EPISODE · Apr 6, 2022 · 29 MIN
दुर्गा कुंड मंदिर के स्थापना की कहानी
from कल थी काशी, आज है बनारस · host Banarasi/singh
जय माता दी श्रोताओं और मित्रों, जगत जननी माँ अम्बा सबको शक्ति दें सबका कल्याण करे। इसी सद्भावना से मेरा आपकी होस्ट banarasi singh का अभिवादन स्वीकार करिए। दुर्गा कुंड वो स्थान है जहां जल कभी खत्म नहीं होता। इसमे साथ कुंड है। ये सात तल पाताल लोक जैसे भान करते हैं इसलिए यहां जल पाताल से आता है। बहुत युगों पहले स्मृतियों और श्रुति के आधार पर ऐसी घटना का वर्णन मिलता है कि काशी राज्य के राजा सूबाहु के घर जया नामक कन्या का जन्म हुआ जो देवी भक्त थीं अति रूपवती और गुणवान कन्या जो जब युवा हुई तब पिता ने उनके विवाह के लिए स्वयंवर का आयोजन किया। इससे कुछ समय पूर्व जया को एक सपना आया जिसमें उन्हें देवी इच्छा se उनके वर का नाम और स्थान का पता चला। जया ने पिता को सब कुछ बताया और स्वयंवर से जुड़ी चिंता पर बात की। पिता ने कन्या इच्छा को स्वीकार कर स्वयंवर रद्द किया और सभी से क्षमा याचना की। भारत वर्ष के तत्कालीन राजाओं ने इसे अपमान माना और अयोध्या के राजकुमार सुदर्शन जिसे जया ने अपने पति रूप में चुना था उससे युद्ध को तैयार हुए। दूसरी ओर राजकुमार सुदर्शन अभी गुरुकुल से राज्य पधारे थे उन्हें जब पता चला कि काशी राज की कन्या जया ने उनका चयन किया है वो भी जया को स्वीकार करने के लिए काशी आए। जहां उनका अन्य राजाओं से युद्ध हुआ। आगे क्या हुआ जानने के लिए सुने पॉडकास्ट कल थी काशी आज है बनारस " stay tune and एंजॉय स्टोरी of oldest सिटी ऑफ वर्ल्ड। kashi the Mysterious land ऑफ शिव।
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