EPISODE · Jul 28, 2023 · 2 MIN
डर जो हमें अपनी ओर खींचता है।
from मार्ग सत्य जीवन | Marg Satya Jeevan · host मार्ग सत्य जीवन
“डरो मत, क्योंकि परमेश्वर इसलिए आया है कि तुम्हारी जाँच करे, और इसलिए भी कि उसका भय तुम में बना रहे, जिससे कि तुम पाप न करो।” (निर्गमन 20:20) एक प्रकार का डर है जो दासवत् है और हमें परमेश्वर से दूर ले जाता है, तथा दूसरे प्रकार का डर है जो भला है और हमें परमेश्वर के निकट खींचता है। मूसा ने उसी पद में एक के विरूद्ध चिताया और दूसरे के लिए बुलाहट दिया, निर्गमन 20:20: “मूसा ने लोगों से कहा, ‘डरो मत, क्योंकि परमेश्वर इसलिए आया है कि तुम्हारी जाँच करे, और इसलिए भी कि उसका भय तुम में बना रहे, जिससे कि तुम पाप न करो।’” इस प्रकार के भले डर का सबसे स्पष्ट उदाहरण मैंने तब देखा जब मेरे एक बेटे ने जर्मन शेपर्ड कुत्ते की आँखों में आँखे डाल कर देखा था। हम अपनी कलीसिया के एक परिवार से मिलने गए हुए थे। मेरा बेटा कार्स्टन उस समय लगभग सात वर्ष का था। उस परिवार के पास एक बहुत बड़ा कुत्ता था जो सात वर्ष के बच्चे की आँखों में आँखे डाल कर खड़ा था। वह कुत्ता मिलनसार था और कार्स्टन को उसे मित्र बनाने में कोई समस्या नहीं हुई। परन्तु जब हमने कार्स्टन को कार से कोई वस्तु लाने के लिए भेजा जिसे हम लाना भूल गए थे, तो वह दौड़ते हुए जाने लगा और फिर वह कुत्ता भी धीमी आवाज में गुर्राते हुए जल्दी से उसके पीछे दौड़ा। और निश्चय ही इसने कार्स्टन को डरा दिया। परन्तु उस कुत्ते के स्वामी ने कहा, “कार्स्टन, तुम केवल चल कर क्यों नहीं जाते हो? जब लोग कुत्ते से दूर भागते हैं तो कुत्ते को अच्छा नहीं लगता है।” यदि कार्स्टन कुत्ते को गले लगाता तो वह मिलनसार था और उसका मुँह भी चाटता। परन्तु यदि वह कुत्ते से भागा तो वह गुर्राएगा और कार्स्टन को भयभीत कर देगा। प्रभु का भय मानने का अर्थ क्या है इसका चित्रण यही है। परमेश्वर चाहता है कि उसकी सामर्थ्य और पवित्रता हमारे भीतर भय उत्पन्न करे, उससे दूर ले जाने के लिए नहीं परन्तु उसके निकट आने के लिए। परमेश्वर का भय मानने का अर्थ है, सबसे पहले, उसे अपनी महान् सुरक्षा और सन्तुष्टि के रूप में त्याग देने से डरना। या दूसरे शब्दों में कहें तो हमें अपने अविश्वास के प्रति डरना चाहिए। परमेश्वर की भलाई पर भरोसा न रखने से डरना चाहिए। क्या यही रोमियों 11:20 की मुख्य बात नहीं है? “तू केवल अपने विश्वास के कारण स्थिर है। अभिमानी न हो, परन्तु भय मान।” अर्थात्, हमें जिस बात से डरना चाहिए वह है विश्वास न करना, विश्वास न होना। परमेश्वर से दूर भागने से डरें। परन्तु यदि हम उसके साथ चलेंगे और उसको गले लगाएँगे तो वह सदैव हमारा मित्र और रक्षक होगा।
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डर जो हमें अपनी ओर खींचता है।
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