EPISODE · Apr 17, 2023 · 2 MIN
Dharti Ke Is Hisse Mein | Rajesh Joshi
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
धरती के इस हिस्से में - राजेश जोशी धरती के इस हिस्से में इस समयसबसे तेज़ आवाज़ें चिड़ियों के चेहचाने की है धरती के इस हिस्से में इस समयसबसे तेज़ आवाज़ें किनारे से लहरों के टकराने की है इस समय इस हिस्से में समुद्रकिनारे की चट्टान पर अपनी लहर कोएक उस्तरे की तरह घिस रहा है क्या वो आसमान की दाढ़ी बनाने की तैयारी कर रहा है ?बहुत पास हलकी हलकी सी डुबुक की छोटी छोटी आवाज़ें हैंवहां मछलियाँ मस्ता रही हैं धरती के इस हिस्से में इस समयसबसे तेज़ आवाज़ें पेड़ों के सरसराने की हैं यहाँ सूर्य धीरे धीरे डूब रहा हैं चाँद धीरे धीरे ऊपर चढ़ रहा हैंनि:शब्द ! बेआवाज़ !!रतजगे की स्मृतियों मेंचाँद के न जाने कितने चेहरे हैं यह चेहरा लेकिन उन सबसे अलग हैंधरती का यह हिस्सा लेकिन एक हिस्सा भर ही हैंहमारी धरती काअफ़सोस !!
What this episode covers
धरती के इस हिस्से में - राजेश जोशी धरती के इस हिस्से में इस समयसबसे तेज़ आवाज़ें चिड़ियों के चेहचाने की है धरती के इस हिस्से में इस समयसबसे तेज़ आवाज़ें किनारे से लहरों के टकराने की है इस समय इस हिस्से में समुद्रकिनारे की चट्टान पर अपनी लहर कोएक उस्तरे की तरह घिस रहा है क्या वो आसमान की दाढ़ी बनाने की तैयारी कर रहा है ?बहुत पास हलकी हलकी सी डुबुक की छोटी छोटी आवाज़ें हैंवहां मछलियाँ मस्ता रही हैं धरती के इस हिस्से में इस समयसबसे तेज़ आवाज़ें पेड़ों के सरसराने की हैं यहाँ सूर्य धीरे धीरे डूब रहा हैं चाँद धीरे धीरे ऊपर चढ़ रहा हैंनि:शब्द ! बेआवाज़ !!रतजगे की स्मृतियों मेंचाँद के न जाने कितने चेहरे हैं यह चेहरा लेकिन उन सबसे अलग हैंधरती का यह हिस्सा लेकिन एक हिस्सा भर ही हैंहमारी धरती काअफ़सोस !!
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