EPISODE · Aug 21, 2021 · 3 MIN
भटकने का भय/Afraid to Stray.
from मार्ग सत्य जीवन | Marg Satya Jeevan · host मार्ग सत्य जीवन
भटकने का भय Afraid to Stray. तेरी भलाई कितनी महान है, जो तू ने अपने भय मानने वालों के लिए संचित कर रखी है, और मनुष्यों के सामने उन पर की है जो तेरी शरण में आते हैं। (भजन 31:19) भजन संहिता 31:19 से दो महत्वपूर्ण सत्यों पर ध्यान दें। 1. परमेश्वर की भलाई परमेश्वर की एक विशिष्ट भलाई है। अर्थात्, न केवल परमेश्वर की वह समान्य भलाई जिसे वह सब लोगों पर तब दिखाता है, जब वह सूर्य को भलों और बुरों दोनों पर उदय करता है (मत्ती 5:45), परन्तु एक विशिष्ट भलाई भी है, जो इस भजन के अनुसार उसके “भय मानने वालों” के लिए है। यह भलाई मापे जाने की क्षमता से बढ़कर कहीं अधिक महान है। यह अन्तहीन है। यह सर्वदा के लिए बनी रहती है। यह सर्व-व्यापक है। उसके भय मानने वालों के लिए केवल भलाई ही भलाई है। सब बातें उनकी भलाई को उत्पन्न करती हैं (रोमियों 8:28)। रोमियों 5:3-5 के अनुसार उनके क्लेश भी लाभ से भरे हुए हैं। परन्तु जो लोग उसका भय नहीं मानते हैं, वे एक अस्थाई भलाई को प्राप्त करते हैं। रोमियों 2:4-5 इसे इस प्रकार से वर्णित करता है: “या तू उसकी कृपा, सहनशीलता और धैर्य-रूपी धन को तुच्छ जानता है, और नहीं जानता कि परमेश्वर की कृपा तुझे मन-परिवर्तन की ओर ले आती है? परन्तु अपने हठीले और अपरिवर्तित मन के कारण तू परमेश्वर के प्रकोप के दिन के लिए और उसके सच्चे न्याय के प्रकट होने तक, अपने लिए क्रोध संचित कर रहा है।” कृपा। सहनशीलता। धैर्य। दया। भलाई। परन्तु इसका प्रत्युत्तर परमेश्वर के भय के स्थान पर हठीपन होता है। तो यह प्रथम सत्य है: परमेश्वर की भलाई। 2. परमेश्वर का भय
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