EPISODE · Dec 6, 2023 · 4 MIN
Chunaav | Anamika
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
चुनाव - अनामिकाअपनी चपलता मुद्राओं में भी नर्तकसम तो नहीं भूलतापहीया नहीं भूलता अपना धूरातू काहे भूल गई अनामिकातू कौन है याद रखशास्त्रों ने कहातू-तू मैं-मैं करती दुनिया ने उंगली उठाईआखिर तू है कौन किस खेत की मूलीमैं तो घबरा ही गईघबराकर सोचाइस विषम जीवन में मेरा सम कौन भलानाम तक कि कोई चौहत दीतो मुझको मिली नहींयों ही पुकारा कि कर किये लोग अनामिकाएक अकेला शब्द अनामिकाआगे नाथ न पीछे पगहपापा ने तो नाम रखते हुए की होगी यह कल्पनाकि नाम रूप के झमेले बांधे नहीं मुझकोऔर मैं अगाध ही रहूँआध्या जैसीघूमूँ-फिरूँ जग में बन कर जगतधात्रि जगत माताचाहती हूँ कि साकार करूं बेचारे पापा की कल्पनाऔर भूल जाऊँ घेरे बंदियाँलेकिन हर पग पर हैं बाड़ेअजकजा जाती हूँ जब पानी पूछते हुएलोग पूछ लेते हैं आज तलक आप लोग होते हैं कौनरह जाती हूँ मौनअपनी जड़ें टटोलतीपर मज़े की बात यह हैकि एक ख़ुफ़िया कार्रवाईएकदम से शुरू हो जाती है तब से ही मेरे उद्गम स्रोतों कीऔर ताड़ से गिरकर सीधा खजूर पर अटकती हूँजब मेरी जाती के लोगझाड़ देते हैं रहस्यवाद मेराऔर मिलाकर हाथ कहते हैं ऐन चुनाव की घड़ीहम एक ही तो हैं मैडमएक कुल गोत्र है हमाराअब की चुनाव में खड़ा हूँआपके भरोसे मत याद रख भूल जागाता है जोगीसारंगी परमुस्का कर बढ़ जाती हूँ आगे
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Chunaav | Anamika
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