PodParley PodParley
Cheetiyaan | Gagan Gill

EPISODE · Jul 16, 2023 · 1 MIN

Cheetiyaan | Gagan Gill

from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio

चीटियां - गगन गिल चींटियाँ अपने घर का रास्ता भूल गई थीं। हमारी नींद और हमारी देह की बीच वे क़तार बनाती चलतीं। उनकी स्मृति में बिखरा रहता उनका अदृश्य आटा, जो किसी दूसरे देश-काल ने बिखेरा था। उसे ढूँढ़ती वे चलती जातीं पृथ्वी के एक सिरे से दूसरे की ओर। वे अपने दाँत गड़ातीं हर जीवित व मृत वस्तु में। उनके चलने से पृथ्वी के दुख हल्के होने लगते कि दिशाएँ घूमने लगतीं, भ्रमित हो। ध्रुव बदलने लगते अपनी जगह। चींटियों का दुख लेकिन कोई न जानता था। बहुत पहले शायद कभी वे स्त्रियाँ रही हों। 

NOW PLAYING

Cheetiyaan | Gagan Gill

0:00 1:41

No transcript for this episode yet

We transcribe on demand. Request one and we'll notify you when it's ready — usually under 10 minutes.

URL copied to clipboard!