दशाश्वमेध घाट और अद्भुत गंगा आरती episode artwork

EPISODE · Aug 2, 2021 · 22 MIN

दशाश्वमेध घाट और अद्भुत गंगा आरती

from कल थी काशी, आज है बनारस · host Banarasi/singh

काशी के पंच तीर्थों में से एक है दशाश्वमेध घाट. काशी आए और गंगा नहीं नहाए... काशी आए और पान नहीं खाए. काशी आए और घाट पर आरती नहीं देखे, जैसे कयी वचन सुनने को मिलेंगे जो काशी के हर गली और मोहल्ला और घाट को महत्व देते हैं. पर काशी में जो बहता है वो विश्वास और मोक्ष वाली शांति आपको शहर के इस घाट वाले क्षेत्र में जरूर मिलेगी. कहानी उस घाट की जहाँ स्वयं धरती के रचयिता ब्रह्म ने दशाश्वमेध यज्ञ किऐ. जहाँ विष्णु सह परिवार रहे, जहाँ आना सौभाग्य समझा स्वयं शिव जी ने. ऐसे दिव्य स्थान काशी का मुख्य आकर्षण गंगा के घाटों का घाट दशाश्वमेध घाट है. वैसे हर घाट का अपनी कहानी और कथा है. पर जो काशी सा प्राचीन और बनारस सा नया है. जो जिंदा है जो चेतन है. वह है दशाश्वमेध घाट. जहाँ गंगा आरती अति विशेष और विशिष्टता के साथ परंपरा अनुसार हर दिन होती है. सनातन धर्म में नदी को माता का दर्जा दिया गया. यहाँ माँ की रोज आरती कर उस भाव को हर रोज व्यक्त किया जाता है. क्या देशी क्या विदेशों हर मनुष्य बस इस जगह आना चाहता है रुक जाना चाहता है. इस ठहराव में जो आनंद है उसे कोई फोन में कोई दिमाग में कोई यादों में सजों लेना चाहता है. पर हम सब सजोंते है एक दृश्य को पर इसके पीछे कितना कुछ घटता है हमारे मन में उसे बस मौन होकर अनुभव ही कर पाते हैं. जीते नहीं. जीना है तो रुकना पडे़गा. सीमा से परे जाकर. काशी एक अनुभव है जिसे परिभाषित नहीं किया जा सकता. बस यह एक जीवंत सत्य है. यही इसकी महत्व है. काशी के लोग उसे छोड़ नहीं पाते उन्हें पान का भांग का नशा नहीं. उन्हें ज्ञान का, विज्ञान का, शिव को बाबा कहने का नशा है. गंगा को मां कहकर उसके जल में घुल जाने का जुनून है. वो कहते हैं कि पैसा त खुब कमा लेब बहरे जा के लेकिन बाबा का सेवा करे खातिर इहे जनम कम पड़त हव. जवन मजा गमछा में हव उ कवनो और पोशाक में नाही. जवन मजा भोले के काम करे में हव उ मजा एसी वाला आफिस में नाही. काम भर बाबा दे देलन. अब कतो भटके के ना हा, अगर भटके के हव त काशी में भटकब बहरे नाही. दुनिया क कुल ज्ञान क केन्द्र हव बनारस. बस इहें जन्म स्थान ह, इहे मोक्ष देयी. खैर यह भाव काशी के लोगों का है. आप कुछ भी सोच सकते हैं. इहा के लोग मस्त रहेलन. जिंदगी में कुल समस्या क हल भोले से कहेलन. उहे इहां के राजा हवन. का समझ आइल. जाये दा. जवन समझ में आ जाये उ बनारस थोडे़ हव. हर हर महादेव. बम बम बोल रहा है काशी. सावन में गंगा जी में अति विस्तार होता है. पर भक्ति में डुबी रहती है. काशी. जैसे गर्मी, बारिश, सर्दी सब मौसम आता है और जाता है पर काशी में बाबा की भक्ति का कोई मौसम नहीं. बस एक लोटा पानी, चंदन, फूल, और गमछा पहने काशी के लोग मिल जायेंगे. बाबा को नहलाते हुए. जहाँ ईश्वर की आराधना आदत हो, वही तो काशी है. सुबह शाम की पैलगी, इहाँ परंपरा नहीं है शौख है, आशा है. जैसे घर से निकलने से पहले मां बाबा का आशीर्वाद जरूरी है वैसे ही बाबा के दरबार में सर झुकाना भी उतना ही जरुरी है. बस ऐसा ही है काशी.

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