता के लिए बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया है.
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