EPISODE · Mar 15, 2025 · 2 MIN
Capitalism | Gaurav Tiwari
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
कैपिटलिज़्म | गौरव तिवारी बाग में अक्सर नहीं तोड़े जाते गुलाबलोग या तो पसंद करते हैं उसकी ख़ुशबूया फिर डरते हैं उसमें लगे काँटों सेजो तोड़ने पर कर सकते हैंउन्हें ज़ख्मीवहीं दूसरी तरफ़ घासकुचली जाती है, रगड़ी जाती है,कर दी जाती है अपनी जड़ों से अलगसहती हैं अनेक प्रकार की प्रताड़नाएंफिर भी रहती हैं बाग में,क्योंकि बाग भी नहीं होता बागघास के बगैर माली भी रखता हैथोड़ा-बहुत ध्यानघास का,ताकि बढ़ सके गुलाब की सुंदरता कुछ औरयदि घास भीपैदा नहीं करेंगी ख़ुशबूया नहीं बनेंगी कँटीलीवे होती रहेंगी शोषितऔर गुलाब बना रहेगा कैपिटलिस्ट।
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